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हड़ताल के कारण प्राइवेट अस्पतालों में बंद पड़ी ओपीडी.                         जेपी अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की भीड़.                         

डॉक्टर्स ने किया राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग बिल का विरोध

नवभारत न्यूजभोपाल, 2 जनवरी. सरकार मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को खत्म करके राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग बिल ला रही है, जिसके विरोध में राजधानी में भी चिकित्सकों ने काली पट्टी बांधकर ब्लैक डे मनाया और 12 घंटे के लिये रूटीन ओपीडी बंद रखी गई. हालांकि इमरजेंसी सेवाएं चालू रहीं. ज्ञात हो कि आईएमए दिल्ली द्वारा निर्देशित चिकित्सकों द्वारा किये जा रहे देशव्यापी विरोध के चलते सिर्फ गंभीर मरीजों का इलाज जारी रखा गया. इस अधिनियम के प्रस्ताव के विरोध में आईएमए भोपाल के सदस्यों एवं कार्यकारी परिषद की बैठक रखी गई. इस बैठक में उपस्थित सभी डॉक्टर्स ने एक स्वर में इस अधिनियम पर पुनर्विचार करने की अपील की. भोपाल में हुई इस बैठक में अध्यक्ष डॉ. राजीव गुप्ता, सचिव डॉ. अतुल गुप्ता, डॉ. संजय गुप्ता, डॉ. रणधीर ङ्क्षसह, डॉ. राकेश मालवीय, डॉ. अतुल्य सौरभ आदि का संबोधन हुआ.आईएमए का कहना है कि सरकार जो नया बिल ला रही है, इस बिल में अल्टरनेटिव मेडिसिन (होम्योपैथी, आयुर्वेद, यूनानी) की प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर्स के लिये एक ब्रिज कोर्स का प्रस्ताव है. इस कोर्स को करने के बाद ये डॉक्टर्स माडर्न मेडिसिन की प्रैक्टिस भी कर सकेंगे.इस बिल में ऐसे प्रावधान हैें जिससे आयुष डॉक्टर्स को भी माडर्न मेडिसिन प्रैक्टिस करने की परमिशन मिल जायेगी. जबकि इसके लिये कम से कम एमबीबीएस क्वालीफिकेशन होनी चाहिये. इससे नीम/हकीमी करने वाले भी डॉक्टर बन जायेंगे. इस बिल में प्रायवेट कॉलेजों को मनमाने तरीके से फीस वसूलने की भी छूट दी गई है.इस बिल के अनुसार एमबीबीएस डिग्री वाले डॉक्टरों को अपनी काबलियत दोबारा से साबित करनी होगी. उन्हें एक और एग्जाम देना होगा जिसमें पास होने पर ही वो प्रैक्टिस कर पायेंगे. जुर्माना 5 करोड़ से लेकर 100 करोड़ रुपये तक का होगा. सवाल यह कि जुर्माने में इतना बड़ा अंतर क्यों है. इससे मेम्बर पक्षपातपूर्ण रवैया अपना सकते हैं."/> हड़ताल के कारण प्राइवेट अस्पतालों में बंद पड़ी ओपीडी.                         जेपी अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की भीड़.                         

डॉक्टर्स ने किया राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग बिल का विरोध

