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नयी दिल्ली,  केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम ने ओडिशा सरकार पर वन अधिकार कानून लागू करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य के विभिन्न विभागों के बीच कोई समन्वय नहीं है। श्री ओराम ने यह बात वन अधिकार कानून में बदलाव करने के लिए ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के पत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कही। उनकी आेर से आज यहां जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि वन अधिकार कानून के प्रावधानों को लागू करने के लिए राज्य सरकार के विभागों में कोई तालमेल नहीं है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ओडिशा में एक लाख 86 हजार मामलों में से केवल 47 हजार 161 मामलों का निपटारा किया गया है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में इसके लिए ग्रामसभाअों काे जिम्मेदार ठहराया है जिनका ऐसे मामलों से कोई संबंध ही नहीं है। ऐसे मामले जिला और उप मंडलीय स्तरीय निकाय देखते हैं। उन्होंने अारोप लगाया कि आेडिशा के मुख्यमंत्री इस कानून काे लागू नहीं करना चाहते हैं बल्कि वे इसे कमजोर करना चाहते हैं। उनका मकसद कुछ व्यक्तियों को फायदा पहुंचाना हैं जो वन भूमि पर कब्जा किए हुए हैं। राज्य सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रही है। श्री ओराम ने कहा कि वनवासी वे लोग है जो वन की उपज पर जीविका चलाते है न कि खनन माफिया ।"/> नयी दिल्ली,  केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम ने ओडिशा सरकार पर वन अधिकार कानून लागू करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य के विभिन्न विभागों के बीच कोई समन्वय नहीं है। श्री ओराम ने यह बात वन अधिकार कानून में बदलाव करने के लिए ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के पत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कही। उनकी आेर से आज यहां जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि वन अधिकार कानून के प्रावधानों को लागू करने के लिए राज्य सरकार के विभागों में कोई तालमेल नहीं है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ओडिशा में एक लाख 86 हजार मामलों में से केवल 47 हजार 161 मामलों का निपटारा किया गया है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में इसके लिए ग्रामसभाअों काे जिम्मेदार ठहराया है जिनका ऐसे मामलों से कोई संबंध ही नहीं है। ऐसे मामले जिला और उप मंडलीय स्तरीय निकाय देखते हैं। उन्होंने अारोप लगाया कि आेडिशा के मुख्यमंत्री इस कानून काे लागू नहीं करना चाहते हैं बल्कि वे इसे कमजोर करना चाहते हैं। उनका मकसद कुछ व्यक्तियों को फायदा पहुंचाना हैं जो वन भूमि पर कब्जा किए हुए हैं। राज्य सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रही है। श्री ओराम ने कहा कि वनवासी वे लोग है जो वन की उपज पर जीविका चलाते है न कि खनन माफिया ।"/> नयी दिल्ली,  केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम ने ओडिशा सरकार पर वन अधिकार कानून लागू करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य के विभिन्न विभागों के बीच कोई समन्वय नहीं है। श्री ओराम ने यह बात वन अधिकार कानून में बदलाव करने के लिए ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के पत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कही। उनकी आेर से आज यहां जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि वन अधिकार कानून के प्रावधानों को लागू करने के लिए राज्य सरकार के विभागों में कोई तालमेल नहीं है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ओडिशा में एक लाख 86 हजार मामलों में से केवल 47 हजार 161 मामलों का निपटारा किया गया है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में इसके लिए ग्रामसभाअों काे जिम्मेदार ठहराया है जिनका ऐसे मामलों से कोई संबंध ही नहीं है। ऐसे मामले जिला और उप मंडलीय स्तरीय निकाय देखते हैं। उन्होंने अारोप लगाया कि आेडिशा के मुख्यमंत्री इस कानून काे लागू नहीं करना चाहते हैं बल्कि वे इसे कमजोर करना चाहते हैं। उनका मकसद कुछ व्यक्तियों को फायदा पहुंचाना हैं जो वन भूमि पर कब्जा किए हुए हैं। राज्य सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रही है। श्री ओराम ने कहा कि वनवासी वे लोग है जो वन की उपज पर जीविका चलाते है न कि खनन माफिया ।">

वन अधिकार कानून लागू करने में विफल ओडिशा सरकार : ओराम

2017/06/16



नयी दिल्ली,  केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री जुएल ओराम ने ओडिशा सरकार पर वन अधिकार कानून लागू करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य के विभिन्न विभागों के बीच कोई समन्वय नहीं है। श्री ओराम ने यह बात वन अधिकार कानून में बदलाव करने के लिए ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के पत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कही। उनकी आेर से आज यहां जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि वन अधिकार कानून के प्रावधानों को लागू करने के लिए राज्य सरकार के विभागों में कोई तालमेल नहीं है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ओडिशा में एक लाख 86 हजार मामलों में से केवल 47 हजार 161 मामलों का निपटारा किया गया है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में इसके लिए ग्रामसभाअों काे जिम्मेदार ठहराया है जिनका ऐसे मामलों से कोई संबंध ही नहीं है। ऐसे मामले जिला और उप मंडलीय स्तरीय निकाय देखते हैं। उन्होंने अारोप लगाया कि आेडिशा के मुख्यमंत्री इस कानून काे लागू नहीं करना चाहते हैं बल्कि वे इसे कमजोर करना चाहते हैं। उनका मकसद कुछ व्यक्तियों को फायदा पहुंचाना हैं जो वन भूमि पर कब्जा किए हुए हैं। राज्य सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करने में नाकाम रही है। श्री ओराम ने कहा कि वनवासी वे लोग है जो वन की उपज पर जीविका चलाते है न कि खनन माफिया ।


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