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संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने कहा है कि करीब तीन वर्ष से युद्धग्रस्त यमन में लगभग हर बच्चे को जीवित रहने के लिए मानवीय सहायता की जरूरत है। यमन में यूनिसेफ संचालन की प्रमुख मेरित्जेल रेलानो ने बताया कि देश में बच्चों की एक पूरी पीढ़ी केवल हिंसा के बारे में जानकर बड़ी हो रही है।बुनियादी सेवाओं के ध्वस्त हो जाने के कारण कुपोषण और रोग तेजी से बढ़ रहे हैं।इन परिस्थितियों में जो जीवित बच जा रहे हैं, उनके शारीरिक और मानसिक जख्मों के साथ अपना जीवन काटने की आशंका है। पहले से ही गरीब देशों में शामिल रहा यमन मार्च 2015 में राष्ट्रपति अब्दरब्बुह मंसूर हादी के वफादार सुरक्षा बलों और हाउती विद्रोहियों के बीच युद्ध छिड़ने के बाद हिंसा में वृद्धि के कारण मानवीय संकट के कगार पर पहुंच गया है। देश के बड़े हिस्से में अस्पताल, चिकित्सा सुविधाएं, पानी और स्वच्छता व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गयी है तथा देश की कुल आबादी का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा मानवीय सहायता पर निर्भर है। यमन की स्थिति का सबसे बुरा असर इन तीन वर्ष के दौरान पैदा हुए 30 लाख बच्चों पर पड़ा है।यूनिसेफ की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से 30 प्रतिशत बच्चे समय से पहले पैदा हुए हैं, शेष 30 फीसदी का वजन जन्म के समय सामान्य से कम था और 25 हजार बच्चों ने जन्म के समय अथवा उसके एक महीने के भीतर दम तोड़ दिया। देश में 18 लाख बच्चे अति कुपोषित हैं जिनमें से लगभग चार लाख बच्चे गंभीर रूप से अति कुपोषित और मौत के कगार पर हैं।"/> संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने कहा है कि करीब तीन वर्ष से युद्धग्रस्त यमन में लगभग हर बच्चे को जीवित रहने के लिए मानवीय सहायता की जरूरत है। यमन में यूनिसेफ संचालन की प्रमुख मेरित्जेल रेलानो ने बताया कि देश में बच्चों की एक पूरी पीढ़ी केवल हिंसा के बारे में जानकर बड़ी हो रही है।बुनियादी सेवाओं के ध्वस्त हो जाने के कारण कुपोषण और रोग तेजी से बढ़ रहे हैं।इन परिस्थितियों में जो जीवित बच जा रहे हैं, उनके शारीरिक और मानसिक जख्मों के साथ अपना जीवन काटने की आशंका है। पहले से ही गरीब देशों में शामिल रहा यमन मार्च 2015 में राष्ट्रपति अब्दरब्बुह मंसूर हादी के वफादार सुरक्षा बलों और हाउती विद्रोहियों के बीच युद्ध छिड़ने के बाद हिंसा में वृद्धि के कारण मानवीय संकट के कगार पर पहुंच गया है। देश के बड़े हिस्से में अस्पताल, चिकित्सा सुविधाएं, पानी और स्वच्छता व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गयी है तथा देश की कुल आबादी का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा मानवीय सहायता पर निर्भर है। यमन की स्थिति का सबसे बुरा असर इन तीन वर्ष के दौरान पैदा हुए 30 लाख बच्चों पर पड़ा है।यूनिसेफ की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से 30 प्रतिशत बच्चे समय से पहले पैदा हुए हैं, शेष 30 फीसदी का वजन जन्म के समय सामान्य से कम था और 25 हजार बच्चों ने जन्म के समय अथवा उसके एक महीने के भीतर दम तोड़ दिया। देश में 18 लाख बच्चे अति कुपोषित हैं जिनमें से लगभग चार लाख बच्चे गंभीर रूप से अति कुपोषित और मौत के कगार पर हैं।"/> संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने कहा है कि करीब तीन वर्ष से युद्धग्रस्त यमन में लगभग हर बच्चे को जीवित रहने के लिए मानवीय सहायता की जरूरत है। यमन में यूनिसेफ संचालन की प्रमुख मेरित्जेल रेलानो ने बताया कि देश में बच्चों की एक पूरी पीढ़ी केवल हिंसा के बारे में जानकर बड़ी हो रही है।बुनियादी सेवाओं के ध्वस्त हो जाने के कारण कुपोषण और रोग तेजी से बढ़ रहे हैं।इन परिस्थितियों में जो जीवित बच जा रहे हैं, उनके शारीरिक और मानसिक जख्मों के साथ अपना जीवन काटने की आशंका है। पहले से ही गरीब देशों में शामिल रहा यमन मार्च 2015 में राष्ट्रपति अब्दरब्बुह मंसूर हादी के वफादार सुरक्षा बलों और हाउती विद्रोहियों के बीच युद्ध छिड़ने के बाद हिंसा में वृद्धि के कारण मानवीय संकट के कगार पर पहुंच गया है। देश के बड़े हिस्से में अस्पताल, चिकित्सा सुविधाएं, पानी और स्वच्छता व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गयी है तथा देश की कुल आबादी का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा मानवीय सहायता पर निर्भर है। यमन की स्थिति का सबसे बुरा असर इन तीन वर्ष के दौरान पैदा हुए 30 लाख बच्चों पर पड़ा है।यूनिसेफ की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से 30 प्रतिशत बच्चे समय से पहले पैदा हुए हैं, शेष 30 फीसदी का वजन जन्म के समय सामान्य से कम था और 25 हजार बच्चों ने जन्म के समय अथवा उसके एक महीने के भीतर दम तोड़ दिया। देश में 18 लाख बच्चे अति कुपोषित हैं जिनमें से लगभग चार लाख बच्चे गंभीर रूप से अति कुपोषित और मौत के कगार पर हैं।">

