जिनेवा, 22 सितंबर (वार्ता) यमन में सितंबर की शुरुआत से अब तक 1.30 लाख से अधिक लोग अपने घर छोड़कर कहीं और शरण ले चुके हैं। देश में कई मोर्चों पर लड़ाई फैलने के बीच संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी यूएनएचसीआर ने चेतावनी दी है कि संघर्ष बढ़ने से देश के भीतर और अदन की खाड़ी के पार बड़े पैमाने पर विस्थापन हो सकता है।
यूएनएचसीआर ने कहा कि बढ़ती हिंसा के कारण बड़ी संख्या में लोग जिबूती, सोमालिया और अन्य देशों की ओर जाने को मजबूर हो रहे हैं। लड़ाई का सबसे अधिक असर आम नागरिकों पर पड़ा है। अब तक कम से कम 110 लोगों के हताहत होने की सूचना है, जिनमें 28 लोगों की मौत हुई है। एजेंसी ने कहा कि यह संख्या बढ़ने की आशंका है।
यूएनएचसीआर के अनुसार, ताइज़ प्रांत में कुल विस्थापन का 60 प्रतिशत से अधिक हुआ है। कई परिवार लड़ाई, सड़कों के बंद होने तथा परिवहन और ईंधन की कमी के कारण प्रांत से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। अल जौफ, मआरिब और अल हुदैदाह से भी लोगों के विस्थापित होने की रिपोर्टें हैं। इससे पता चलता है कि लड़ाई कई मोर्चों पर फैल रही है।
एजेंसी ने कहा कि 90,000 से अधिक विस्थापित लोग अदन, लहज, अबयान, अल धाले और मआरिब पहुंच चुके हैं। इससे पहले से ही भीड़ भरे विस्थापन केंद्रों और कमजोर बुनियादी सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। यूएनएचसीआर के अनुसार, नए विस्थापित लोगों को तत्काल आश्रय, भोजन, स्वच्छ पानी, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा की जरूरत है।
ताजा संघर्ष से पहले भी यमन गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहा था। देश में 52 लाख से अधिक लोग पहले ही आंतरिक रूप से विस्थापित थे और 2.2 करोड़ से अधिक लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत थी। यमन में मुख्य रूप से सोमालिया और इथियोपिया से आए करीब 65,000 शरणार्थी और शरण मांगने वाले लोग भी रह रहे हैं।
यूएनएचसीआर ने संसाधनों और कर्मचारियों की तैनाती तेज करने के लिए यमन, जिबूती और सोमालिया के लिए प्रारंभिक स्तर-1 आपात स्थिति घोषित की है। एजेंसी ने 200 विस्थापित परिवारों को आपात नकद सहायता दी है और 1,000 अन्य परिवारों की मदद करने की योजना बनाई है। 70 प्रतिशत से अधिक विस्थापित परिवार आपातकालीन या खराब स्थिति वाले आश्रयों में रह रहे हैं। इसके मद्देनजर यूएनएचसीआर ने अदन और लहज में 500 परिवारों के लिए आश्रय संबंधी नकद सहायता के लिए धन की व्यवस्था की है। वह 1,000 आश्रय मरम्मत किट वितरित करने की तैयारी भी कर रही है और 2,000 परिवारों को शामिल करते हुए सुरक्षा संबंधी आकलन शुरू कर चुकी है।
यूएनएचसीआर दुबई में रखे अपने आपात भंडार से राहत सामग्री के 3,000 पैकेज भेज रहा है। इनमें सोने के लिए चटाइयां, कंबल, सौर लैंप, रसोई के सामान, पानी के कंटेनर, मच्छरदानी और प्लास्टिक की तिरपाल शामिल हैं। एजेंसी अपने सहयोगी संगठनों के साथ अदन से करीब 150 सोमाली शरणार्थियों की मोगादिशु में स्वैच्छिक वापसी की प्रक्रिया पर भी काम कर रही है।
सक्रिय युद्ध मोर्चों, असुरक्षा, आवाजाही पर प्रतिबंध, दूरसंचार सेवाओं में बाधा और सड़कों तथा अन्य बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान के कारण मानवीय राहत अभियान प्रभावित हो रहे हैं। अल मोखा बंदरगाह को भी नुकसान पहुंचा है। यूएनएचसीआर ने कहा, “प्रभावित लोगों तक सुरक्षित और बिना किसी बाधा के पहुंच तत्काल जरूरी है।”
धन की कमी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। यूएनएचसीआर के यमन अभियान के लिए 2026 में अब तक केवल 18 प्रतिशत धन उपलब्ध हो पाया है। ताजा संघर्ष शुरू होने से पहले भी एजेंसी को जरूरी 19.4 करोड़ डॉलर के मुकाबले केवल 3.4 करोड़ डॉलर मिले थे। एजेंसी का अनुमान है कि तत्काल मानवीय जरूरतों वाले करीब 2.31 लाख लोगों की मदद के लिए उसे 2.5 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त राशि की तत्काल जरूरत है।
अदन की खाड़ी के पार जिबूती में 3,000 से अधिक यमनी शरणार्थी पहुंच चुके हैं, जबकि सैकड़ों लोग सोमालीलैंड और पुंटलैंड भी पहुंचे हैं। जिबूती पहुंचने वाले यमनी लोगों की दैनिक संख्या 2015 के बाद दर्ज किए गए अब तक के सबसे बड़े दैनिक आंकड़े को पार कर चुकी है। यूएनएचसीआर और उसके सहयोगी संगठन 10,000 से अधिक लोगों के पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं। समुद्र की स्थिति अक्टूबर के मध्य तक बेहतर होने की उम्मीद है, जिससे और अधिक लोगों के समुद्र पार करने की संभावना है।
जिबूती में यूएनएचसीआर के अभियान के लिए केवल 15 प्रतिशत धन उपलब्ध है। एजेंसी और उसके मानवीय सहयोगी पंजीकरण, स्वागत, सुरक्षा तथा अन्य आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए 1.35 करोड़ डॉलर की मांग कर रहे हैं। यूएनएचसीआर ने कहा, “हम आम नागरिकों पर फिर से शुरू हुए संघर्ष के असर को लेकर बेहद चिंतित हैं। इसमें बड़े पैमाने पर विस्थापन और पीड़ा भी शामिल है।”

