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वोट के लिए भाजपा की नजर महिलाओं पर

2017/12/22



सरकार बना रही लुभावनी योजनाएँ, क्योंकि 2 करोड़ 39 लाख हैं महिला मतदाता नवभारत, न्यूज़ भोपाल, मप्र में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रदेश की सत्तारूढ़ भाजपा सरकार आधी आबादी को लुभाने में जुट गई है. यह बात इसलिए भी कही जा रही है क्योंकि दंड विधि संशोधन विधेयक से लेकर हाल ही में उपराष्ट्रपति की मौजूदगी में हुए स्वसहायता समूह सम्मेलन तक महिलाओं से जुड़े रहे है. क्योंकि भाजपा को भरोसा है कि यदि महिलाओं को प्रभावित करने में सफल हो जाते हैं, तो सीधे-सीधे 2 करोड 39 लाख वोट का इजाफा हो जाएगा. यहां बता दें कि 5 करोड़ 2 लाख से अधिक मतदाता आगामी वर्ष मताधिकार का प्रयोग करेंगे. यही वजह है कि समाज में महिलाओं की संख्या और महत्व को देखते हुए, भाजपा ने इसे वोट बैंक में तब्दील करने की योजना बनाई है. जिससे अगले विधानसभा चुनाव में इसे भुनाया जा सके. इसीलिए सोची समझी रणनीति के तहत राज्य में सरकार महिला सशक्तिकरण को मुद्दा बनाने में जुटी है. इसके लिए शराब दुकानों को बंद करने, अहाते, धार्मिक स्थल, स्कूल-कॉलेज, महिलाओं के आवागमन वाले रास्तों से शराब दुकानें हटाने की घोषणाओं के जरिए महिलाओं के बीच पैठ बनाने की तैयारी है. साथ ही निकाय एवं पंचायत चुनाव में 50 फीसदी आरक्षण, शिक्षकों भर्ती में 50 फीसदी आरक्षण एवं अन्य नौकरयिों में 33 फीसदी आरक्षण को अगले चुनाव से जोड़े जाने की तैयारी है. इसके अलावा प्रदेश में पिछले 15 साल से महिला अपराध के मामले में देशभर में बदनामी झेल रही सरकार ने नाबालिगों के साथ दुष्कर्म करने वालों को फांसी का सजा देने का विधेयक विधानसभा से पारित कराया है. कानून बनने से पहले ही महिलाओं के बीच ब्रॉडिंग की तैयारी, पोषण आहर वितरण व्यवस्था में महिलाओं समूहों को काम देने की घोषणा की गई है. इसे महिला सशक्तिकरण से जोड़कर बताया जा रहा है. इन सबके जरिए महिलाओं को भावनात्मक रूप से जोडऩे की कोशिश होगी. यहां बता दें कि भारत निर्वाचन आयोग के अनुसार प्रदेश में 5.02 करोड़ मतदाता हैं. जिनमें से 2.63 करोड़ पुरूष एवं 2.39 करोड़ महिला मतदाता है. सरकार का फोकस महिला मतदाताओं को साधने पर है. वोट बढ़ा पर सरकार विरोधी लहर से चिंता में सरकार के वोट बैंक में 2008 के मुकाबले 2013 में इजाफा हुआ है. लेकिन इसके बाद भाजपा की चिंता इस वोट बैंक को बरकरार रखने की है. इसलिए भी कि बीते 14 वर्षों से सत्ता में काबिज भाजपा के खिलाफ आक्रोश बढ़ रहा है. यह इसलिए कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की छवि के विपरीत संगठन और सरकार के जिम्मेदारों को लेकर नाराजगी है. इसके चलते भाजपा ने मजदूर, किसान और कर्मचारी के बजाय महिलाओं को साधना जरूरी समझा है. छवि सुधारने की कोशिश भाजपा द्वारा की जा रही इस कवायद को कांग्रेस छवि सुधारने की नाकाम कोशिश के तौर पर देख रही है. प्रवक्ता दुर्गेश शर्मा की माने तो बीते 14 वर्षों में महिलाएं ही सबसे ज्यादा सरकार की असंवेदनशीलता का शिकार बनी हैं. गैंगरेप और बलात्कार सहित कई ऐसे मामले है जिसके चलते मप्र देश के अन्य जिलों को पछाड़ कर अपराध में अव्वल स्थान बनाने में सफल रहा है. ऐसे में कम ही उम्मीद है कि इन प्रयासों से महिलाएं भाजपा से खुश हो जाएंगी. क्योंकि घर का बजट बनाने वाली नारी शक्ति का सीधा वास्ता मंहगाई से पड़ता है.


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