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सभी को मालूम है अतिक्रमण बढ़ रहा है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं करता. -मोहम्मद सगीर नेता प्रतिपक्ष नगर निगम"/> सभी को मालूम है अतिक्रमण बढ़ रहा है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं करता. -मोहम्मद सगीर नेता प्रतिपक्ष नगर निगम"/> सभी को मालूम है अतिक्रमण बढ़ रहा है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं करता. -मोहम्मद सगीर नेता प्रतिपक्ष नगर निगम">

वो आते हैं, हटाते हैं, हम फिर काबिज हो जाते हैं!

2018/01/15



नवभारत न्यूज भोपाल, वो आते हैं, हमें हटा देते हैं, लेकिन हम फिर काबिज हो जाते हैं. कुछ ऐसा ही कहना है फुटपाथ पर लगे अवैध बाजारों के छोटे व्यापारियों का. मामला है एम.पी. नगर जोन-वन का, सडक़ों के किनारे बाजार सजे हैं. नगर निगम व जिला प्रशासन भी हैरान है कि इस अतिक्रमण का स्थायी समाधान क्या हो सकता है. स्वच्छ भारत रैंकिंग के तहत अपने ही राज्य के प्रतिद्वंद्वी शहर इंदौर को मात देने के लिये राजधानी भोपाल की तैयारियां परवान पर हैं. इस क्रम में भोपाल नगर निगम जोर-शोर से सडक़ किनारे ठेलों के अतिक्रमण को हटाने में लग गई है. एम.पी. नगर एवं प्रेस कॉम्पलेक्स जैसे व्यस्त इलाकों में हर बड़ी बिल्डिंग के आगे एक गुमटी या टपरी देखने को मिल जाती है. गौरतलब है कि कुछ दुकानें पिछले 30-40 वर्षों से इसी प्रकार सुबह-शाम, धूप-बरसात में सजती आई हैं. शॉपिंग मॉल्स से लेकर हर छोटी-बड़ी बिल्डिंग का पार्किंग लॉट ही इनका बसेरा है. बीते दो महीनों से अतिक्रमण हटाओ अभियान इन छोटे दुकानदारों एवं ठेलेवालों के लिये परेशानी का सबब बना हुआ है. इस मुहिम का मुख्य उद्देश्य शहर की सफाई है. लेकिन दुकानदारों एवं खोमचे वालों के अनुसार ग्राहकों को स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता को देखते हुये वे स्वयं ही दुकानों के 5-5 फीट तक सफाई रखते हैं. बकौल मदनलाल, जो कि चाय-पकौड़े की दुकान लगाते हैं, ‘हमारा तो तीस साल का अनवरत् रिश्ता है. यदि फुटपाथ एवं पार्किंग पर दुकानें नहीं लगायेंगे तो परिवार का पेट भरने का कोई जरिया नहीं रह जायेगा.’ एक ऐसे ही ठेले पर भोजनालय चलाने वाले भगवान गुप्ता ने बताया कि निगम उनसे रोज के 20 से 80 रुपये तक की पर्ची कटवाती है. लेकिन विचारणीय तथ्य यह है कि ये छोटे दुकानदार रोज की पर्ची कटवाते हैं और स्वच्छ भारत अभियान के तहत 200 से 500 रु. तक का स्पॉट फाइन भी देते हैं. यदि सिक्के के दूसरे पहलू को देखें तो खाने की शौकीन भोपाल की जनता का भी इन स्टॉलों के बिना गुजारा नहीं है. निगम द्वारा केवल दुकान हटाना ही नंबर-1 की रैंकिंग का रास्ता नहीं है क्यों सही मायने में शायद ही कोई कदम उठाये जा रहे हैं. अभियान के महज दो दिनों में दुकानें उसी प्रकार दुबारा सज जाती हैं. रोज-रोज की तोड़-फोड़ व चालान से बेहतर है कि इसका उचित विकल्प तलाशा जाये. रोजाना लगती हैं नई दुकानें एम.पी. नगर जैसे व्यस्त क्षेत्र में रोज दो नई दुकानें सडक़ या फुटपाथ पर लग जाती हैं. सभी को मालूम है कि गुमठी माफिया सक्रिय है, जिसमें नेता, निगम कर्मी का गठजोड़ होता है. यहां तक कि कई बार दुकान लगाने के ऑडियो भी वायरल हुये लेकिन निगम ने कार्रवाई नहीं की. तहबाजारी वसूली तो अवैध कैसे दुकानदारों का कहना है कि जब तहबाजारी के तहत नगर निगम उनसे पैसे वसूल करता है तो आये दिन रोजगार से बेदखल क्यों करते हैं. बाद में दुकान वापस हासिल करने के लिये भी जुर्माना अदा करना होता है. सभी को मालूम है अतिक्रमण बढ़ रहा है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं करता. -मोहम्मद सगीर नेता प्रतिपक्ष नगर निगम


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