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अस्ताना,  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलकात करके द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात कजाखस्तान की राजधानी अस्ताना में शंघाई शिखर सम्मेलन (एससीओ) से इतर हुयी। श्री मोदी ने इस मुलाकात के दौरान एससीओ में भारत की सदस्यता के समर्थन के लिए चीन का धन्यवाद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों को लेकर हमारे देश की जनता विशेष रूप से युवा वर्ग भविष्य के प्रति आशावादी सोच रखते हैं। भारत के चीन में आयोजित वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर)सम्मेलन का बहिष्कार करने के बाद श्री मोदी और श्री जिनपिंग की बैठक हुई है। दोनों नेताओं ने बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत के परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी)की सदस्यता पर भी चीन से गंभीर मतभेद हैं। भारत ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा पर चिंता जताते हुए ओबीओआर बैठक का बहिष्कार किया था। एससीओ के संस्थापक सदस्यों में चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, तजकिस्तान तथा उज्बेकिस्तान हैं। भारत वर्ष 2005 से एससीओ में पर्यवेक्षक रहा है। अस्ताना शिखर सम्मेलन के बाद चीन इसकी अध्यक्षता प्राप्त करेगा तथा अगले साल वह अपने देश में इसका आयोजन करेगा। प्रधानमंत्री ने बाद में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिरजियोयेव से बातचीत की। श्री मोदी ने कल कजाकिस्तान के राष्ट्रपति नूरसुल्तान नजरबाऐव से मुलाकात में दोनों देशों के आपसी संबंधों को मजबूत करने पर बातचीत की।"/> अस्ताना,  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलकात करके द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात कजाखस्तान की राजधानी अस्ताना में शंघाई शिखर सम्मेलन (एससीओ) से इतर हुयी। श्री मोदी ने इस मुलाकात के दौरान एससीओ में भारत की सदस्यता के समर्थन के लिए चीन का धन्यवाद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों को लेकर हमारे देश की जनता विशेष रूप से युवा वर्ग भविष्य के प्रति आशावादी सोच रखते हैं। भारत के चीन में आयोजित वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर)सम्मेलन का बहिष्कार करने के बाद श्री मोदी और श्री जिनपिंग की बैठक हुई है। दोनों नेताओं ने बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत के परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी)की सदस्यता पर भी चीन से गंभीर मतभेद हैं। भारत ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा पर चिंता जताते हुए ओबीओआर बैठक का बहिष्कार किया था। एससीओ के संस्थापक सदस्यों में चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, तजकिस्तान तथा उज्बेकिस्तान हैं। भारत वर्ष 2005 से एससीओ में पर्यवेक्षक रहा है। अस्ताना शिखर सम्मेलन के बाद चीन इसकी अध्यक्षता प्राप्त करेगा तथा अगले साल वह अपने देश में इसका आयोजन करेगा। प्रधानमंत्री ने बाद में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिरजियोयेव से बातचीत की। श्री मोदी ने कल कजाकिस्तान के राष्ट्रपति नूरसुल्तान नजरबाऐव से मुलाकात में दोनों देशों के आपसी संबंधों को मजबूत करने पर बातचीत की।"/> अस्ताना,  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलकात करके द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात कजाखस्तान की राजधानी अस्ताना में शंघाई शिखर सम्मेलन (एससीओ) से इतर हुयी। श्री मोदी ने इस मुलाकात के दौरान एससीओ में भारत की सदस्यता के समर्थन के लिए चीन का धन्यवाद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों को लेकर हमारे देश की जनता विशेष रूप से युवा वर्ग भविष्य के प्रति आशावादी सोच रखते हैं। भारत के चीन में आयोजित वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर)सम्मेलन का बहिष्कार करने के बाद श्री मोदी और श्री जिनपिंग की बैठक हुई है। दोनों नेताओं ने बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत के परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी)की सदस्यता पर भी चीन से गंभीर मतभेद हैं। भारत ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा पर चिंता जताते हुए ओबीओआर बैठक का बहिष्कार किया था। एससीओ के संस्थापक सदस्यों में चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, तजकिस्तान तथा उज्बेकिस्तान हैं। भारत वर्ष 2005 से एससीओ में पर्यवेक्षक रहा है। अस्ताना शिखर सम्मेलन के बाद चीन इसकी अध्यक्षता प्राप्त करेगा तथा अगले साल वह अपने देश में इसका आयोजन करेगा। प्रधानमंत्री ने बाद में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिरजियोयेव से बातचीत की। श्री मोदी ने कल कजाकिस्तान के राष्ट्रपति नूरसुल्तान नजरबाऐव से मुलाकात में दोनों देशों के आपसी संबंधों को मजबूत करने पर बातचीत की।">

माेदी ने जिनपिंग से द्विपक्षीय मुद्दों पर की बातचीत

2017/06/09



अस्ताना,  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलकात करके द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत की। दोनों नेताओं की यह मुलाकात कजाखस्तान की राजधानी अस्ताना में शंघाई शिखर सम्मेलन (एससीओ) से इतर हुयी। श्री मोदी ने इस मुलाकात के दौरान एससीओ में भारत की सदस्यता के समर्थन के लिए चीन का धन्यवाद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों को लेकर हमारे देश की जनता विशेष रूप से युवा वर्ग भविष्य के प्रति आशावादी सोच रखते हैं। भारत के चीन में आयोजित वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर)सम्मेलन का बहिष्कार करने के बाद श्री मोदी और श्री जिनपिंग की बैठक हुई है। दोनों नेताओं ने बैठक में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत के परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी)की सदस्यता पर भी चीन से गंभीर मतभेद हैं। भारत ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा पर चिंता जताते हुए ओबीओआर बैठक का बहिष्कार किया था। एससीओ के संस्थापक सदस्यों में चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, तजकिस्तान तथा उज्बेकिस्तान हैं। भारत वर्ष 2005 से एससीओ में पर्यवेक्षक रहा है। अस्ताना शिखर सम्मेलन के बाद चीन इसकी अध्यक्षता प्राप्त करेगा तथा अगले साल वह अपने देश में इसका आयोजन करेगा। प्रधानमंत्री ने बाद में उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिरजियोयेव से बातचीत की। श्री मोदी ने कल कजाकिस्तान के राष्ट्रपति नूरसुल्तान नजरबाऐव से मुलाकात में दोनों देशों के आपसी संबंधों को मजबूत करने पर बातचीत की।


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