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भोपाल, केन्द्रीय विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर ने कहा है कि हमारे देश की विदेश नीति ''वसुधैव कुटुम्बकम'' नीति पर आधारित है. भारतीय विदेश नीति का मुख्य आधार राष्ट्रीयता व मानवता है. गत साढ़े तीन वर्षों में देश का जो सम्मान विश्व में बढ़ा है वह उल्लेखनीय है. आतंकवाद का जवाब सिर्फ राष्ट्रवाद से ही दिया जा सकता है. अकबर प्रो. बृजमोहन मिश्र स्मृति न्यास द्वारा आयोजित ताप्ती श्रवणमाला 2017 में वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे. इस दौरान देश की जानी मानी पर्वतारोही अरूणिमा सिन्हा, जिन्होंने रेल दुघर्टना में अपना एक पैर गवाने के बावजूद दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउण्ट एवरेस्ट पर राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराया, ने भी संबोधित किया. विदेश राज्यमंत्री एम.जे. अकबर ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में अमेरिका जैसा देश भी भारत को विश्व में एक बड़ी शक्ति मानने लगा है. गत साढ़े तीन वर्षों में अफगानिस्तान व बांगलादेश सहित सभी पड़ोसी देशों से भारत के संबंधों में उल्लेखनीय सुधार आया है. जब लक्ष्य ही जुनून बन जाए तो कुछ भी असंभव नहीं अरूणिमा सिन्हा ने बताया कि वर्ष 2011 में रेल दुघर्टना में अपना एक पैर गंवाने के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी तथा ऐसी विपरित परिस्थिति में माउण्ट एवरेस्ट पर चढऩे का निर्णय उन्होंने अपने खोये हुए आत्मविश्वास को वापस पाने के लिए लिया था. उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति का लक्ष्य एक जुनून का रूप ले ले तो उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं हैं.सुश्री अरूणिमा सिन्हा ने कहा कि जब संकट सामने हो तो रिस्क नहीं लेना ही सबसे बड़ी रिस्क है. उन्होंने बताया कि माउण्ट एवरेस्ट पर चढऩे के बाद जब उनका साथी शेरपा उनसे जल्दी वापस उतरने के लिए कह रहा था कि ऑक्सिजन समाप्त होने वाली है, ऐसी परिस्थिति मेें उन्होंने तिरंगा फहराकर वीडियोग्राफी कर अपना संदेश रिकार्ड करवाने जैसे दुस्साहसिक कदम उठाया. क्योंकि वे इस वीडियो के माध्यम से दुनिया को संदेश देना चाहती थीं कि अगर युवा कुछ करने की ठान लें तो कुछ भी असंभव नहीं. उन्होंने कहा कि जीवन में सोच, लक्ष्य और फोकस से सब कुछ पाना संभव है. अरूणिमा सिन्हा ने कहा कि जीवन में आने वाली परेशानियों से व्यक्ति को अपने आपको निखारना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब लक्ष्य के लिए लोग आपको पागल कहने लगें तो समझ लो, लक्ष्य पाने से आपको कोई नहीं रोक सकता. युद्घ नहीं बातचीत है हल दुनिया में आतंक के खिलाफ लड़ाई सिर्फ राष्ट्रीयता के बल पर ही जीती जा सकती है. विदेश राज्यमंत्री एम.जे. अकबर ने कहा कि आज के युग में अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं का हल युद्ध से नहीं बल्कि बातचीत से ही संभव है. उन्होंने कहा कि देश में हिन्दू व मुस्लिमों को आपस में लडऩे के स्थान पर दोनों को मिलकर गरीबी से लडऩे की आवश्यकता है. विदेश राज्यमंत्री अकबर ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से देश के गरीबों और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने काफी मदद मिली है. उन्होंने कहा कि गरीबों के बैंकों में खाते खोलने तथा सरकारी योजनाओं की अनुदान राशि सीधे गरीबों के खाते में जमा करने के लिए जनधन योजना के तहत जीरो बैलेंस पर बैंक में खाते खोलने का एतिहासिक कार्य प्रधानमंत्री के कार्यकाल में ही सम्भव हुआ है."