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साईं भक्ति के साथ 'रक्तदान' भोपाल, साईं अमृत कथा के प्रथम दिन सुमीत पोण्दा "भाईजी" ने कहा कि साईं की भक्ति के साथ दूसरों के काम आना भी एक प्रकार की भक्ति है. सार्ईं हमेशा अपने भक्तों को दूसरों की सेवा करने के लिए प्रेरित करते थे तथा स्वयं रोगियों की सेवा कर उदाहरण पेश किया. इसी के मद्दे नजर "भाईजी" जी ने कथा प्रारंभ करने के पूर्व रक्तदान किया. उन्होंने लोगों को यह संदेश दिया कि रक्तदान से कमजोरी नहीं आती. इस वर्ष साईं अमृत कथा समिति ने यह निर्णय लिया कि सिर्फ साईं की कथा सुनने के लिए नहीं बल्कि उसको चरित्रार्थ करने के लिए है. इसलिए पांचो दिन कथा के साथ-साथ समाज सेवा का कार्य भी किया जाना चाहिए. इसी क्रम में दूसरे दिन यानि कि कल कथा के साथ-साथ किन्नर समाज के प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर समाज की मुख्य धारा में जोडऩे का प्रयास किया जाएगा. "भाईजी" ने शिर्डी के महत्व के बारे में बताया कि किस तरह शिलधी का नाम शिर्डी पड़ा. "भाईजी" ने कहा कि लोग शिर्डी जाकर बाबा से कुछ मांगते हैं शिर्डी जाकर उनको चाहिए कि वो बाबा को मांगे क्योकि बाबा साथ हैं तो सब कुछ साथ है और शिर्डी जाकर इधर-उधर ध्यान न देकर पूरा ध्यान बाबा पर केंद्रित करना चाहिए."/> साईं भक्ति के साथ 'रक्तदान' भोपाल, साईं अमृत कथा के प्रथम दिन सुमीत पोण्दा "भाईजी" ने कहा कि साईं की भक्ति के साथ दूसरों के काम आना भी एक प्रकार की भक्ति है. सार्ईं हमेशा अपने भक्तों को दूसरों की सेवा करने के लिए प्रेरित करते थे तथा स्वयं रोगियों की सेवा कर उदाहरण पेश किया. इसी के मद्दे नजर "भाईजी" जी ने कथा प्रारंभ करने के पूर्व रक्तदान किया. उन्होंने लोगों को यह संदेश दिया कि रक्तदान से कमजोरी नहीं आती. इस वर्ष साईं अमृत कथा समिति ने यह निर्णय लिया कि सिर्फ साईं की कथा सुनने के लिए नहीं बल्कि उसको चरित्रार्थ करने के लिए है. इसलिए पांचो दिन कथा के साथ-साथ समाज सेवा का कार्य भी किया जाना चाहिए. इसी क्रम में दूसरे दिन यानि कि कल कथा के साथ-साथ किन्नर समाज के प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर समाज की मुख्य धारा में जोडऩे का प्रयास किया जाएगा. "भाईजी" ने शिर्डी के महत्व के बारे में बताया कि किस तरह शिलधी का नाम शिर्डी पड़ा. "भाईजी" ने कहा कि लोग शिर्डी जाकर बाबा से कुछ मांगते हैं शिर्डी जाकर उनको चाहिए कि वो बाबा को मांगे क्योकि बाबा साथ हैं तो सब कुछ साथ है और शिर्डी जाकर इधर-उधर ध्यान न देकर पूरा ध्यान बाबा पर केंद्रित करना चाहिए."/> साईं भक्ति के साथ 'रक्तदान' भोपाल, साईं अमृत कथा के प्रथम दिन सुमीत पोण्दा "भाईजी" ने कहा कि साईं की भक्ति के साथ दूसरों के काम आना भी एक प्रकार की भक्ति है. सार्ईं हमेशा अपने भक्तों को दूसरों की सेवा करने के लिए प्रेरित करते थे तथा स्वयं रोगियों की सेवा कर उदाहरण पेश किया. इसी के मद्दे नजर "भाईजी" जी ने कथा प्रारंभ करने के पूर्व रक्तदान किया. उन्होंने लोगों को यह संदेश दिया कि रक्तदान से कमजोरी नहीं आती. इस वर्ष साईं अमृत कथा समिति ने यह निर्णय लिया कि सिर्फ साईं की कथा सुनने के लिए नहीं बल्कि उसको चरित्रार्थ करने के लिए है. इसलिए पांचो दिन कथा के साथ-साथ समाज सेवा का कार्य भी किया जाना चाहिए. इसी क्रम में दूसरे दिन यानि कि कल कथा के साथ-साथ किन्नर समाज के प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर समाज की मुख्य धारा में जोडऩे का प्रयास किया जाएगा. "भाईजी" ने शिर्डी के महत्व के बारे में बताया कि किस तरह शिलधी का नाम शिर्डी पड़ा. "भाईजी" ने कहा कि लोग शिर्डी जाकर बाबा से कुछ मांगते हैं शिर्डी जाकर उनको चाहिए कि वो बाबा को मांगे क्योकि बाबा साथ हैं तो सब कुछ साथ है और शिर्डी जाकर इधर-उधर ध्यान न देकर पूरा ध्यान बाबा पर केंद्रित करना चाहिए.">

साईं भक्ति के साथ 'रक्तदान'

2018/01/12



साईं भक्ति के साथ 'रक्तदान'

भोपाल, साईं अमृत कथा के प्रथम दिन सुमीत पोण्दा "भाईजी" ने कहा कि साईं की भक्ति के साथ दूसरों के काम आना भी एक प्रकार की भक्ति है. सार्ईं हमेशा अपने भक्तों को दूसरों की सेवा करने के लिए प्रेरित करते थे तथा स्वयं रोगियों की सेवा कर उदाहरण पेश किया. इसी के मद्दे नजर "भाईजी" जी ने कथा प्रारंभ करने के पूर्व रक्तदान किया. उन्होंने लोगों को यह संदेश दिया कि रक्तदान से कमजोरी नहीं आती. इस वर्ष साईं अमृत कथा समिति ने यह निर्णय लिया कि सिर्फ साईं की कथा सुनने के लिए नहीं बल्कि उसको चरित्रार्थ करने के लिए है. इसलिए पांचो दिन कथा के साथ-साथ समाज सेवा का कार्य भी किया जाना चाहिए. इसी क्रम में दूसरे दिन यानि कि कल कथा के साथ-साथ किन्नर समाज के प्रतिनिधियों को आमंत्रित कर समाज की मुख्य धारा में जोडऩे का प्रयास किया जाएगा. "भाईजी" ने शिर्डी के महत्व के बारे में बताया कि किस तरह शिलधी का नाम शिर्डी पड़ा. "भाईजी" ने कहा कि लोग शिर्डी जाकर बाबा से कुछ मांगते हैं शिर्डी जाकर उनको चाहिए कि वो बाबा को मांगे क्योकि बाबा साथ हैं तो सब कुछ साथ है और शिर्डी जाकर इधर-उधर ध्यान न देकर पूरा ध्यान बाबा पर केंद्रित करना चाहिए.


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