नवभारत न्यूजभोपाल, 2 जनवरी. सरकार मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को खत्म करके राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग बिल ला रही है, जिसके विरोध में राजधानी में भी चिकित्सकों ने काली पट्टी बांधकर ब्लैक डे मनाया और 12 घंटे के लिये रूटीन ओपीडी बंद रखी गई. हालांकि इमरजेंसी सेवाएं चालू रहीं. ज्ञात हो कि आईएमए दिल्ली द्वारा निर्देशित चिकित्सकों द्वारा किये जा रहे देशव्यापी विरोध के चलते सिर्फ गंभीर मरीजों का इलाज जारी रखा गया. इस अधिनियम के प्रस्ताव के विरोध में आईएमए भोपाल के सदस्यों एवं कार्यकारी परिषद की बैठक रखी गई. इस बैठक में उपस्थित सभी डॉक्टर्स ने एक स्वर में इस अधिनियम पर पुनर्विचार करने की अपील की. भोपाल में हुई इस बैठक में अध्यक्ष डॉ. राजीव गुप्ता, सचिव डॉ. अतुल गुप्ता, डॉ. संजय गुप्ता, डॉ. रणधीर ङ्क्षसह, डॉ. राकेश मालवीय, डॉ. अतुल्य सौरभ आदि का संबोधन हुआ.आईएमए का कहना है कि सरकार जो नया बिल ला रही है, इस बिल में अल्टरनेटिव मेडिसिन (होम्योपैथी, आयुर्वेद, यूनानी) की प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर्स के लिये एक ब्रिज कोर्स का प्रस्ताव है. इस कोर्स को करने के बाद ये डॉक्टर्स माडर्न मेडिसिन की प्रैक्टिस भी कर सकेंगे.इस बिल में ऐसे प्रावधान हैें जिससे आयुष डॉक्टर्स को भी माडर्न मेडिसिन प्रैक्टिस करने की परमिशन मिल जायेगी. जबकि इसके लिये कम से कम एमबीबीएस क्वालीफिकेशन होनी चाहिये. इससे नीम/हकीमी करने वाले भी डॉक्टर बन जायेंगे. इस बिल में प्रायवेट कॉलेजों को मनमाने तरीके से फीस वसूलने की भी छूट दी गई है.इस बिल के अनुसार एमबीबीएस डिग्री वाले डॉक्टरों को अपनी काबलियत दोबारा से साबित करनी होगी. उन्हें एक और एग्जाम देना होगा जिसमें पास होने पर ही वो प्रैक्टिस कर पायेंगे. जुर्माना 5 करोड़ से लेकर 100 करोड़ रुपये तक का होगा. सवाल यह कि जुर्माने में इतना बड़ा अंतर क्यों है. इससे मेम्बर पक्षपातपूर्ण रवैया अपना सकते हैं."/> हड़ताल के कारण प्राइवेट अस्पतालों में बंद पड़ी ओपीडी.                         जेपी अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की भीड़.                         

डॉक्टर्स ने किया राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग बिल का विरोध

नवभारत न्यूजभोपाल, 2 जनवरी. सरकार मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को खत्म करके राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग बिल ला रही है, जिसके विरोध में राजधानी में भी चिकित्सकों ने काली पट्टी बांधकर ब्लैक डे मनाया और 12 घंटे के लिये रूटीन ओपीडी बंद रखी गई. हालांकि इमरजेंसी सेवाएं चालू रहीं. ज्ञात हो कि आईएमए दिल्ली द्वारा निर्देशित चिकित्सकों द्वारा किये जा रहे देशव्यापी विरोध के चलते सिर्फ गंभीर मरीजों का इलाज जारी रखा गया. इस अधिनियम के प्रस्ताव के विरोध में आईएमए भोपाल के सदस्यों एवं कार्यकारी परिषद की बैठक रखी गई. इस बैठक में उपस्थित सभी डॉक्टर्स ने एक स्वर में इस अधिनियम पर पुनर्विचार करने की अपील की. भोपाल में हुई इस बैठक में अध्यक्ष डॉ. राजीव गुप्ता, सचिव डॉ. अतुल गुप्ता, डॉ. संजय गुप्ता, डॉ. रणधीर ङ्क्षसह, डॉ. राकेश मालवीय, डॉ. अतुल्य सौरभ आदि का संबोधन हुआ.आईएमए का कहना है कि सरकार जो नया बिल ला रही है, इस बिल में अल्टरनेटिव मेडिसिन (होम्योपैथी, आयुर्वेद, यूनानी) की प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर्स के लिये एक ब्रिज कोर्स का प्रस्ताव है. इस कोर्स को करने के बाद ये डॉक्टर्स माडर्न मेडिसिन की प्रैक्टिस भी कर सकेंगे.इस बिल में ऐसे प्रावधान हैें जिससे आयुष डॉक्टर्स को भी माडर्न मेडिसिन प्रैक्टिस करने की परमिशन मिल जायेगी. जबकि इसके लिये कम से कम एमबीबीएस क्वालीफिकेशन होनी चाहिये. इससे नीम/हकीमी करने वाले भी डॉक्टर बन जायेंगे. इस बिल में प्रायवेट कॉलेजों को मनमाने तरीके से फीस वसूलने की भी छूट दी गई है.इस बिल के अनुसार एमबीबीएस डिग्री वाले डॉक्टरों को अपनी काबलियत दोबारा से साबित करनी होगी. उन्हें एक और एग्जाम देना होगा जिसमें पास होने पर ही वो प्रैक्टिस कर पायेंगे. जुर्माना 5 करोड़ से लेकर 100 करोड़ रुपये तक का होगा. सवाल यह कि जुर्माने में इतना बड़ा अंतर क्यों है. इससे मेम्बर पक्षपातपूर्ण रवैया अपना सकते हैं.">