/> भोपाल, केन्द्रीय विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर ने कहा है कि हमारे देश की विदेश नीति ''वसुधैव कुटुम्बकम'' नीति पर आधारित है. भारतीय विदेश नीति का मुख्य आधार राष्ट्रीयता व मानवता है. गत साढ़े तीन वर्षों में देश का जो सम्मान विश्व में बढ़ा है वह उल्लेखनीय है. आतंकवाद का जवाब सिर्फ राष्ट्रवाद से ही दिया जा सकता है. अकबर प्रो. बृजमोहन मिश्र स्मृति न्यास द्वारा आयोजित ताप्ती श्रवणमाला 2017 में वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे. इस दौरान देश की जानी मानी पर्वतारोही अरूणिमा सिन्हा, जिन्होंने रेल दुघर्टना में अपना एक पैर गवाने के बावजूद दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउण्ट एवरेस्ट पर राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराया, ने भी संबोधित किया. विदेश राज्यमंत्री एम.जे. अकबर ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में अमेरिका जैसा देश भी भारत को विश्व में एक बड़ी शक्ति मानने लगा है. गत साढ़े तीन वर्षों में अफगानिस्तान व बांगलादेश सहित सभी पड़ोसी देशों से भारत के संबंधों में उल्लेखनीय सुधार आया है. जब लक्ष्य ही जुनून बन जाए तो कुछ भी असंभव नहीं अरूणिमा सिन्हा ने बताया कि वर्ष 2011 में रेल दुघर्टना में अपना एक पैर गंवाने के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी तथा ऐसी विपरित परिस्थिति में माउण्ट एवरेस्ट पर चढऩे का निर्णय उन्होंने अपने खोये हुए आत्मविश्वास को वापस पाने के लिए लिया था. उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति का लक्ष्य एक जुनून का रूप ले ले तो उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं हैं.सुश्री अरूणिमा सिन्हा ने कहा कि जब संकट सामने हो तो रिस्क नहीं लेना ही सबसे बड़ी रिस्क है. उन्होंने बताया कि माउण्ट एवरेस्ट पर चढऩे के बाद जब उनका साथी शेरपा उनसे जल्दी वापस उतरने के लिए कह रहा था कि ऑक्सिजन समाप्त होने वाली है, ऐसी परिस्थिति मेें उन्होंने तिरंगा फहराकर वीडियोग्राफी कर अपना संदेश रिकार्ड करवाने जैसे दुस्साहसिक कदम उठाया. क्योंकि वे इस वीडियो के माध्यम से दुनिया को संदेश देना चाहती थीं कि अगर युवा कुछ करने की ठान लें तो कुछ भी असंभव नहीं. उन्होंने कहा कि जीवन में सोच, लक्ष्य और फोकस से सब कुछ पाना संभव है. अरूणिमा सिन्हा ने कहा कि जीवन में आने वाली परेशानियों से व्यक्ति को अपने आपको निखारना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब लक्ष्य के लिए लोग आपको पागल कहने लगें तो समझ लो, लक्ष्य पाने से आपको कोई नहीं रोक सकता. युद्घ नहीं बातचीत है हल दुनिया में आतंक के खिलाफ लड़ाई सिर्फ राष्ट्रीयता के बल पर ही जीती जा सकती है. विदेश राज्यमंत्री एम.जे. अकबर ने कहा कि आज के युग में अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं का हल युद्ध से नहीं बल्कि बातचीत से ही संभव है. उन्होंने कहा कि देश में हिन्दू व मुस्लिमों को आपस में लडऩे के स्थान पर दोनों को मिलकर गरीबी से लडऩे की आवश्यकता है. विदेश राज्यमंत्री अकबर ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से देश के गरीबों और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने काफी मदद मिली है. उन्होंने कहा कि गरीबों के बैंकों में खाते खोलने तथा सरकारी योजनाओं की अनुदान राशि सीधे गरीबों के खाते में जमा करने के लिए जनधन योजना के तहत जीरो बैलेंस पर बैंक में खाते खोलने का एतिहासिक कार्य प्रधानमंत्री के कार्यकाल में ही सम्भव हुआ है."