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दुबई, सीरिया में पिछले कई दिनों से जारी संघर्ष को रोकने के मकसद से कल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बेनतीजा रही। इस बैठक में सीरिया में चल रहे संघर्ष को रोकने के लिए 30 दिनों के संघर्षविराम संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा की गई लेकिन रूस के अड़ंगे के बाद यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। रूस ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सीरिया में मानवतावादी सघर्षविराम के लिए राजी नहीं हुआ। बीबीसी न्यूज के मुताबिक संघर्षविराम के संबंध में स्वीडन और कुवैत की तरफ से एक प्रस्ताव पेश किया गया था, लेकिन रूस इस प्रस्ताव में संशोधन चाहता था। उसका कहना था कि मौजूदा प्रस्ताव से रूस के समर्थन वाली सीरियाई सरकार पर ही दबाव बढ़ेगा। संयुक्त राष्ट्र में रूस के प्रतिनिधि वेस्ली नेबेनज़्या ने कहा कि रूस इस बात की गांरटी चाहता था कि पेश किया गया प्रस्ताव वास्तविक तौर पर कारगर साबित होगा। श्री वेस्ली ने कहा, “संघर्ष विराम की असली चुनौती उस पर अमल करना होता है, हमें सिर्फ फैसले लेने के लिए संघर्ष विराम का निर्णय नहीं लेना चाहिए, बल्कि यह देखना चाहिए कि यह हकीकत में कितना कारगर साबित होगा, हम हमेशा से यही चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र के फैसले यथार्थवादी हों ना कि लोकलुभावन।” पश्चिमी देशों के प्रतिनिधियों ने रूस के इस रवैये को सीरियाई सरकार का समर्थन करने वाला कदम बताया है जिससे सीरिया में सघर्ष विराम की कोशिशों में देरी की जा सके। इस बीच सीरियाई सरकार की ओर से विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाके पूर्वी गूता में पिछले पांच दिनों से लगातार बमबारी की जा रही है। इस बमबारी की वजह से अभी तक 400 से अधिक लोग अपनी जान गवां चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार लगभग 3 लाख 93 हजार लोग यहां फंसे हुए हैं।"/> दुबई, सीरिया में पिछले कई दिनों से जारी संघर्ष को रोकने के मकसद से कल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बेनतीजा रही। इस बैठक में सीरिया में चल रहे संघर्ष को रोकने के लिए 30 दिनों के संघर्षविराम संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा की गई लेकिन रूस के अड़ंगे के बाद यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। रूस ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सीरिया में मानवतावादी सघर्षविराम के लिए राजी नहीं हुआ। बीबीसी न्यूज के मुताबिक संघर्षविराम के संबंध में स्वीडन और कुवैत की तरफ से एक प्रस्ताव पेश किया गया था, लेकिन रूस इस प्रस्ताव में संशोधन चाहता था। उसका कहना था कि मौजूदा प्रस्ताव से रूस के समर्थन वाली सीरियाई सरकार पर ही दबाव बढ़ेगा। संयुक्त राष्ट्र में रूस के प्रतिनिधि वेस्ली नेबेनज़्या ने कहा कि रूस इस बात की गांरटी चाहता था कि पेश किया गया प्रस्ताव वास्तविक तौर पर कारगर साबित होगा। श्री वेस्ली ने कहा, “संघर्ष विराम की असली चुनौती उस पर अमल करना होता है, हमें सिर्फ फैसले लेने के लिए संघर्ष विराम का निर्णय नहीं लेना चाहिए, बल्कि यह देखना चाहिए कि यह हकीकत में कितना कारगर साबित होगा, हम हमेशा से यही चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र के फैसले यथार्थवादी हों ना कि लोकलुभावन।” पश्चिमी देशों के प्रतिनिधियों ने रूस के इस रवैये को सीरियाई सरकार का समर्थन करने वाला कदम बताया है जिससे सीरिया में सघर्ष विराम की कोशिशों में देरी की जा सके। इस बीच सीरियाई सरकार की ओर से विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाके पूर्वी गूता में पिछले पांच दिनों से लगातार बमबारी की जा रही है। इस बमबारी की वजह से अभी तक 400 से अधिक लोग अपनी जान गवां चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार लगभग 3 लाख 93 हजार लोग यहां फंसे हुए हैं।"/> दुबई, सीरिया में पिछले कई दिनों से जारी संघर्ष को रोकने के मकसद से कल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बेनतीजा रही। इस बैठक में सीरिया में चल रहे संघर्ष को रोकने के लिए 30 दिनों के संघर्षविराम संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा की गई लेकिन रूस के अड़ंगे के बाद यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। रूस ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सीरिया में मानवतावादी सघर्षविराम के लिए राजी नहीं हुआ। बीबीसी न्यूज के मुताबिक संघर्षविराम के संबंध में स्वीडन और कुवैत की तरफ से एक प्रस्ताव पेश किया गया था, लेकिन रूस इस प्रस्ताव में संशोधन चाहता था। उसका कहना था कि मौजूदा प्रस्ताव से रूस के समर्थन वाली सीरियाई सरकार पर ही दबाव बढ़ेगा। संयुक्त राष्ट्र में रूस के प्रतिनिधि वेस्ली नेबेनज़्या ने कहा कि रूस इस बात की गांरटी चाहता था कि पेश किया गया प्रस्ताव वास्तविक तौर पर कारगर साबित होगा। श्री वेस्ली ने कहा, “संघर्ष विराम की असली चुनौती उस पर अमल करना होता है, हमें सिर्फ फैसले लेने के लिए संघर्ष विराम का निर्णय नहीं लेना चाहिए, बल्कि यह देखना चाहिए कि यह हकीकत में कितना कारगर साबित होगा, हम हमेशा से यही चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र के फैसले यथार्थवादी हों ना कि लोकलुभावन।” पश्चिमी देशों के प्रतिनिधियों ने रूस के इस रवैये को सीरियाई सरकार का समर्थन करने वाला कदम बताया है जिससे सीरिया में सघर्ष विराम की कोशिशों में देरी की जा सके। इस बीच सीरियाई सरकार की ओर से विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाके पूर्वी गूता में पिछले पांच दिनों से लगातार बमबारी की जा रही है। इस बमबारी की वजह से अभी तक 400 से अधिक लोग अपनी जान गवां चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार लगभग 3 लाख 93 हजार लोग यहां फंसे हुए हैं।">

