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मेले की फीकी चमक पर भारी पड़ी आस्था

2017/11/27



ऐतिहासिक पल के हजारों विदेशी बौद्ध अनुयायी बने साक्षी

  • सारिपुत्र और महामोदग्लयान के अस्थि अवशेषों के दर्शन के लिए लालायित दिखे बौद्ध अनुयायी,
  • अस्थि अवशेषों के कलश यात्रा के दौरान बौद्ध भिक्षुओं ने लगाए जयघोष,
  • सांची में आस्था के कुंभ में बौद्ध अनुयायियों का उमड़ा जनसैलाब
रायसेन, सांची बोधि महोत्सव के दूसरे दिन आस्था के कुंभ में बौद्ध अनुयायियों का सैलाब उमड़ पड़ा। रविवार को जब भगवान बुद्ध के परम शिष्यों के अस्थि अवशेषों के कलश परिक्रमा के लिए निकले तो लोग दर्शन के लिए लालायित नजर आए। देश, विदेश से आए हजारों बौद्ध धर्मावलंबी रविवार को इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए आतुर थे। जब अस्थि कलश यात्रा में शामिल जन समुदाय मंदिर से स्तूप क्रमांक 1 की परिक्रमा कर रहा था तो उस दौरान उनका भक्ति भाव धर्म के प्रति उनकी आस्था और समर्पण को परिलक्षित कर रहा था। अस्थि अवशेषों की कलश यात्रा के दौरान बौद्ध धर्म की प्राचीन परंपरा के अनुरूप हुए नृत्य और विविध धार्मिक क्रियाओं ने आयोजन को और गरिमामयी बना दिया। रंपरा से बढ़ा कलश यात्रा का गौरव अस्थि अवशेषों की कलश यात्रा के दौरान बौद्ध धर्म की प्राचीन परंपरा के अनुरूप हुए नृत्य और विविध धार्मिक क्रियाओं ने आयोजन को और गरिमामयी बना दिया। कलश यात्रा में बौद्ध भिक्षु जहां कलश यात्रा का नेतृत्व कर रहे थे तो वहीं चीन, जापान, थाईलैंड और भूटान समेत विभिन्न देशों के बौद्ध अनुयायियों का जत्था अस्थि कलश यात्रा में अपने देश की संस्कृति और परंपरा को निभाते हुए चल रहे थे। पालकी में निकलीं बुद्ध के शिष्यों की प्रतिमाएं इस बार मेले का मुख्य आकर्षण सारिपुत्र और महामोदग्लयान की पालकी यात्रा भी रही। अस्थि कलश यात्रा में भगवान बुद्ध के परम शिष्यों को विशेष फूलों से सुसज्जित पालकी में लेकर चल रहे विदेशी बौद्ध अनुयायी आकर्षण का केन्द्र बने हुए थे। बुद्धम् शरणम् गच्छामि के जयघोषों के बीच बौद्ध धर्मावलंबी भक्ति और साधना में लीन नजर आए। कलश यात्रा मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर स्तूप की परिक्रमा लगाने के बाद वापिस मंदिर पहुंची। यहां अस्थि अवशेष कलश सार्वजनिक दर्शनार्थ रखे गए। इस दौरान लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। साधु-साधु से गूंजी सांची अस्थि कलश सिर पर रखकर बौद्ध संत सबसे आगे चल रहे थे। इस दौरान श्रीलंका से आया एक बैंड दल भी साथ था। जैसे ही सभी बौद्ध भिक्षु अस्थि कलश यात्रा के साथ स्तूप क्रमांक 1 की परिक्रमा के लिए पहुंचे तो सारा परिसर साधु-साधु के स्वरों से गूंज उठा। इस अवसर पर यहां-वहां घूम रहे लोग अस्थि कलश के दर्शनों के लिए कतारबद्ध तरीके से खड़े हो गए थे। कलश यात्रा परिक्रमा उपरांत वापिस चैत्यगिरी विहार पहुंची और यहां ससम्मान अस्थि कलश को मंदिर में लोगों के दर्शनार्थ रख दिया गया।


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