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स्कूल की जगह लकडिय़ां बीन रहीं बच्चियां नवभारत न्यूज छतरपुर, मध्यप्रदेश शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि कोई भी बच्चा शाला अप्रवेशी न रहे, शत प्रतिशत बच्चे स्कूल जाएं लेकिन जिला मुख्यालय छतरपुर में ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की भांजियां स्कूल चलें अभियान की पोल खोल रहीं हैं। पढ़ाई की उम्र में छोटी-छोटी बच्चियां लकडिय़ां बीन रहीं हैं। यह घटना कोई दूर दराज अंचल की नहीं बल्कि जिला मुख्यालय के पन्ना रोड की है इन छोटे-छोटे बच्चों को खुलेआम लकडिय़ां बीनते हुए देखा गया। जब इन बच्चों से पूंछा गया तो इन बच्चों का कहना है कि हमने आज तक स्कूल देखा ही नहीं है। किसी तरह लकडिय़ां बीनकर हम अपने घर में भोजन पकाने के लिए लकडिय़ों की व्यवस्था करते हैं जब इन बच्चों से पूंछा गया कि क्या तुम्हारे माता-पिता ने कभी स्कूल भेजने की नहीं सोची, तब इन बच्चों ने बताया कि हमें आज तक किसी ने स्कूल नहीं भेजा है, और न ही हमारी पढ़ाई में किसी तरह की रुचि है। हम तो इसी तरह पूरे दिन लकडिय़ां बीनते हैं और यदा कदा भीख मांगकर पैसे जुटाते हैं। इन बच्चों के हालात देखकर स्कूल चलें अभियान की पूरी तरह से पोल खुल रही है।  "/> स्कूल की जगह लकडिय़ां बीन रहीं बच्चियां नवभारत न्यूज छतरपुर, मध्यप्रदेश शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि कोई भी बच्चा शाला अप्रवेशी न रहे, शत प्रतिशत बच्चे स्कूल जाएं लेकिन जिला मुख्यालय छतरपुर में ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की भांजियां स्कूल चलें अभियान की पोल खोल रहीं हैं। पढ़ाई की उम्र में छोटी-छोटी बच्चियां लकडिय़ां बीन रहीं हैं। यह घटना कोई दूर दराज अंचल की नहीं बल्कि जिला मुख्यालय के पन्ना रोड की है इन छोटे-छोटे बच्चों को खुलेआम लकडिय़ां बीनते हुए देखा गया। जब इन बच्चों से पूंछा गया तो इन बच्चों का कहना है कि हमने आज तक स्कूल देखा ही नहीं है। किसी तरह लकडिय़ां बीनकर हम अपने घर में भोजन पकाने के लिए लकडिय़ों की व्यवस्था करते हैं जब इन बच्चों से पूंछा गया कि क्या तुम्हारे माता-पिता ने कभी स्कूल भेजने की नहीं सोची, तब इन बच्चों ने बताया कि हमें आज तक किसी ने स्कूल नहीं भेजा है, और न ही हमारी पढ़ाई में किसी तरह की रुचि है। हम तो इसी तरह पूरे दिन लकडिय़ां बीनते हैं और यदा कदा भीख मांगकर पैसे जुटाते हैं। इन बच्चों के हालात देखकर स्कूल चलें अभियान की पूरी तरह से पोल खुल रही है।  "/> स्कूल की जगह लकडिय़ां बीन रहीं बच्चियां नवभारत न्यूज छतरपुर, मध्यप्रदेश शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि कोई भी बच्चा शाला अप्रवेशी न रहे, शत प्रतिशत बच्चे स्कूल जाएं लेकिन जिला मुख्यालय छतरपुर में ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की भांजियां स्कूल चलें अभियान की पोल खोल रहीं हैं। पढ़ाई की उम्र में छोटी-छोटी बच्चियां लकडिय़ां बीन रहीं हैं। यह घटना कोई दूर दराज अंचल की नहीं बल्कि जिला मुख्यालय के पन्ना रोड की है इन छोटे-छोटे बच्चों को खुलेआम लकडिय़ां बीनते हुए देखा गया। जब इन बच्चों से पूंछा गया तो इन बच्चों का कहना है कि हमने आज तक स्कूल देखा ही नहीं है। किसी तरह लकडिय़ां बीनकर हम अपने घर में भोजन पकाने के लिए लकडिय़ों की व्यवस्था करते हैं जब इन बच्चों से पूंछा गया कि क्या तुम्हारे माता-पिता ने कभी स्कूल भेजने की नहीं सोची, तब इन बच्चों ने बताया कि हमें आज तक किसी ने स्कूल नहीं भेजा है, और न ही हमारी पढ़ाई में किसी तरह की रुचि है। हम तो इसी तरह पूरे दिन लकडिय़ां बीनते हैं और यदा कदा भीख मांगकर पैसे जुटाते हैं। इन बच्चों के हालात देखकर स्कूल चलें अभियान की पूरी तरह से पोल खुल रही है।  ">

'स्कूल चलें हम' अभियान की खुली पोल

2017/12/26



स्कूल की जगह लकडिय़ां बीन रहीं बच्चियां नवभारत न्यूज छतरपुर, मध्यप्रदेश शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि कोई भी बच्चा शाला अप्रवेशी न रहे, शत प्रतिशत बच्चे स्कूल जाएं लेकिन जिला मुख्यालय छतरपुर में ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की भांजियां स्कूल चलें अभियान की पोल खोल रहीं हैं। पढ़ाई की उम्र में छोटी-छोटी बच्चियां लकडिय़ां बीन रहीं हैं। यह घटना कोई दूर दराज अंचल की नहीं बल्कि जिला मुख्यालय के पन्ना रोड की है इन छोटे-छोटे बच्चों को खुलेआम लकडिय़ां बीनते हुए देखा गया। जब इन बच्चों से पूंछा गया तो इन बच्चों का कहना है कि हमने आज तक स्कूल देखा ही नहीं है। किसी तरह लकडिय़ां बीनकर हम अपने घर में भोजन पकाने के लिए लकडिय़ों की व्यवस्था करते हैं जब इन बच्चों से पूंछा गया कि क्या तुम्हारे माता-पिता ने कभी स्कूल भेजने की नहीं सोची, तब इन बच्चों ने बताया कि हमें आज तक किसी ने स्कूल नहीं भेजा है, और न ही हमारी पढ़ाई में किसी तरह की रुचि है। हम तो इसी तरह पूरे दिन लकडिय़ां बीनते हैं और यदा कदा भीख मांगकर पैसे जुटाते हैं। इन बच्चों के हालात देखकर स्कूल चलें अभियान की पूरी तरह से पोल खुल रही है।  


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