सीरिया में संघर्ष के बीच विराम का प्रयास विफल

2018/02/23



दुबई, सीरिया में पिछले कई दिनों से जारी संघर्ष को रोकने के मकसद से कल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बेनतीजा रही। इस बैठक में सीरिया में चल रहे संघर्ष को रोकने के लिए 30 दिनों के संघर्षविराम संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा की गई लेकिन रूस के अड़ंगे के बाद यह प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। रूस ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सीरिया में मानवतावादी सघर्षविराम के लिए राजी नहीं हुआ। बीबीसी न्यूज के मुताबिक संघर्षविराम के संबंध में स्वीडन और कुवैत की तरफ से एक प्रस्ताव पेश किया गया था, लेकिन रूस इस प्रस्ताव में संशोधन चाहता था। उसका कहना था कि मौजूदा प्रस्ताव से रूस के समर्थन वाली सीरियाई सरकार पर ही दबाव बढ़ेगा। संयुक्त राष्ट्र में रूस के प्रतिनिधि वेस्ली नेबेनज़्या ने कहा कि रूस इस बात की गांरटी चाहता था कि पेश किया गया प्रस्ताव वास्तविक तौर पर कारगर साबित होगा। श्री वेस्ली ने कहा, “संघर्ष विराम की असली चुनौती उस पर अमल करना होता है, हमें सिर्फ फैसले लेने के लिए संघर्ष विराम का निर्णय नहीं लेना चाहिए, बल्कि यह देखना चाहिए कि यह हकीकत में कितना कारगर साबित होगा, हम हमेशा से यही चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र के फैसले यथार्थवादी हों ना कि लोकलुभावन।” पश्चिमी देशों के प्रतिनिधियों ने रूस के इस रवैये को सीरियाई सरकार का समर्थन करने वाला कदम बताया है जिससे सीरिया में सघर्ष विराम की कोशिशों में देरी की जा सके। इस बीच सीरियाई सरकार की ओर से विद्रोहियों के कब्जे वाले इलाके पूर्वी गूता में पिछले पांच दिनों से लगातार बमबारी की जा रही है। इस बमबारी की वजह से अभी तक 400 से अधिक लोग अपनी जान गवां चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार लगभग 3 लाख 93 हजार लोग यहां फंसे हुए हैं।


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