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सामाजिक समरसता व संगठन में बदलाव पर जोर

संघ की अगुवाई में चलेगा समरसता अभियान प्रकाश पांडेय भोपाल, संघ के तीन दिवसीय कार्यक्रम में स्पष्टï तो कुछ नहीं रहा, लेकिन संकेतों में भाजपा को विजय का मंत्र मिल गया. सीधा संकेत समरसता व संगठन में बदलाव का रहा. दोनों ऐसे मामले हैं जो चुनाव में सीधा असर डाल सकते हैं. संघ प्रमुख ने सर्वाधिक जोर सामाजिक समरसता पर दिया. इसकी वजह यह है कि इस बार कांग्रेस जिग्नेश मेवानी व हार्दिक पटेल को मध्यप्रदेश में आजमाने जा रही है. एक नेता दलित राजनीति को बढ़ावा दे रहा है तो दूसरा गुजरात के पाटीदार आंदोलन का जनक है. दोनों ने मिलकर गुजरात में भी ऐसा कुछ कर दिया कि प्रधानमंत्री को भी चुनाव में पसीना बहाना पड़ा. उसके बाद भी भाजपा सौ सीट के अंदर सिमट गई. संभवत: इसीलिये संघ प्रमुख ने सबसे अधिक जोर सामाजिक समरसता पर दिया ताकि कांग्रेस जातिवादी कार्ड न खेल सके. इसकी जिम्मेदारी भी संघ खुद उठा रहा है, जिसमें स्वयं सेवक ग्रामीण क्षेत्रों में दलित वर्ग के बीच अभी से अपना कार्य प्रारंभ कर देंगे. संघ के मध्य प्रांत संघ संचालक अशोक सोहनी की निगरानी में यह अभियान चलेगा एवं भाजपा सहयोगी रहेगी. संघ व भाजपा संगठन दोनों को मालूम है कि प्रदेश की सत्ता इस बार कांग्रेस की मेहरबानी से नहीं मिलेगी, क्योंकि 15 साल की सत्ता विरोधी लहर पर भाजपा सवार है. दूसरी तरफ यह अफवाह भी जोर पकड़ रही है कि प्रदेश भाजपाध्यक्ष नंदकुमार ङ्क्षसह को पद छोडऩा होगा. इस पद के लिये कैलाश विजयवर्गीय का नाम उभर रहा है, जो शायद मुख्यमंत्री को मंजूर नहीं होगा. इसके बावजूद यह तय है कि विजय के लिये समरसता व बदलाव का मंंत्र प्रदेश भाजपा को स्वीकार करना होगा."/>

सामाजिक समरसता व संगठन में बदलाव पर जोर

संघ की अगुवाई में चलेगा समरसता अभियान प्रकाश पांडेय भोपाल, संघ के तीन दिवसीय कार्यक्रम में स्पष्टï तो कुछ नहीं रहा, लेकिन संकेतों में भाजपा को विजय का मंत्र मिल गया. सीधा संकेत समरसता व संगठन में बदलाव का रहा. दोनों ऐसे मामले हैं जो चुनाव में सीधा असर डाल सकते हैं. संघ प्रमुख ने सर्वाधिक जोर सामाजिक समरसता पर दिया. इसकी वजह यह है कि इस बार कांग्रेस जिग्नेश मेवानी व हार्दिक पटेल को मध्यप्रदेश में आजमाने जा रही है. एक नेता दलित राजनीति को बढ़ावा दे रहा है तो दूसरा गुजरात के पाटीदार आंदोलन का जनक है. दोनों ने मिलकर गुजरात में भी ऐसा कुछ कर दिया कि प्रधानमंत्री को भी चुनाव में पसीना बहाना पड़ा. उसके बाद भी भाजपा सौ सीट के अंदर सिमट गई. संभवत: इसीलिये संघ प्रमुख ने सबसे अधिक जोर सामाजिक समरसता पर दिया ताकि कांग्रेस जातिवादी कार्ड न खेल सके. इसकी जिम्मेदारी भी संघ खुद उठा रहा है, जिसमें स्वयं सेवक ग्रामीण क्षेत्रों में दलित वर्ग के बीच अभी से अपना कार्य प्रारंभ कर देंगे. संघ के मध्य प्रांत संघ संचालक अशोक सोहनी की निगरानी में यह अभियान चलेगा एवं भाजपा सहयोगी रहेगी. संघ व भाजपा संगठन दोनों को मालूम है कि प्रदेश की सत्ता इस बार कांग्रेस की मेहरबानी से नहीं मिलेगी, क्योंकि 15 साल की सत्ता विरोधी लहर पर भाजपा सवार है. दूसरी तरफ यह अफवाह भी जोर पकड़ रही है कि प्रदेश भाजपाध्यक्ष नंदकुमार ङ्क्षसह को पद छोडऩा होगा. इस पद के लिये कैलाश विजयवर्गीय का नाम उभर रहा है, जो शायद मुख्यमंत्री को मंजूर नहीं होगा. इसके बावजूद यह तय है कि विजय के लिये समरसता व बदलाव का मंंत्र प्रदेश भाजपा को स्वीकार करना होगा."/>

