ज्वाइंट बैंक खाते में एक की मौत के बाद पैसों का क्या होता है? जानिए निकासी पर क्या कहते हैं RBI के नियम

मुंबई, किसी ज्वाइंट खाताधारक की मृत्यु के बाद जीवित साथी बैंक से जमा राशि निकाल सकता है। लेकिन उस जमा राशि पर अंतिम कानूनी अधिकार मृतक के सभी कानूनी वारिसों का ही होता है।

किसी ज्वाइंट खातेदार की मृत्यु के बाद पहला सवाल यही उठता है कि जमा पैसा किसका होगा। आम तौर पर लोग मान लेते हैं कि जीवित खाताधारक का उस पैसे पर अपने आप पूरा हक हो गया, पर ऐसा नहीं है।

आरबीआई (RBI) अनुसार खाते का निपटारा खाता खोलते समय दर्ज कराए गए निर्देशों पर निर्भर करता है। अगर खाते में ‘आइदर या सरवाइवर’ का मैंडेट है तो बैंक केवल मृत्यु प्रमाण पत्र देखकर पैसा सौंप देता है।

लेकिन बैंक से पैसा मिलना ही उस पर अंतिम कानूनी मालिकाना हक होना नहीं माना जाता। ऐसे मामलों में मृतक के अन्य कानूनी वारिसों का अधिकार बना रहता है जिसे जानना बेहद जरूरी है।

आइदर या सरवाइवर नियम और जमा राशि की निकासी
ज्वाइंट खाते में आइदर या सरवाइवर (Either or Survivor) और फॉर्मर या सरवाइवर (Former or Survivor) जैसे निर्देश अहम होते हैं। अगर खाता आइदर या सरवाइवर श्रेणी का है तो दोनों में से कोई भी जीवनकाल में खाता चला सकता है।

किसी एक की मृत्यु के बाद बैंक केवल मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) और पहचान पत्र देखकर जीवित साथी को राशि सौंप देता है। RBI अनुसार ऐसे स्पष्ट मामलों में बैंक को उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate) मांगने की जरूरत नहीं होती।

बैंक बिना किसी कठिन प्रक्रिया के जमा राशि का भुगतान जीवित खाताधारक को कर देता है। हालांकि अगर खाते में ऐसा सरवाइवर क्लॉज दर्ज नहीं था तो प्रक्रिया कठिन हो जाती है और सभी कानूनी वारिसों की सहमति जरूरी होती है।

बैंक से राशि मिलना और अंतिम मालिकाना हक का कानूनी अंतर
लोगों में सबसे बड़ा भ्रम यही रहता है कि बैंक से पैसा मिल जाने पर वही व्यक्ति उसका अंतिम मालिक बन जाता है। RBI ने साफ किया है कि बैंक जिस जीवित खाताधारक को पैसा सौंपता है, वह उस राशि का मालिक नहीं होता।

बैंक से पैसा पाने वाला व्यक्ति मृतक के कानूनी वारिसों (Legal Heirs) के लिए केवल एक ट्रस्टी या संरक्षक की तरह काम करता है। अगर मृतक की संपत्ति में बच्चों या माता-पिता का हिस्सा बनता है तो वे भुगतान के बाद भी अपना दावा कर सकते हैं।

बैंक का कार्य केवल राशि को सुरक्षित तरीके से सौंपना है, संपत्ति का बंटवारा करना नहीं। किसी खातेदार की मृत्यु के बाद उनका ATM कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग इस्तेमाल करना गैर-कानूनी है और सही तरीका तुरंत बैंक को क्लेम फॉर्म देना है।

क्लेम निपटारे की 15 दिनों की समय-सीमा और FD के नियम
RBI के ग्राहक सेवा ढांचे तहत सभी जरूरी दस्तावेज जमा करने के 15 दिनों के भीतर बैंक को दावे का निपटारा करना होता है। बैंक तय समय-सीमा में जीवित खाताधारक या नॉमिनी को राशि जारी कर देता है।

बचत खाते की तरह फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD के मामलों में भी काफी हद तक समान नियम लागू होते हैं। अगर खाता खोलते समय दोनों खाताधारकों ने मैच्योरिटी से पूर्व समय-पूर्व निकासी का ज्वाइंट निर्देश दिया था, तभी FD तुड़वाई जा सकती है।

ऐसा निर्देश होने पर ही जीवित खाताधारक अवधि पूरी होने से पहले FD निकाल सकता है। संक्षेप में कहें तो किसी स्वजन के निधन के बाद मैंडेट की जांच करें और विरासत नियमों अनुसार आगे बढ़ें।

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