मनाया गया ब्लैक डे, बंद रही रूटीन ओपीडी

2018/01/03



हड़ताल के कारण प्राइवेट अस्पतालों में बंद पड़ी ओपीडी.                         जेपी अस्पताल की ओपीडी में लगी मरीजों की भीड़.                         

डॉक्टर्स ने किया राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग बिल का विरोध

नवभारत न्यूजभोपाल, 2 जनवरी. सरकार मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को खत्म करके राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग बिल ला रही है, जिसके विरोध में राजधानी में भी चिकित्सकों ने काली पट्टी बांधकर ब्लैक डे मनाया और 12 घंटे के लिये रूटीन ओपीडी बंद रखी गई. हालांकि इमरजेंसी सेवाएं चालू रहीं. ज्ञात हो कि आईएमए दिल्ली द्वारा निर्देशित चिकित्सकों द्वारा किये जा रहे देशव्यापी विरोध के चलते सिर्फ गंभीर मरीजों का इलाज जारी रखा गया. इस अधिनियम के प्रस्ताव के विरोध में आईएमए भोपाल के सदस्यों एवं कार्यकारी परिषद की बैठक रखी गई. इस बैठक में उपस्थित सभी डॉक्टर्स ने एक स्वर में इस अधिनियम पर पुनर्विचार करने की अपील की. भोपाल में हुई इस बैठक में अध्यक्ष डॉ. राजीव गुप्ता, सचिव डॉ. अतुल गुप्ता, डॉ. संजय गुप्ता, डॉ. रणधीर ङ्क्षसह, डॉ. राकेश मालवीय, डॉ. अतुल्य सौरभ आदि का संबोधन हुआ.आईएमए का कहना है कि सरकार जो नया बिल ला रही है, इस बिल में अल्टरनेटिव मेडिसिन (होम्योपैथी, आयुर्वेद, यूनानी) की प्रैक्टिस करने वाले डॉक्टर्स के लिये एक ब्रिज कोर्स का प्रस्ताव है. इस कोर्स को करने के बाद ये डॉक्टर्स माडर्न मेडिसिन की प्रैक्टिस भी कर सकेंगे.इस बिल में ऐसे प्रावधान हैें जिससे आयुष डॉक्टर्स को भी माडर्न मेडिसिन प्रैक्टिस करने की परमिशन मिल जायेगी. जबकि इसके लिये कम से कम एमबीबीएस क्वालीफिकेशन होनी चाहिये. इससे नीम/हकीमी करने वाले भी डॉक्टर बन जायेंगे. इस बिल में प्रायवेट कॉलेजों को मनमाने तरीके से फीस वसूलने की भी छूट दी गई है.इस बिल के अनुसार एमबीबीएस डिग्री वाले डॉक्टरों को अपनी काबलियत दोबारा से साबित करनी होगी. उन्हें एक और एग्जाम देना होगा जिसमें पास होने पर ही वो प्रैक्टिस कर पायेंगे. जुर्माना 5 करोड़ से लेकर 100 करोड़ रुपये तक का होगा. सवाल यह कि जुर्माने में इतना बड़ा अंतर क्यों है. इससे मेम्बर पक्षपातपूर्ण रवैया अपना सकते हैं.


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