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नयी दिल्ली,  केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने नेशनल कौंसिल फॉर टीचर एजुकेशन कानून में संशोधन करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी जिससे राष्ट्रीय शिक्षक परिषद् की अनुमति लिए बिना बीएड आदि की डिग्री देने वाले शिक्षण संस्थानों को मान्यता मिल जायेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आज मंत्रिमंडल की बैठक में यह मंजूरी दी गयी। यहाँ जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, नेशनल कौंसिल फॉर टीचर एजुकेशन एक्ट 1993 में संशोधन कर एक नया विधेयक लाया जायेगा, जिसके जरिये उन केन्द्रीय या राज्य के शैक्षणिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों के बीएड एवं डीइड पाठ्यक्रमों को पिछली तारीखों से मान्यता दी जायेगी, जो नेशनल कौंसिल फॉर टीचर एजुकेशन की अनुमति के बिना चल रहे थे। इस संशोधित कानून के जरिये इन संस्थानों को एक बार में ही अनुमति दे दी जायेगी, जिससे छात्रों का भविष्य अन्धकार में न पड़ जाये और डिग्री लेने वाले छात्रों को शिक्षक की नौकरी मिल सके। परिषद् ने सभी संस्थानों को पत्र लिखकर सूचना दी थी की वे अपना पाठ्यक्रम चलाने के लिए इस वर्ष 31 मार्च तक परिषद् से अनुमति ले लें। 1993 में बना यह कानून जम्मू-कश्मीर को छोड़कर सब राज्यों में 1995 में लागू हुआ था। इस कानून का उद्देश्य शिक्षकों की डिग्री की पढ़ाई में गुणवत्ता निर्धारित करना था।"/> नयी दिल्ली,  केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने नेशनल कौंसिल फॉर टीचर एजुकेशन कानून में संशोधन करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी जिससे राष्ट्रीय शिक्षक परिषद् की अनुमति लिए बिना बीएड आदि की डिग्री देने वाले शिक्षण संस्थानों को मान्यता मिल जायेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आज मंत्रिमंडल की बैठक में यह मंजूरी दी गयी। यहाँ जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, नेशनल कौंसिल फॉर टीचर एजुकेशन एक्ट 1993 में संशोधन कर एक नया विधेयक लाया जायेगा, जिसके जरिये उन केन्द्रीय या राज्य के शैक्षणिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों के बीएड एवं डीइड पाठ्यक्रमों को पिछली तारीखों से मान्यता दी जायेगी, जो नेशनल कौंसिल फॉर टीचर एजुकेशन की अनुमति के बिना चल रहे थे। इस संशोधित कानून के जरिये इन संस्थानों को एक बार में ही अनुमति दे दी जायेगी, जिससे छात्रों का भविष्य अन्धकार में न पड़ जाये और डिग्री लेने वाले छात्रों को शिक्षक की नौकरी मिल सके। परिषद् ने सभी संस्थानों को पत्र लिखकर सूचना दी थी की वे अपना पाठ्यक्रम चलाने के लिए इस वर्ष 31 मार्च तक परिषद् से अनुमति ले लें। 1993 में बना यह कानून जम्मू-कश्मीर को छोड़कर सब राज्यों में 1995 में लागू हुआ था। इस कानून का उद्देश्य शिक्षकों की डिग्री की पढ़ाई में गुणवत्ता निर्धारित करना था।"/> नयी दिल्ली,  केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने नेशनल कौंसिल फॉर टीचर एजुकेशन कानून में संशोधन करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी जिससे राष्ट्रीय शिक्षक परिषद् की अनुमति लिए बिना बीएड आदि की डिग्री देने वाले शिक्षण संस्थानों को मान्यता मिल जायेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आज मंत्रिमंडल की बैठक में यह मंजूरी दी गयी। यहाँ जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, नेशनल कौंसिल फॉर टीचर एजुकेशन एक्ट 1993 में संशोधन कर एक नया विधेयक लाया जायेगा, जिसके जरिये उन केन्द्रीय या राज्य के शैक्षणिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों के बीएड एवं डीइड पाठ्यक्रमों को पिछली तारीखों से मान्यता दी जायेगी, जो नेशनल कौंसिल फॉर टीचर एजुकेशन की अनुमति के बिना चल रहे थे। इस संशोधित कानून के जरिये इन संस्थानों को एक बार में ही अनुमति दे दी जायेगी, जिससे छात्रों का भविष्य अन्धकार में न पड़ जाये और डिग्री लेने वाले छात्रों को शिक्षक की नौकरी मिल सके। परिषद् ने सभी संस्थानों को पत्र लिखकर सूचना दी थी की वे अपना पाठ्यक्रम चलाने के लिए इस वर्ष 31 मार्च तक परिषद् से अनुमति ले लें। 1993 में बना यह कानून जम्मू-कश्मीर को छोड़कर सब राज्यों में 1995 में लागू हुआ था। इस कानून का उद्देश्य शिक्षकों की डिग्री की पढ़ाई में गुणवत्ता निर्धारित करना था।">

शिक्षकों की डिग्री के लिए कानून में संशोधन होगा

2017/11/01



नयी दिल्ली,  केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने नेशनल कौंसिल फॉर टीचर एजुकेशन कानून में संशोधन करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी जिससे राष्ट्रीय शिक्षक परिषद् की अनुमति लिए बिना बीएड आदि की डिग्री देने वाले शिक्षण संस्थानों को मान्यता मिल जायेगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आज मंत्रिमंडल की बैठक में यह मंजूरी दी गयी। यहाँ जारी एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, नेशनल कौंसिल फॉर टीचर एजुकेशन एक्ट 1993 में संशोधन कर एक नया विधेयक लाया जायेगा, जिसके जरिये उन केन्द्रीय या राज्य के शैक्षणिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों के बीएड एवं डीइड पाठ्यक्रमों को पिछली तारीखों से मान्यता दी जायेगी, जो नेशनल कौंसिल फॉर टीचर एजुकेशन की अनुमति के बिना चल रहे थे। इस संशोधित कानून के जरिये इन संस्थानों को एक बार में ही अनुमति दे दी जायेगी, जिससे छात्रों का भविष्य अन्धकार में न पड़ जाये और डिग्री लेने वाले छात्रों को शिक्षक की नौकरी मिल सके। परिषद् ने सभी संस्थानों को पत्र लिखकर सूचना दी थी की वे अपना पाठ्यक्रम चलाने के लिए इस वर्ष 31 मार्च तक परिषद् से अनुमति ले लें। 1993 में बना यह कानून जम्मू-कश्मीर को छोड़कर सब राज्यों में 1995 में लागू हुआ था। इस कानून का उद्देश्य शिक्षकों की डिग्री की पढ़ाई में गुणवत्ता निर्धारित करना था।


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