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मिलेगा कैरबा का पानी नवभारत न्यूज भोपाल, कोलार के रहवासियों के द्वार 30 वर्षों के बाद पानी पहुंच गया है. ट्ïयूबवेल के पानी पर निर्भर कोलारवासी अब केरवा डेम के पानी से राजमर्रा के काम करेंगे. सोमवार से यहां पानी की आपूर्ति प्रारंभ हो गई है. यहां पाइप लाइन में टेङ्क्षस्टग के दौरान लीकेज हुआ था, जिसे बड़ी मशक्कत के बाद निगम कर्मियों ने सुधारा. कोलार में अब तक टैंकर आधारित जल व्यवस्था संचालित थी. कुछेक घरों में ट्ïयूबवेल के जल पर रहवासी निर्भर थे. कोलारवासियों में उत्साह है कि उनको अब पानी के लिये निगम के टैंकरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेेगा. पर केरवा के जल को यहां पहुंचने में काफी समय लग गया. गौरतलब है कि पूर्व केंद्र सरकार ने यहां 52 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित की थी. यहां मार्च 2016 में केरवा के पानी की आपूर्ति प्रारंभ हो जानी थी, पर डेढ़ वर्ष बाद यहां यह सौगात मिली है. यहां वार्ड 80 के घरों में सबसे पहले पाइप लाइन के जरिये पानी पहुंचाया गया. पूर्व में 1000-1200 रु. पानी के टैंकरों पर खर्च करने वाले रहवासियों को जलकर के रूप में 180 रुपये प्रतिमाह देना होगा. पेयजल योजना का शुभारंभ विधायक रामेश्वर शर्मा व क्षेत्रीय पार्षद रविन्द्र यति ने किया. शर्मा ने कहा कि कोलार की जनता अब टैंकर और ट्ïयूबवेल की बजाय पाइप लाइन के जल पर आश्रित रहेगी. क्षेत्रीय पार्षद यति ने बताया कि नगर निगम ने पुख्ता इंतजाम किये हैं. हम कोलारवासियों को पानी की समस्या से दो-चार नहीं होने देंगे. केरवा पहाड़ी पर बने ट्रीटमेंट प्लांट से 110 कि.मी. लंबी पेयजल पाइप लाइन यहां बिछाई गई है. मोहताज था कोलार कोलारवासियों को लंबे समय से डेम का पानी न दिये जाने का विरोध था, जबकि यहीं से होकर पूरे शहर में पेयजल सप्लाई होती है. डेम के नजदीक होने के बाद भी कोलार डेम के पानी से मोहताज था. गर्मियों के दिनों में यहां भूमिगत जल का स्तर नीचे जाने के कारण यहां पानी की कमी हो जाती थी. कोलार पूर्व में नगर पालिका थी, जिस कारण नगर निगम पर भी यहां पानी के किल्लत की जिम्मेदारी नहीं थी. कोलार जब नगर निगम भोपाल में शामिल हो गया तो लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही वह पानी की समस्या से मुक्त होंगे. पानी संरक्षण करके रखना यहां मजबूरी थी, जिस कारण यहां डेंगू के मरीजों की तादात भी बढ़ गई थी, क्योंकि डेंगू का मच्छर साफ पानी में होता है. अब इस मुहिम के बाद कोलार की जनता में खुशी की लहर है. इस मुद्दे पर रहवासियों की राय कोलार में 12 वर्षो से रह रहे हैं. पानी के टैंकरों से ही पानी की आपूर्ति कर रहे हैं. टैंकरों में प्रतिमाह 1200 रु. खर्च होते थे. पिरन देवरे रहवासी महाबली नगर यहीं से होकर पाइप लाइन जाती है, जिससे पूरे शहर में पानी की सप्लाई होती है. पर कोलार के रहवासी उस पानी से कोसों दूर थे. मधुर चतुर्वेदी