Breaking News :

मानव संग्रहालय में कार्यशाला आयोजित भोपाल, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में आज हिन्दी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'रचनात्मक लेखन' विषय पर राजभाषा कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए संग्रहालय के निदेशक, प्रो. सरित कुमार चौधरी ने कहा कि रचनात्मक लेखन के लिए जरूरी है भाषा और विषय का ज्ञान. इसके साथ ही इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि वह लेखन किस वर्ग के लिए किया जा रहा हैं. इस अवसर पर कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुधीर श्रीवस्ताव ने कहा कि रचनात्मक लेखन के लिए प्रचलित शब्दों का ज्ञान होना जरूरी हैं. अनछुए पहलुओं को अपने लेखन का हिस्सा बनाये और हमेशा अपडेट होना और समय के साथ बदलाव लाना जरूरी है. लेखन सही तरीके से संप्रेषित हो, रोचक लगे और उसका दूरगामी असर पड़ेे इसका ध्यान रखना चाहिए. तत्पश्चात राष्ट्रीय बालरंग के आयोजन से संबंधित 5 बिंदुओं पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का कार्य कार्यशाला में करवाया गया. कार्यशाला का संचालन करते हुए सहायक राजभाषा अधिकारी राजेंद्र झारिया कहा कि व्यापार और सूचना तंत्र के विकास के साथ मौजूदा दौर में रचनात्मक लेखकों की माँग में भी तेजी आई है.साथ ही रचनात्मक लेखकों की फिल्मों, टेली सीरियल्स, विज्ञापनों में बहुत माँग है. इस क्षेत्र में करियर के विकल्प खुले हुए हैं."/> मानव संग्रहालय में कार्यशाला आयोजित भोपाल, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में आज हिन्दी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'रचनात्मक लेखन' विषय पर राजभाषा कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए संग्रहालय के निदेशक, प्रो. सरित कुमार चौधरी ने कहा कि रचनात्मक लेखन के लिए जरूरी है भाषा और विषय का ज्ञान. इसके साथ ही इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि वह लेखन किस वर्ग के लिए किया जा रहा हैं. इस अवसर पर कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुधीर श्रीवस्ताव ने कहा कि रचनात्मक लेखन के लिए प्रचलित शब्दों का ज्ञान होना जरूरी हैं. अनछुए पहलुओं को अपने लेखन का हिस्सा बनाये और हमेशा अपडेट होना और समय के साथ बदलाव लाना जरूरी है. लेखन सही तरीके से संप्रेषित हो, रोचक लगे और उसका दूरगामी असर पड़ेे इसका ध्यान रखना चाहिए. तत्पश्चात राष्ट्रीय बालरंग के आयोजन से संबंधित 5 बिंदुओं पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का कार्य कार्यशाला में करवाया गया. कार्यशाला का संचालन करते हुए सहायक राजभाषा अधिकारी राजेंद्र झारिया कहा कि व्यापार और सूचना तंत्र के विकास के साथ मौजूदा दौर में रचनात्मक लेखकों की माँग में भी तेजी आई है.साथ ही रचनात्मक लेखकों की फिल्मों, टेली सीरियल्स, विज्ञापनों में बहुत माँग है. इस क्षेत्र में करियर के विकल्प खुले हुए हैं."/> मानव संग्रहालय में कार्यशाला आयोजित भोपाल, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में आज हिन्दी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'रचनात्मक लेखन' विषय पर राजभाषा कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए संग्रहालय के निदेशक, प्रो. सरित कुमार चौधरी ने कहा कि रचनात्मक लेखन के लिए जरूरी है भाषा और विषय का ज्ञान. इसके साथ ही इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि वह लेखन किस वर्ग के लिए किया जा रहा हैं. इस अवसर पर कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुधीर श्रीवस्ताव ने कहा कि रचनात्मक लेखन के लिए प्रचलित शब्दों का ज्ञान होना जरूरी हैं. अनछुए पहलुओं को अपने लेखन का हिस्सा बनाये और हमेशा अपडेट होना और समय के साथ बदलाव लाना जरूरी है. लेखन सही तरीके से संप्रेषित हो, रोचक लगे और उसका दूरगामी असर पड़ेे इसका ध्यान रखना चाहिए. तत्पश्चात राष्ट्रीय बालरंग के आयोजन से संबंधित 5 बिंदुओं पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का कार्य कार्यशाला में करवाया गया. कार्यशाला का संचालन करते हुए सहायक राजभाषा अधिकारी राजेंद्र झारिया कहा कि व्यापार और सूचना तंत्र के विकास के साथ मौजूदा दौर में रचनात्मक लेखकों की माँग में भी तेजी आई है.साथ ही रचनात्मक लेखकों की फिल्मों, टेली सीरियल्स, विज्ञापनों में बहुत माँग है. इस क्षेत्र में करियर के विकल्प खुले हुए हैं.">

रचनात्मक लेखन हेतु भाषा ज्ञान जरूरी

2017/11/22



मानव संग्रहालय में कार्यशाला आयोजित भोपाल, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में आज हिन्दी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'रचनात्मक लेखन' विषय पर राजभाषा कार्यशाला का आयोजन किया गया. कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए संग्रहालय के निदेशक, प्रो. सरित कुमार चौधरी ने कहा कि रचनात्मक लेखन के लिए जरूरी है भाषा और विषय का ज्ञान. इसके साथ ही इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि वह लेखन किस वर्ग के लिए किया जा रहा हैं. इस अवसर पर कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुधीर श्रीवस्ताव ने कहा कि रचनात्मक लेखन के लिए प्रचलित शब्दों का ज्ञान होना जरूरी हैं. अनछुए पहलुओं को अपने लेखन का हिस्सा बनाये और हमेशा अपडेट होना और समय के साथ बदलाव लाना जरूरी है. लेखन सही तरीके से संप्रेषित हो, रोचक लगे और उसका दूरगामी असर पड़ेे इसका ध्यान रखना चाहिए. तत्पश्चात राष्ट्रीय बालरंग के आयोजन से संबंधित 5 बिंदुओं पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का कार्य कार्यशाला में करवाया गया. कार्यशाला का संचालन करते हुए सहायक राजभाषा अधिकारी राजेंद्र झारिया कहा कि व्यापार और सूचना तंत्र के विकास के साथ मौजूदा दौर में रचनात्मक लेखकों की माँग में भी तेजी आई है.साथ ही रचनात्मक लेखकों की फिल्मों, टेली सीरियल्स, विज्ञापनों में बहुत माँग है. इस क्षेत्र में करियर के विकल्प खुले हुए हैं.


Opinions expressed in the comments are not reflective of Nava Bharat. Comments are moderated automatically.

Related Posts