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मानवाधिकार हनन को नहीं रोक पा रहा है आयोग

2017/12/11



लंबित हैं हजारों प्रकरण भोपाल, मानवाधिकार हनन के निराकरण के लिए राजधानी के मप्र मानव अधिकार आयोग में हजारों प्रकरण लंबित हैं. जिससे यहां दर्ज शिकायतों का निपटारा न होने से कई पीडि़त परेशान हो रहे हैं. 10 दिसम्बर को मानव अधिकार दिवस मनाया जाता है, लेकिन मानव अधिकार आयोग में प्रकरण का निपटारा न होने से कई पीडि़ताओं के अधिकारों का हनन हो रहा है. ऐसे में महिलाएं, बच्चे एवं समाज के सभी अधिकारों की रक्षा के लिए गठित आयोग मप्र में सिर्फ नाम के रह गए हैं. यही कारण है कि राज्य महिला आयोग, बाल अधिकार संरक्षण आयोग या राज्य मानव अधिकार आयोग पीडि़तों को न्याय नहीं दिला रहे हैं. ये तीनों प्रमुख आयोग सिर्फ अनुशंसा एवं नोटिस जारी करने तक सीमित हो गए हैं. जिन्हें न तो शासन गंभीरता से ले रही है और न ही अधिकारी इनकी सुन रहे हैं. ऐसे में इन तीनों आयोग में पीडि़ताएं अपना दर्द सुना-सुनाकर थक गई हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का कोई निराकरण नहीं हो पा रहा है. छह साल से अध्यक्ष का पद खाली मप्र मानव अधिकार आयोग में 6 साल से अध्यक्ष का पद खाली होने से कई मामले लंबित हैं. छह साल में लगभग 7 हजार मामले पेंडिंग हैं. कार्यकारी अध्यक्ष के सहारे काम चल रहा है, जिसके चलते मामलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. लंबित मामलों की संख्या में मप्र चौथे स्थान पर आ गया है. प्रदेश में मानव अधिकार हनन से जुड़े मामलों पर संज्ञान लेकर संबंधितों को नोटिस जारी करने का काम अच्छी तरह से होता है. लेकिन आयोग के नोटिसों का जवाब संबंधित अधिकारी और सरकारी विभाग समय से नहीं देते हैं. बार-बार नोटिस जारी करने के बाद भी जवाब नहीं दिया जाता है. जिसकी वजह से सरकार भी आयोग की अनुशंसाओं पर अमल नहीं करती है. राज्य सरकार भी मानव अधिकार आयोग को मजबूत बनाने के पक्ष में नहीं है, यही कारण है कि सालों से आयोग को अध्यक्ष नहीं मिला है.  


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