सामाजिक समरसता व संगठन में बदलाव पर जोर

संघ की अगुवाई में चलेगा समरसता अभियान प्रकाश पांडेय भोपाल, संघ के तीन दिवसीय कार्यक्रम में स्पष्टï तो कुछ नहीं रहा, लेकिन संकेतों में भाजपा को विजय का मंत्र मिल गया. सीधा संकेत समरसता व संगठन में बदलाव का रहा. दोनों ऐसे मामले हैं जो चुनाव में सीधा असर डाल सकते हैं. संघ प्रमुख ने सर्वाधिक जोर सामाजिक समरसता पर दिया. इसकी वजह यह है कि इस बार कांग्रेस जिग्नेश मेवानी व हार्दिक पटेल को मध्यप्रदेश में आजमाने जा रही है. एक नेता दलित राजनीति को बढ़ावा दे रहा है तो दूसरा गुजरात के पाटीदार आंदोलन का जनक है. दोनों ने मिलकर गुजरात में भी ऐसा कुछ कर दिया कि प्रधानमंत्री को भी चुनाव में पसीना बहाना पड़ा. उसके बाद भी भाजपा सौ सीट के अंदर सिमट गई. संभवत: इसीलिये संघ प्रमुख ने सबसे अधिक जोर सामाजिक समरसता पर दिया ताकि कांग्रेस जातिवादी कार्ड न खेल सके. इसकी जिम्मेदारी भी संघ खुद उठा रहा है, जिसमें स्वयं सेवक ग्रामीण क्षेत्रों में दलित वर्ग के बीच अभी से अपना कार्य प्रारंभ कर देंगे. संघ के मध्य प्रांत संघ संचालक अशोक सोहनी की निगरानी में यह अभियान चलेगा एवं भाजपा सहयोगी रहेगी. संघ व भाजपा संगठन दोनों को मालूम है कि प्रदेश की सत्ता इस बार कांग्रेस की मेहरबानी से नहीं मिलेगी, क्योंकि 15 साल की सत्ता विरोधी लहर पर भाजपा सवार है. दूसरी तरफ यह अफवाह भी जोर पकड़ रही है कि प्रदेश भाजपाध्यक्ष नंदकुमार ङ्क्षसह को पद छोडऩा होगा. इस पद के लिये कैलाश विजयवर्गीय का नाम उभर रहा है, जो शायद मुख्यमंत्री को मंजूर नहीं होगा. इसके बावजूद यह तय है कि विजय के लिये समरसता व बदलाव का मंंत्र प्रदेश भाजपा को स्वीकार करना होगा.">

संघ के चिंतन से मिला जीत का मंत्र

2018/01/15



सामाजिक समरसता व संगठन में बदलाव पर जोर

संघ की अगुवाई में चलेगा समरसता अभियान प्रकाश पांडेय भोपाल, संघ के तीन दिवसीय कार्यक्रम में स्पष्टï तो कुछ नहीं रहा, लेकिन संकेतों में भाजपा को विजय का मंत्र मिल गया. सीधा संकेत समरसता व संगठन में बदलाव का रहा. दोनों ऐसे मामले हैं जो चुनाव में सीधा असर डाल सकते हैं. संघ प्रमुख ने सर्वाधिक जोर सामाजिक समरसता पर दिया. इसकी वजह यह है कि इस बार कांग्रेस जिग्नेश मेवानी व हार्दिक पटेल को मध्यप्रदेश में आजमाने जा रही है. एक नेता दलित राजनीति को बढ़ावा दे रहा है तो दूसरा गुजरात के पाटीदार आंदोलन का जनक है. दोनों ने मिलकर गुजरात में भी ऐसा कुछ कर दिया कि प्रधानमंत्री को भी चुनाव में पसीना बहाना पड़ा. उसके बाद भी भाजपा सौ सीट के अंदर सिमट गई. संभवत: इसीलिये संघ प्रमुख ने सबसे अधिक जोर सामाजिक समरसता पर दिया ताकि कांग्रेस जातिवादी कार्ड न खेल सके. इसकी जिम्मेदारी भी संघ खुद उठा रहा है, जिसमें स्वयं सेवक ग्रामीण क्षेत्रों में दलित वर्ग के बीच अभी से अपना कार्य प्रारंभ कर देंगे. संघ के मध्य प्रांत संघ संचालक अशोक सोहनी की निगरानी में यह अभियान चलेगा एवं भाजपा सहयोगी रहेगी. संघ व भाजपा संगठन दोनों को मालूम है कि प्रदेश की सत्ता इस बार कांग्रेस की मेहरबानी से नहीं मिलेगी, क्योंकि 15 साल की सत्ता विरोधी लहर पर भाजपा सवार है. दूसरी तरफ यह अफवाह भी जोर पकड़ रही है कि प्रदेश भाजपाध्यक्ष नंदकुमार ङ्क्षसह को पद छोडऩा होगा. इस पद के लिये कैलाश विजयवर्गीय का नाम उभर रहा है, जो शायद मुख्यमंत्री को मंजूर नहीं होगा. इसके बावजूद यह तय है कि विजय के लिये समरसता व बदलाव का मंंत्र प्रदेश भाजपा को स्वीकार करना होगा.


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