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ढाका, बंगलादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने समाज में मानवीय मूल्यों और तार्किकता को बढावा देने के लिए साहित्य की भूमिका पर जोर देते हुए कहा है कि साहित्य में बुरी ताकतों को परास्त करने की क्षमता है। सुश्री हसीना ने आज यहां तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय बंगाली साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद कहा“ पूरा विश्व इस समय अशांति में जी रहा है जहां आतंक और अराजकता संबंधी स्थिति अच्छी चीजों पर हावी हो जाती हैं और एेसे में हमें इन ताकताें काे हराने के लिए ज्ञान का सहारा लेना होगा। इसके लिए साहित्यिक ज्ञान की तलाश करनी होगी। साहित्य से संबंधित विधाएं मानव जगत मेें अच्छी क्षमताओं तथा द्वष्टिकोण को विकसित करती है और जो समाज साहित्य के क्षेत्र में धनी है वह सबसे अधिक सभ्य है।” उन्होंने कहा कि विश्व में जिन लोगों को बंगाली संस्कृति और साहित्य विरासत में मिला है उन्हें हमेशा बंगला से जुडे होने के अपने अहसास काे हमेशा याद रखना चाहिए और अपनी पहचान काे नहीें भूलना चाहिए। इस माैके पर उन्हाेंने बंगाली भाषी लेखकों- ईश्वर चन्द्र विद्यासागर, माइकल मधुसूदन दत्त,बंकिम चन्द्र चटर्जी, रवीन्द्रनाथ टैगोर,नजरूल जिबानंदा, जासिम उदीन और अन्य को श्रद्वांजलि दी। इस साहित्य सम्मेलन में भारत ,जापान और जर्मनी हिस्सा ले रहे हैं।"/> ढाका, बंगलादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने समाज में मानवीय मूल्यों और तार्किकता को बढावा देने के लिए साहित्य की भूमिका पर जोर देते हुए कहा है कि साहित्य में बुरी ताकतों को परास्त करने की क्षमता है। सुश्री हसीना ने आज यहां तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय बंगाली साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद कहा“ पूरा विश्व इस समय अशांति में जी रहा है जहां आतंक और अराजकता संबंधी स्थिति अच्छी चीजों पर हावी हो जाती हैं और एेसे में हमें इन ताकताें काे हराने के लिए ज्ञान का सहारा लेना होगा। इसके लिए साहित्यिक ज्ञान की तलाश करनी होगी। साहित्य से संबंधित विधाएं मानव जगत मेें अच्छी क्षमताओं तथा द्वष्टिकोण को विकसित करती है और जो समाज साहित्य के क्षेत्र में धनी है वह सबसे अधिक सभ्य है।” उन्होंने कहा कि विश्व में जिन लोगों को बंगाली संस्कृति और साहित्य विरासत में मिला है उन्हें हमेशा बंगला से जुडे होने के अपने अहसास काे हमेशा याद रखना चाहिए और अपनी पहचान काे नहीें भूलना चाहिए। इस माैके पर उन्हाेंने बंगाली भाषी लेखकों- ईश्वर चन्द्र विद्यासागर, माइकल मधुसूदन दत्त,बंकिम चन्द्र चटर्जी, रवीन्द्रनाथ टैगोर,नजरूल जिबानंदा, जासिम उदीन और अन्य को श्रद्वांजलि दी। इस साहित्य सम्मेलन में भारत ,जापान और जर्मनी हिस्सा ले रहे हैं।"/> ढाका, बंगलादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने समाज में मानवीय मूल्यों और तार्किकता को बढावा देने के लिए साहित्य की भूमिका पर जोर देते हुए कहा है कि साहित्य में बुरी ताकतों को परास्त करने की क्षमता है। सुश्री हसीना ने आज यहां तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय बंगाली साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद कहा“ पूरा विश्व इस समय अशांति में जी रहा है जहां आतंक और अराजकता संबंधी स्थिति अच्छी चीजों पर हावी हो जाती हैं और एेसे में हमें इन ताकताें काे हराने के लिए ज्ञान का सहारा लेना होगा। इसके लिए साहित्यिक ज्ञान की तलाश करनी होगी। साहित्य से संबंधित विधाएं मानव जगत मेें अच्छी क्षमताओं तथा द्वष्टिकोण को विकसित करती है और जो समाज साहित्य के क्षेत्र में धनी है वह सबसे अधिक सभ्य है।” उन्होंने कहा कि विश्व में जिन लोगों को बंगाली संस्कृति और साहित्य विरासत में मिला है उन्हें हमेशा बंगला से जुडे होने के अपने अहसास काे हमेशा याद रखना चाहिए और अपनी पहचान काे नहीें भूलना चाहिए। इस माैके पर उन्हाेंने बंगाली भाषी लेखकों- ईश्वर चन्द्र विद्यासागर, माइकल मधुसूदन दत्त,बंकिम चन्द्र चटर्जी, रवीन्द्रनाथ टैगोर,नजरूल जिबानंदा, जासिम उदीन और अन्य को श्रद्वांजलि दी। इस साहित्य सम्मेलन में भारत ,जापान और जर्मनी हिस्सा ले रहे हैं।">

साहित्य बुरी ताकतों को परास्त करने में सक्षम: हसीना

2018/01/15



ढाका, बंगलादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने समाज में मानवीय मूल्यों और तार्किकता को बढावा देने के लिए साहित्य की भूमिका पर जोर देते हुए कहा है कि साहित्य में बुरी ताकतों को परास्त करने की क्षमता है। सुश्री हसीना ने आज यहां तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय बंगाली साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन करने के बाद कहा“ पूरा विश्व इस समय अशांति में जी रहा है जहां आतंक और अराजकता संबंधी स्थिति अच्छी चीजों पर हावी हो जाती हैं और एेसे में हमें इन ताकताें काे हराने के लिए ज्ञान का सहारा लेना होगा। इसके लिए साहित्यिक ज्ञान की तलाश करनी होगी। साहित्य से संबंधित विधाएं मानव जगत मेें अच्छी क्षमताओं तथा द्वष्टिकोण को विकसित करती है और जो समाज साहित्य के क्षेत्र में धनी है वह सबसे अधिक सभ्य है।” उन्होंने कहा कि विश्व में जिन लोगों को बंगाली संस्कृति और साहित्य विरासत में मिला है उन्हें हमेशा बंगला से जुडे होने के अपने अहसास काे हमेशा याद रखना चाहिए और अपनी पहचान काे नहीें भूलना चाहिए। इस माैके पर उन्हाेंने बंगाली भाषी लेखकों- ईश्वर चन्द्र विद्यासागर, माइकल मधुसूदन दत्त,बंकिम चन्द्र चटर्जी, रवीन्द्रनाथ टैगोर,नजरूल जिबानंदा, जासिम उदीन और अन्य को श्रद्वांजलि दी। इस साहित्य सम्मेलन में भारत ,जापान और जर्मनी हिस्सा ले रहे हैं।


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