रहवासी सर्वधर्म कॉलोनी"/> मिलेगा कैरबा का पानी नवभारत न्यूज भोपाल, कोलार के रहवासियों के द्वार 30 वर्षों के बाद पानी पहुंच गया है. ट्ïयूबवेल के पानी पर निर्भर कोलारवासी अब केरवा डेम के पानी से राजमर्रा के काम करेंगे. सोमवार से यहां पानी की आपूर्ति प्रारंभ हो गई है. यहां पाइप लाइन में टेङ्क्षस्टग के दौरान लीकेज हुआ था, जिसे बड़ी मशक्कत के बाद निगम कर्मियों ने सुधारा. कोलार में अब तक टैंकर आधारित जल व्यवस्था संचालित थी. कुछेक घरों में ट्ïयूबवेल के जल पर रहवासी निर्भर थे. कोलारवासियों में उत्साह है कि उनको अब पानी के लिये निगम के टैंकरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेेगा. पर केरवा के जल को यहां पहुंचने में काफी समय लग गया. गौरतलब है कि पूर्व केंद्र सरकार ने यहां 52 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित की थी. यहां मार्च 2016 में केरवा के पानी की आपूर्ति प्रारंभ हो जानी थी, पर डेढ़ वर्ष बाद यहां यह सौगात मिली है. यहां वार्ड 80 के घरों में सबसे पहले पाइप लाइन के जरिये पानी पहुंचाया गया. पूर्व में 1000-1200 रु. पानी के टैंकरों पर खर्च करने वाले रहवासियों को जलकर के रूप में 180 रुपये प्रतिमाह देना होगा. पेयजल योजना का शुभारंभ विधायक रामेश्वर शर्मा व क्षेत्रीय पार्षद रविन्द्र यति ने किया. शर्मा ने कहा कि कोलार की जनता अब टैंकर और ट्ïयूबवेल की बजाय पाइप लाइन के जल पर आश्रित रहेगी. क्षेत्रीय पार्षद यति ने बताया कि नगर निगम ने पुख्ता इंतजाम किये हैं. हम कोलारवासियों को पानी की समस्या से दो-चार नहीं होने देंगे. केरवा पहाड़ी पर बने ट्रीटमेंट प्लांट से 110 कि.मी. लंबी पेयजल पाइप लाइन यहां बिछाई गई है. मोहताज था कोलार कोलारवासियों को लंबे समय से डेम का पानी न दिये जाने का विरोध था, जबकि यहीं से होकर पूरे शहर में पेयजल सप्लाई होती है. डेम के नजदीक होने के बाद भी कोलार डेम के पानी से मोहताज था. गर्मियों के दिनों में यहां भूमिगत जल का स्तर नीचे जाने के कारण यहां पानी की कमी हो जाती थी. कोलार पूर्व में नगर पालिका थी, जिस कारण नगर निगम पर भी यहां पानी के किल्लत की जिम्मेदारी नहीं थी. कोलार जब नगर निगम भोपाल में शामिल हो गया तो लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही वह पानी की समस्या से मुक्त होंगे. पानी संरक्षण करके रखना यहां मजबूरी थी, जिस कारण यहां डेंगू के मरीजों की तादात भी बढ़ गई थी, क्योंकि डेंगू का मच्छर साफ पानी में होता है. अब इस मुहिम के बाद कोलार की जनता में खुशी की लहर है. इस मुद्दे पर रहवासियों की राय कोलार में 12 वर्षो से रह रहे हैं. पानी के टैंकरों से ही पानी की आपूर्ति कर रहे हैं. टैंकरों में प्रतिमाह 1200 रु. खर्च होते थे. पिरन देवरे रहवासी महाबली नगर यहीं से होकर पाइप लाइन जाती है, जिससे पूरे शहर में पानी की सप्लाई होती है. पर कोलार के रहवासी उस पानी से कोसों दूर थे. मधुर चतुर्वेदी रहवासी सर्वधर्म कॉलोनी"/> मिलेगा