यमन में हर बच्चे को मदद की जरूरत: यूनिसेफ

2018/01/17



संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) ने कहा है कि करीब तीन वर्ष से युद्धग्रस्त यमन में लगभग हर बच्चे को जीवित रहने के लिए मानवीय सहायता की जरूरत है। यमन में यूनिसेफ संचालन की प्रमुख मेरित्जेल रेलानो ने बताया कि देश में बच्चों की एक पूरी पीढ़ी केवल हिंसा के बारे में जानकर बड़ी हो रही है।बुनियादी सेवाओं के ध्वस्त हो जाने के कारण कुपोषण और रोग तेजी से बढ़ रहे हैं।इन परिस्थितियों में जो जीवित बच जा रहे हैं, उनके शारीरिक और मानसिक जख्मों के साथ अपना जीवन काटने की आशंका है। पहले से ही गरीब देशों में शामिल रहा यमन मार्च 2015 में राष्ट्रपति अब्दरब्बुह मंसूर हादी के वफादार सुरक्षा बलों और हाउती विद्रोहियों के बीच युद्ध छिड़ने के बाद हिंसा में वृद्धि के कारण मानवीय संकट के कगार पर पहुंच गया है। देश के बड़े हिस्से में अस्पताल, चिकित्सा सुविधाएं, पानी और स्वच्छता व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गयी है तथा देश की कुल आबादी का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा मानवीय सहायता पर निर्भर है। यमन की स्थिति का सबसे बुरा असर इन तीन वर्ष के दौरान पैदा हुए 30 लाख बच्चों पर पड़ा है।यूनिसेफ की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से 30 प्रतिशत बच्चे समय से पहले पैदा हुए हैं, शेष 30 फीसदी का वजन जन्म के समय सामान्य से कम था और 25 हजार बच्चों ने जन्म के समय अथवा उसके एक महीने के भीतर दम तोड़ दिया। देश में 18 लाख बच्चे अति कुपोषित हैं जिनमें से लगभग चार लाख बच्चे गंभीर रूप से अति कुपोषित और मौत के कगार पर हैं।


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