इंदौर: शहर में गरीब और मजदूर वर्ग के परिवारों के बिजली बिलों में हो रही अप्रत्याशित वृद्धि और शिकायतों के बाद भी समाधान न होना एक गंभीर समस्या बनती जा रही है. बिजली के भारी भरकम बिलों से राहत पाने और इस समस्या के समाधान के लिए उपभोक्ता बिजली दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन समस्या दूर नहीं हो पा रही है और गरीबों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है.
बिजली दरों में बढ़ोतरी के बीच वार्ड क्रमांक 64 के काकड़ कितावत क्षेत्र से खबर सामने आई है कि इस बस्ती में बड़ी संख्या में मजदूर और निम्न आय वर्ग के परिवार रहते हैं. यहां परिवारों की आय सीमित है और कई महिला-पुरुष रोजाना मजदूरी करने बाहर जाते हैं ऐसे में बढ़े हुए बिजली बिलों ने घरेलू बजट बिगाड़ दिया है. पहले जिन घरों में करीब 300 रुपए का बिजली बिल आता था, वहां अब 3 से 5 गुना तक ज्यादा बिल पहुंच रहा है.
खास बात यह है कि कई छोटे मकानों में बिजली की खपत भी बेहद सीमित है. कुछ घरों में केवल बल्ब और सामान्य घरेलू उपकरणों का उपयोग होने के बावजूद अधिक बिल आने की शिकायत है. क्षेत्रवासियों के अनुसार उन्होंने बिजली कंपनी के दफ्तर जाकर कई बार शिकायत कर बिलों की जांच की मांग की, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ. अब सवाल यह है कि कम खपत वाले इन परिवारों के बिल अचानक इतने अधिक क्यों बढ़ रहे हैं? रहवासियों ने बिजली कंपनी को मीटर रीडिंग और बिलिंग की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है.
यह बोले रहवासी…
बिल भरने में एक दिन लेट हो जाओ तो बिजली का कनेक्शन काट देते हैं, पहले 300-400 रुपए बिल आता था, अब हजार से डेढ़ हजार तक का बिल आ रहा है.
– बरखा खेड़े
अपने परिवार को पालने के लिए क्षेत्र की अधिकतर महिलाएं भी काम पर जाती हैं. आमदनी तो इतनी है नहीं, कि बढ़कर आ रहे बिजली के बिल भर सकें. सरकार को तत्काल इस समस्या को दूर करना चाहिए.
– मीरा बाई
चार महीने का चौवीस हजार रुपए बिल बता रहे हैं, जब मैं बिजली दफ्तर गया और शिकायत की तो कोई सुनने को तैयार नहीं हैं, हर तरफ गरीब का ही मरण है साहब.
– अजय चौहान
