Breaking News :

अस्ताना,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद को मानवाधिकारों का सबसे बड़ा दुश्मन करार देते हुए आज शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्यों से इस पर लगाम लगाने के लिए संयुक्त प्रयास करने का अनुरोध किया। श्री मोदी ने यहां एससीओ शिखर सम्मेलन में कहा कि आतंकवादी संगठनों को वित्तीय मदद देने का मसला हो या आतंकवादियों को प्रशिक्षित करने का, केवल एससीओ सदस्यों के समन्वित प्रयासों से ही कोई सकारात्मक परिणाम निकल सकेगा। उन्होंने कहा,“ संगठन के समक्ष आतंकवाद, कट्टरपंथ और चरमपंथ से लड़ने की सबसे बड़ी चुनौती है। ” प्रधानमंत्री ने उम्मीद जतायी कि भारत और एससीओ के बीच सहयोग से आतंकवाद के विरूद्ध लड़ाई को एक नयी गति मिलेगी। इससे पहले श्री मोदी ने एससीओ में प्रवेश के लिए भारत को सहयोग करने के वास्ते चीन के नेतृत्व काे धन्यवाद दिया। चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान एससीओ के संस्थापक सदस्य हैं। भारत संगठन का 2005 से पर्यवेक्षक रहा है। अस्ताना शिखर सम्मेलन के बाद चीन एससीओ की अध्यक्षता करेगा और अगले वर्ष के शिखर सम्मेलन का आयोजन भी करेगा।"/> अस्ताना,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद को मानवाधिकारों का सबसे बड़ा दुश्मन करार देते हुए आज शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्यों से इस पर लगाम लगाने के लिए संयुक्त प्रयास करने का अनुरोध किया। श्री मोदी ने यहां एससीओ शिखर सम्मेलन में कहा कि आतंकवादी संगठनों को वित्तीय मदद देने का मसला हो या आतंकवादियों को प्रशिक्षित करने का, केवल एससीओ सदस्यों के समन्वित प्रयासों से ही कोई सकारात्मक परिणाम निकल सकेगा। उन्होंने कहा,“ संगठन के समक्ष आतंकवाद, कट्टरपंथ और चरमपंथ से लड़ने की सबसे बड़ी चुनौती है। ” प्रधानमंत्री ने उम्मीद जतायी कि भारत और एससीओ के बीच सहयोग से आतंकवाद के विरूद्ध लड़ाई को एक नयी गति मिलेगी। इससे पहले श्री मोदी ने एससीओ में प्रवेश के लिए भारत को सहयोग करने के वास्ते चीन के नेतृत्व काे धन्यवाद दिया। चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान एससीओ के संस्थापक सदस्य हैं। भारत संगठन का 2005 से पर्यवेक्षक रहा है। अस्ताना शिखर सम्मेलन के बाद चीन एससीओ की अध्यक्षता करेगा और अगले वर्ष के शिखर सम्मेलन का आयोजन भी करेगा।"/> अस्ताना,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद को मानवाधिकारों का सबसे बड़ा दुश्मन करार देते हुए आज शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्यों से इस पर लगाम लगाने के लिए संयुक्त प्रयास करने का अनुरोध किया। श्री मोदी ने यहां एससीओ शिखर सम्मेलन में कहा कि आतंकवादी संगठनों को वित्तीय मदद देने का मसला हो या आतंकवादियों को प्रशिक्षित करने का, केवल एससीओ सदस्यों के समन्वित प्रयासों से ही कोई सकारात्मक परिणाम निकल सकेगा। उन्होंने कहा,“ संगठन के समक्ष आतंकवाद, कट्टरपंथ और चरमपंथ से लड़ने की सबसे बड़ी चुनौती है। ” प्रधानमंत्री ने उम्मीद जतायी कि भारत और एससीओ के बीच सहयोग से आतंकवाद के विरूद्ध लड़ाई को एक नयी गति मिलेगी। इससे पहले श्री मोदी ने एससीओ में प्रवेश के लिए भारत को सहयोग करने के वास्ते चीन के नेतृत्व काे धन्यवाद दिया। चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान एससीओ के संस्थापक सदस्य हैं। भारत संगठन का 2005 से पर्यवेक्षक रहा है। अस्ताना शिखर सम्मेलन के बाद चीन एससीओ की अध्यक्षता करेगा और अगले वर्ष के शिखर सम्मेलन का आयोजन भी करेगा।">

मोदी की एससीओ सदस्यों से आतंकवाद समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई की अपील

2017/06/09



अस्ताना,  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद को मानवाधिकारों का सबसे बड़ा दुश्मन करार देते हुए आज शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्यों से इस पर लगाम लगाने के लिए संयुक्त प्रयास करने का अनुरोध किया। श्री मोदी ने यहां एससीओ शिखर सम्मेलन में कहा कि आतंकवादी संगठनों को वित्तीय मदद देने का मसला हो या आतंकवादियों को प्रशिक्षित करने का, केवल एससीओ सदस्यों के समन्वित प्रयासों से ही कोई सकारात्मक परिणाम निकल सकेगा। उन्होंने कहा,“ संगठन के समक्ष आतंकवाद, कट्टरपंथ और चरमपंथ से लड़ने की सबसे बड़ी चुनौती है। ” प्रधानमंत्री ने उम्मीद जतायी कि भारत और एससीओ के बीच सहयोग से आतंकवाद के विरूद्ध लड़ाई को एक नयी गति मिलेगी। इससे पहले श्री मोदी ने एससीओ में प्रवेश के लिए भारत को सहयोग करने के वास्ते चीन के नेतृत्व काे धन्यवाद दिया। चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान एससीओ के संस्थापक सदस्य हैं। भारत संगठन का 2005 से पर्यवेक्षक रहा है। अस्ताना शिखर सम्मेलन के बाद चीन एससीओ की अध्यक्षता करेगा और अगले वर्ष के शिखर सम्मेलन का आयोजन भी करेगा।


Opinions expressed in the comments are not reflective of Nava Bharat. Comments are moderated automatically.

Related Posts