कैरबा का पानी नवभारत न्यूज भोपाल, कोलार के रहवासियों के द्वार 30 वर्षों के बाद पानी पहुंच गया है. ट्ïयूबवेल के पानी पर निर्भर कोलारवासी अब केरवा डेम के पानी से राजमर्रा के काम करेंगे. सोमवार से यहां पानी की आपूर्ति प्रारंभ हो गई है. यहां पाइप लाइन में टेङ्क्षस्टग के दौरान लीकेज हुआ था, जिसे बड़ी मशक्कत के बाद निगम कर्मियों ने सुधारा. कोलार में अब तक टैंकर आधारित जल व्यवस्था संचालित थी. कुछेक घरों में ट्ïयूबवेल के जल पर रहवासी निर्भर थे. कोलारवासियों में उत्साह है कि उनको अब पानी के लिये निगम के टैंकरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेेगा. पर केरवा के जल को यहां पहुंचने में काफी समय लग गया. गौरतलब है कि पूर्व केंद्र सरकार ने यहां 52 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित की थी. यहां मार्च 2016 में केरवा के पानी की आपूर्ति प्रारंभ हो जानी थी, पर डेढ़ वर्ष बाद यहां यह सौगात मिली है. यहां वार्ड 80 के घरों में सबसे पहले पाइप लाइन के जरिये पानी पहुंचाया गया. पूर्व में 1000-1200 रु. पानी के टैंकरों पर खर्च करने वाले रहवासियों को जलकर के रूप में 180 रुपये प्रतिमाह देना होगा. पेयजल योजना का शुभारंभ विधायक रामेश्वर शर्मा व क्षेत्रीय पार्षद रविन्द्र यति ने किया. शर्मा ने कहा कि कोलार की जनता अब टैंकर और ट्ïयूबवेल की बजाय पाइप लाइन के जल पर आश्रित रहेगी. क्षेत्रीय पार्षद यति ने बताया कि नगर निगम ने पुख्ता इंतजाम किये हैं. हम कोलारवासियों को पानी की समस्या से दो-चार नहीं होने देंगे. केरवा पहाड़ी पर बने ट्रीटमेंट प्लांट से 110 कि.मी. लंबी पेयजल पाइप लाइन यहां बिछाई गई है. मोहताज था कोलार कोलारवासियों को लंबे समय से डेम का पानी न दिये जाने का विरोध था, जबकि यहीं से होकर पूरे शहर में पेयजल सप्लाई होती है. डेम के नजदीक होने के बाद भी कोलार डेम के पानी से मोहताज था. गर्मियों के दिनों में यहां भूमिगत जल का स्तर नीचे जाने के कारण यहां पानी की कमी हो जाती थी. कोलार पूर्व में नगर पालिका थी, जिस कारण नगर निगम पर भी यहां पानी के किल्लत की जिम्मेदारी नहीं थी. कोलार जब नगर निगम भोपाल में शामिल हो गया तो लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही वह पानी की समस्या से मुक्त होंगे. पानी संरक्षण करके रखना यहां मजबूरी थी, जिस कारण यहां डेंगू के मरीजों की तादात भी बढ़ गई थी, क्योंकि डेंगू का मच्छर साफ पानी में होता है. अब इस मुहिम के बाद कोलार की जनता में खुशी की लहर है. इस मुद्दे पर रहवासियों की राय कोलार में 12 वर्षो से रह रहे हैं. पानी के टैंकरों से ही पानी की आपूर्ति कर रहे हैं. टैंकरों में प्रतिमाह 1200 रु. खर्च होते थे. पिरन देवरे रहवासी महाबली नगर यहीं से होकर पाइप लाइन जाती है, जिससे पूरे शहर में पानी की सप्लाई होती है. पर कोलार के रहवासी उस पानी से कोसों दूर थे. मधुर चतुर्वेदी रहवासी सर्वधर्म कॉलोनी">

30 साल बाद कोलार को मिला पानी