/> भोपाल, केन्द्रीय विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर ने कहा है कि हमारे देश की विदेश नीति ''वसुधैव कुटुम्बकम'' नीति पर आधारित है. भारतीय विदेश नीति का मुख्य आधार राष्ट्रीयता व मानवता है. गत साढ़े तीन वर्षों में देश का जो सम्मान विश्व में बढ़ा है वह उल्लेखनीय है. आतंकवाद का जवाब सिर्फ राष्ट्रवाद से ही दिया जा सकता है. अकबर प्रो. बृजमोहन मिश्र स्मृति न्यास द्वारा आयोजित ताप्ती श्रवणमाला 2017 में वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे. इस दौरान देश की जानी मानी पर्वतारोही अरूणिमा सिन्हा, जिन्होंने रेल दुघर्टना में अपना एक पैर गवाने के बावजूद दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउण्ट एवरेस्ट पर राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराया, ने भी संबोधित किया. विदेश राज्यमंत्री एम.जे. अकबर ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में अमेरिका जैसा देश भी भारत को विश्व में एक बड़ी शक्ति मानने लगा है. गत साढ़े तीन वर्षों में अफगानिस्तान व बांगलादेश सहित सभी पड़ोसी देशों से भारत के संबंधों में उल्लेखनीय सुधार आया है. जब लक्ष्य ही जुनून बन जाए तो कुछ भी असंभव नहीं अरूणिमा सिन्हा ने बताया कि वर्ष 2011 में रेल दुघर्टना में अपना एक पैर गंवाने के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी तथा ऐसी विपरित परिस्थिति में माउण्ट एवरेस्ट पर चढऩे का निर्णय उन्होंने अपने खोये हुए आत्मविश्वास को वापस पाने के लिए लिया था. उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति का लक्ष्य एक जुनून का रूप ले ले तो उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं हैं.सुश्री अरूणिमा सिन्हा ने कहा कि जब संकट सामने हो तो रिस्क नहीं लेना ही सबसे बड़ी रिस्क है. उन्होंने बताया कि माउण्ट एवरेस्ट पर चढऩे के बाद जब उनका साथी शेरपा उनसे जल्दी वापस उतरने के लिए कह रहा था कि ऑक्सिजन समाप्त होने वाली है, ऐसी परिस्थिति मेें उन्होंने तिरंगा फहराकर वीडियोग्राफी कर अपना संदेश रिकार्ड करवाने जैसे दुस्साहसिक कदम उठाया. क्योंकि वे इस वीडियो के माध्यम से दुनिया को संदेश देना चाहती थीं कि अगर युवा कुछ करने की ठान लें तो कुछ भी असंभव नहीं. उन्होंने कहा कि जीवन में सोच, लक्ष्य और फोकस से सब कुछ पाना संभव है. अरूणिमा सिन्हा ने कहा कि जीवन में आने वाली परेशानियों से व्यक्ति को अपने आपको निखारना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब लक्ष्य के लिए लोग आपको पागल कहने लगें तो समझ लो, लक्ष्य पाने से आपको कोई नहीं रोक सकता. युद्घ नहीं बातचीत है हल दुनिया में आतंक के खिलाफ लड़ाई सिर्फ राष्ट्रीयता के बल पर ही जीती जा सकती है. विदेश राज्यमंत्री एम.जे. अकबर ने कहा कि आज के युग में अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं का हल युद्ध से नहीं बल्कि बातचीत से ही संभव है. उन्होंने कहा कि देश में हिन्दू व मुस्लिमों को आपस में लडऩे के स्थान पर दोनों को मिलकर गरीबी से लडऩे की आवश्यकता है. विदेश राज्यमंत्री अकबर ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से देश के गरीबों और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने काफी मदद मिली है. उन्होंने कहा कि गरीबों के बैंकों में खाते खोलने तथा सरकारी योजनाओं की अनुदान राशि सीधे गरीबों के खाते में जमा करने के लिए जनधन योजना के तहत जीरो बैलेंस पर बैंक में खाते खोलने का एतिहासिक कार्य प्रधानमंत्री के कार्यकाल में ही सम्भव हुआ है.">

वसुधैव कुटुम्बकम पर आधारित है हमारी विदेश नीति

