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संसार से विरक्त रहना ही कर्म योग

2017/10/30



श्रीमद् भागवत ज्ञानयज्ञ सप्ताह का दूसरा दिन भोपाल, संसार में रहते हुए भी संसार से विरक्त रहना ही कर्म योग है. उक्त उद्गार आज पूज्य डॉक्टर संजय कृष्ण सलिल के मुखारविंद से व्यक्त हुए. श्रीमद् भागवत ज्ञानयज्ञ सप्ताह के आज दूसरे दिन श्रीमद् भागवत कथा में कपिल भगवान के चरित्र, कपिल गीता एवं ध्रुव चरित्र का वर्णन हुआ जिसे हजारों श्रद्धालुओं द्वारा भाव विभोर होकर कथा के रस का आनंद लिया गया. जैसी जिसकी संगति वैसा उसको फल जैसी जिसकी संगति होती है वैसा ही फल मिलता है संगति एवं संयोग का लाभ उठा कर जीवन में आगे बढ़ा जा सकता है सत्संग का महत्व उक्त उद्गार पूज्य डॉक्टर संजय कृष्ण सलिल द्वारा अवधपुरी रीगल सिविक सेंटर स्थित श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिन बताया गया. इसके पूर्व आज सुबह भव्य कलश यात्रा द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया. जिसमें मुख्य यजमान के एल शर्मा एवं रुकमणी शर्मा द्वारा सर पर श्रीमद् भगवत गीता धारणकर कार्यक्रम स्थल पर स्थापित की गई. आज के मुख्य अतिथि के रूप में कांग्रेस के नेता कैलाश मिश्रा ने सपरिवार सम्मिलित होकर श्रीमद् भागवत कथा का रसपान किया.


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