2017/12/26



मिलेगा कैरबा का पानी नवभारत न्यूज भोपाल, कोलार के रहवासियों के द्वार 30 वर्षों के बाद पानी पहुंच गया है. ट्ïयूबवेल के पानी पर निर्भर कोलारवासी अब केरवा डेम के पानी से राजमर्रा के काम करेंगे. सोमवार से यहां पानी की आपूर्ति प्रारंभ हो गई है. यहां पाइप लाइन में टेङ्क्षस्टग के दौरान लीकेज हुआ था, जिसे बड़ी मशक्कत के बाद निगम कर्मियों ने सुधारा. कोलार में अब तक टैंकर आधारित जल व्यवस्था संचालित थी. कुछेक घरों में ट्ïयूबवेल के जल पर रहवासी निर्भर थे. कोलारवासियों में उत्साह है कि उनको अब पानी के लिये निगम के टैंकरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेेगा. पर केरवा के जल को यहां पहुंचने में काफी समय लग गया. गौरतलब है कि पूर्व केंद्र सरकार ने यहां 52 करोड़ की धनराशि प्रस्तावित की थी. यहां मार्च 2016 में केरवा के पानी की आपूर्ति प्रारंभ हो जानी थी, पर डेढ़ वर्ष बाद यहां यह सौगात मिली है. यहां वार्ड 80 के घरों में सबसे पहले पाइप लाइन के जरिये पानी पहुंचाया गया. पूर्व में 1000-1200 रु. पानी के टैंकरों पर खर्च करने वाले रहवासियों को जलकर के रूप में 180 रुपये प्रतिमाह देना होगा. पेयजल योजना का शुभारंभ विधायक रामेश्वर शर्मा व क्षेत्रीय पार्षद रविन्द्र यति ने किया. शर्मा ने कहा कि कोलार की जनता अब टैंकर और ट्ïयूबवेल की बजाय पाइप लाइन के जल पर आश्रित रहेगी. क्षेत्रीय पार्षद यति ने बताया कि नगर निगम ने पुख्ता इंतजाम किये हैं. हम कोलारवासियों को पानी की समस्या से दो-चार नहीं होने देंगे. केरवा पहाड़ी पर बने ट्रीटमेंट प्लांट से 110 कि.मी. लंबी पेयजल पाइप लाइन यहां बिछाई गई है. मोहताज था कोलार कोलारवासियों को लंबे समय से डेम का पानी न दिये जाने का विरोध था, जबकि यहीं से होकर पूरे शहर में पेयजल सप्लाई होती है. डेम के नजदीक होने के बाद भी कोलार डेम के पानी से मोहताज था. गर्मियों के दिनों में यहां भूमिगत जल का स्तर नीचे जाने के कारण यहां पानी की कमी हो जाती थी. कोलार पूर्व में नगर पालिका थी, जिस कारण नगर निगम पर भी यहां पानी के किल्लत की जिम्मेदारी नहीं थी. कोलार जब नगर निगम भोपाल में शामिल हो गया तो लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही वह पानी की समस्या से मुक्त होंगे. पानी संरक्षण करके रखना यहां मजबूरी थी, जिस कारण यहां डेंगू के मरीजों की तादात भी बढ़ गई थी, क्योंकि डेंगू का मच्छर साफ पानी में होता है. अब इस मुहिम के बाद कोलार की जनता में खुशी की लहर है. इस मुद्दे पर रहवासियों की राय कोलार में 12 वर्षो से रह रहे हैं. पानी के टैंकरों से ही पानी की आपूर्ति कर रहे हैं. टैंकरों में प्रतिमाह 1200 रु. खर्च होते थे. पिरन देवरे रहवासी महाबली नगर यहीं से होकर पाइप लाइन जाती है, जिससे पूरे शहर में पानी की सप्लाई होती है. पर कोलार के रहवासी उस पानी से कोसों दूर थे. मधुर चतुर्वेदी रहवासी सर्वधर्म कॉलोनी


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