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नवभारत न्यूज इंदौर, पूर्व मेयर और कांग्रेस के कद्दावर नेता सुरेश सेठ का शुक्रवार शाम तिलक नगर मुक्तिधाम पर अंतिम संस्कार किया गया। उनके बेटे विवेक सेठ ने मुखाग्नि दी। उनके निवास से शाम 4 बजे अंतिम यात्रा निकली, जिसमें शहर के कांगेस-बीजेपी के कई नेता शामिल हुए। जिस भी रास्ते से यात्रा गुजरी लोगों ने फूल बरसाकर उन्हें विदाई दी। इससे पहले पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए उनके समाचार पत्र कार्यालय में रखा गया था। शुक्रवार सुबह महापौर मालिनी गौड़ भी अंतिम दर्शन को पहुंची थीं। उल्लेखनीय है कि करीब एक महीने से बीमार चल रहे सेठ का गुरुवार शाम को निधन हो गया था। वे 87 साल के थे. सेठ की गिनती कांग्रेस के दबंग नेताओं में होती थी। इंदौर को लालटेन से छुटकारा दिलाकर सडक़ों पर स्ट्रीट लाइट सेठ की ही देन है। उनकी दबंग और ईमानदार छवि के कारण उन्हें शेर के नाम से पुकारते थे. -आमतौर पर नेता पार्टी लाइन से बंधे रहते हैं, लेकिन सेठ देश और प्रदेश के मुद्दों पर पार्टी लाइन की जगह जनहित को तरजीह देते थे. सेठ इंदौर के महापौर रहने के साथ ही प्रदेश में रही कांग्रेस सरकार में मंत्री भी रहे। जब वे इंदौर के मेयर चुने गए तब इंदौर की सडक़ों को रात में रोशन करने के लिए लालटेन लगाई जाती थीं।"/> नवभारत न्यूज इंदौर, पूर्व मेयर और कांग्रेस के कद्दावर नेता सुरेश सेठ का शुक्रवार शाम तिलक नगर मुक्तिधाम पर अंतिम संस्कार किया गया। उनके बेटे विवेक सेठ ने मुखाग्नि दी। उनके निवास से शाम 4 बजे अंतिम यात्रा निकली, जिसमें शहर के कांगेस-बीजेपी के कई नेता शामिल हुए। जिस भी रास्ते से यात्रा गुजरी लोगों ने फूल बरसाकर उन्हें विदाई दी। इससे पहले पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए उनके समाचार पत्र कार्यालय में रखा गया था। शुक्रवार सुबह महापौर मालिनी गौड़ भी अंतिम दर्शन को पहुंची थीं। उल्लेखनीय है कि करीब एक महीने से बीमार चल रहे सेठ का गुरुवार शाम को निधन हो गया था। वे 87 साल के थे. सेठ की गिनती कांग्रेस के दबंग नेताओं में होती थी। इंदौर को लालटेन से छुटकारा दिलाकर सडक़ों पर स्ट्रीट लाइट सेठ की ही देन है। उनकी दबंग और ईमानदार छवि के कारण उन्हें शेर के नाम से पुकारते थे. -आमतौर पर नेता पार्टी लाइन से बंधे रहते हैं, लेकिन सेठ देश और प्रदेश के मुद्दों पर पार्टी लाइन की जगह जनहित को तरजीह देते थे. सेठ इंदौर के महापौर रहने के साथ ही प्रदेश में रही कांग्रेस सरकार में मंत्री भी रहे। जब वे इंदौर के मेयर चुने गए तब इंदौर की सडक़ों को रात में रोशन करने के लिए लालटेन लगाई जाती थीं।"/> नवभारत न्यूज इंदौर, पूर्व मेयर और कांग्रेस के कद्दावर नेता सुरेश सेठ का शुक्रवार शाम तिलक नगर मुक्तिधाम पर अंतिम संस्कार किया गया। उनके बेटे विवेक सेठ ने मुखाग्नि दी। उनके निवास से शाम 4 बजे अंतिम यात्रा निकली, जिसमें शहर के कांगेस-बीजेपी के कई नेता शामिल हुए। जिस भी रास्ते से यात्रा गुजरी लोगों ने फूल बरसाकर उन्हें विदाई दी। इससे पहले पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए उनके समाचार पत्र कार्यालय में रखा गया था। शुक्रवार सुबह महापौर मालिनी गौड़ भी अंतिम दर्शन को पहुंची थीं। उल्लेखनीय है कि करीब एक महीने से बीमार चल रहे सेठ का गुरुवार शाम को निधन हो गया था। वे 87 साल के थे. सेठ की गिनती कांग्रेस के दबंग नेताओं में होती थी। इंदौर को लालटेन से छुटकारा दिलाकर सडक़ों पर स्ट्रीट लाइट सेठ की ही देन है। उनकी दबंग और ईमानदार छवि के कारण उन्हें शेर के नाम से पुकारते थे. -आमतौर पर नेता पार्टी लाइन से बंधे रहते हैं, लेकिन सेठ देश और प्रदेश के मुद्दों पर पार्टी लाइन की जगह जनहित को तरजीह देते थे. सेठ इंदौर के महापौर रहने के साथ ही प्रदेश में रही कांग्रेस सरकार में मंत्री भी रहे। जब वे इंदौर के मेयर चुने गए तब इंदौर की सडक़ों को रात में रोशन करने के लिए लालटेन लगाई जाती थीं।">

हजारों लोगों ने दी सेठ को अंतिम विदाई

2018/02/24



नवभारत न्यूज इंदौर, पूर्व मेयर और कांग्रेस के कद्दावर नेता सुरेश सेठ का शुक्रवार शाम तिलक नगर मुक्तिधाम पर अंतिम संस्कार किया गया। उनके बेटे विवेक सेठ ने मुखाग्नि दी। उनके निवास से शाम 4 बजे अंतिम यात्रा निकली, जिसमें शहर के कांगेस-बीजेपी के कई नेता शामिल हुए। जिस भी रास्ते से यात्रा गुजरी लोगों ने फूल बरसाकर उन्हें विदाई दी। इससे पहले पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए उनके समाचार पत्र कार्यालय में रखा गया था। शुक्रवार सुबह महापौर मालिनी गौड़ भी अंतिम दर्शन को पहुंची थीं। उल्लेखनीय है कि करीब एक महीने से बीमार चल रहे सेठ का गुरुवार शाम को निधन हो गया था। वे 87 साल के थे. सेठ की गिनती कांग्रेस के दबंग नेताओं में होती थी। इंदौर को लालटेन से छुटकारा दिलाकर सडक़ों पर स्ट्रीट लाइट सेठ की ही देन है। उनकी दबंग और ईमानदार छवि के कारण उन्हें शेर के नाम से पुकारते थे. -आमतौर पर नेता पार्टी लाइन से बंधे रहते हैं, लेकिन सेठ देश और प्रदेश के मुद्दों पर पार्टी लाइन की जगह जनहित को तरजीह देते थे. सेठ इंदौर के महापौर रहने के साथ ही प्रदेश में रही कांग्रेस सरकार में मंत्री भी रहे। जब वे इंदौर के मेयर चुने गए तब इंदौर की सडक़ों को रात में रोशन करने के लिए लालटेन लगाई जाती थीं।


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