नई दिल्ली, वेस्ट बैंक के कब्जे वाले इलाकों में इजराइली बसने वालों (सेटलर्स) द्वारा बढ़ती हिंसा ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर कूटनीतिक तनाव पैदा कर दिया है। 16 अक्टूबर को रामल्ला के पास अबू फल्लाह गांव में कवरेज के दौरान ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ की वरिष्ठ फोटोपत्रकार हेइडी लेविन पर इजराइली सेटलर्स ने बेरहमी से हमला कर उन्हें घायल कर दिया। इसके अगले ही दिन ईसाई बहुल गांव तैबेह के दौरे पर गए बेल्जियम, फ्रांस, पोलैंड और कैथोलिक चर्च के उच्चस्तरीय यूरोपीय राजनयिकों के प्रतिनिधिमंडल पर भी हमला किया गया। इन दोनों घटनाओं के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है, जिसके चलते इजरायली प्रशासन को आनन-फानन में 10 संदिग्धों को गिरफ्तार करना पड़ा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इजराइल को दी सख्त हिदायत, राजदूत माइक हकाबी ने हमलावरों को बताया ‘नकाबपोश कायर’
इन हमलों पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इजराइली सरकार को वेस्ट बैंक में सेटलर्स की हिंसा पर तुरंत लगाम लगाने की हिदायत दी है। वहीं, इजराइल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी ने हमलावर सेटलर्स को “नकाबपोश कायर” करार देते हुए कड़ी निंदा की। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, वेस्ट बैंक में लगभग 7,37,332 इजराइली बसने वाले रहते हैं और हाल के महीनों में फिलिस्तीनियों तथा अंतरराष्ट्रीय संवाददाताओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में भारी उछाल आया है। मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि इजराइल सरकार के कुछ कट्टरपंथी मंत्रियों के संरक्षण के कारण इन उपद्रवियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं हो पाती है।
यूरोपीय देशों और कनाडा ने अवैध बस्तियों के सामान पर प्रतिबंध लगाने की मांग की, टू-स्टेट सॉल्यूशन पर मंडराया संकट
वेस्ट बैंक में बिगड़ते हालात को देखते हुए ब्रिटेन, कनाडा और यूरोप के 11 देशों ने इजराइल की इन अवैध बस्तियों से आने वाले सामानों पर व्यापारिक प्रतिबंध और आयात रोकने की मांग तेज कर दी है। भारत सहित कई वैश्विक शक्तियों ने एक बार फिर जोर देकर कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ ही इस क्षेत्र में स्थायी शांति का एकमात्र रास्ता है। हालांकि, आगामी 27 अक्टूबर को होने वाले इजराइली आम चुनावों और चरमपंथी सेटलर्स के बढ़ते प्रभाव के बीच इस हिंसक दौर पर काबू पाना अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने एक बेहद कठिन और कूटनीतिक चुनौती बना हुआ है।