2017/12/25



भोपाल, केन्द्रीय विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर ने कहा है कि हमारे देश की विदेश नीति ''वसुधैव कुटुम्बकम'' नीति पर आधारित है. भारतीय विदेश नीति का मुख्य आधार राष्ट्रीयता व मानवता है. गत साढ़े तीन वर्षों में देश का जो सम्मान विश्व में बढ़ा है वह उल्लेखनीय है. आतंकवाद का जवाब सिर्फ राष्ट्रवाद से ही दिया जा सकता है. अकबर प्रो. बृजमोहन मिश्र स्मृति न्यास द्वारा आयोजित ताप्ती श्रवणमाला 2017 में वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे. इस दौरान देश की जानी मानी पर्वतारोही अरूणिमा सिन्हा, जिन्होंने रेल दुघर्टना में अपना एक पैर गवाने के बावजूद दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउण्ट एवरेस्ट पर राष्ट्रध्वज तिरंगा फहराया, ने भी संबोधित किया. विदेश राज्यमंत्री एम.जे. अकबर ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में अमेरिका जैसा देश भी भारत को विश्व में एक बड़ी शक्ति मानने लगा है. गत साढ़े तीन वर्षों में अफगानिस्तान व बांगलादेश सहित सभी पड़ोसी देशों से भारत के संबंधों में उल्लेखनीय सुधार आया है. जब लक्ष्य ही जुनून बन जाए तो कुछ भी असंभव नहीं अरूणिमा सिन्हा ने बताया कि वर्ष 2011 में रेल दुघर्टना में अपना एक पैर गंवाने के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी तथा ऐसी विपरित परिस्थिति में माउण्ट एवरेस्ट पर चढऩे का निर्णय उन्होंने अपने खोये हुए आत्मविश्वास को वापस पाने के लिए लिया था. उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति का लक्ष्य एक जुनून का रूप ले ले तो उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं हैं.सुश्री अरूणिमा सिन्हा ने कहा कि जब संकट सामने हो तो रिस्क नहीं लेना ही सबसे बड़ी रिस्क है. उन्होंने बताया कि माउण्ट एवरेस्ट पर चढऩे के बाद जब उनका साथी शेरपा उनसे जल्दी वापस उतरने के लिए कह रहा था कि ऑक्सिजन समाप्त होने वाली है, ऐसी परिस्थिति मेें उन्होंने तिरंगा फहराकर वीडियोग्राफी कर अपना संदेश रिकार्ड करवाने जैसे दुस्साहसिक कदम उठाया. क्योंकि वे इस वीडियो के माध्यम से दुनिया को संदेश देना चाहती थीं कि अगर युवा कुछ करने की ठान लें तो कुछ भी असंभव नहीं. उन्होंने कहा कि जीवन में सोच, लक्ष्य और फोकस से सब कुछ पाना संभव है. अरूणिमा सिन्हा ने कहा कि जीवन में आने वाली परेशानियों से व्यक्ति को अपने आपको निखारना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब लक्ष्य के लिए लोग आपको पागल कहने लगें तो समझ लो, लक्ष्य पाने से आपको कोई नहीं रोक सकता. युद्घ नहीं बातचीत है हल दुनिया में आतंक के खिलाफ लड़ाई सिर्फ राष्ट्रीयता के बल पर ही जीती जा सकती है. विदेश राज्यमंत्री एम.जे. अकबर ने कहा कि आज के युग में अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं का हल युद्ध से नहीं बल्कि बातचीत से ही संभव है. उन्होंने कहा कि देश में हिन्दू व मुस्लिमों को आपस में लडऩे के स्थान पर दोनों को मिलकर गरीबी से लडऩे की आवश्यकता है. विदेश राज्यमंत्री अकबर ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से देश के गरीबों और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने काफी मदद मिली है. उन्होंने कहा कि गरीबों के बैंकों में खाते खोलने तथा सरकारी योजनाओं की अनुदान राशि सीधे गरीबों के खाते में जमा करने के लिए जनधन योजना के तहत जीरो बैलेंस पर बैंक में खाते खोलने का एतिहासिक कार्य प्रधानमंत्री के कार्यकाल में ही सम्भव हुआ है.


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