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भोपाल,  मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने 17 साल से पेंशन का ऐरियर और बढी हुई पेंशन नहीं मिलने के प्रकरण में पीड़ित पक्ष को 15 हजार की अंतरिम राहत दिलाई है। इस प्रकरण के हवाले से आयोग ने अनेकों महत्वपूर्ण अनुशंसाऐं की है जो पेंशनर्स को राहत प्रदान करने में कारगर साबित होंगी। आयोग द्वारा यहां जारी विज्ञप्ति के अनुसार शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय शहडोल से 31 जनवरी 1997 को प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त डाॅ.एम.ए.खान की पत्नी जमीला बेगम ने आयोग को आवेदन देकर बताया की उनके पति का 12 मार्च 1998 को देहावसान हो चुका है। मध्यप्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम के तहत वेतन निर्धारण नहीं किया गया जिसके चलते परिवार पेंशन पुनरीक्षित नहीं हो पाई है। आयोग ने इस मामले में पीड़िता को 15 हजार रूपये की अंतरिम राहत दिलाई है।"/> भोपाल,  मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने 17 साल से पेंशन का ऐरियर और बढी हुई पेंशन नहीं मिलने के प्रकरण में पीड़ित पक्ष को 15 हजार की अंतरिम राहत दिलाई है। इस प्रकरण के हवाले से आयोग ने अनेकों महत्वपूर्ण अनुशंसाऐं की है जो पेंशनर्स को राहत प्रदान करने में कारगर साबित होंगी। आयोग द्वारा यहां जारी विज्ञप्ति के अनुसार शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय शहडोल से 31 जनवरी 1997 को प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त डाॅ.एम.ए.खान की पत्नी जमीला बेगम ने आयोग को आवेदन देकर बताया की उनके पति का 12 मार्च 1998 को देहावसान हो चुका है। मध्यप्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम के तहत वेतन निर्धारण नहीं किया गया जिसके चलते परिवार पेंशन पुनरीक्षित नहीं हो पाई है। आयोग ने इस मामले में पीड़िता को 15 हजार रूपये की अंतरिम राहत दिलाई है।"/> भोपाल,  मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने 17 साल से पेंशन का ऐरियर और बढी हुई पेंशन नहीं मिलने के प्रकरण में पीड़ित पक्ष को 15 हजार की अंतरिम राहत दिलाई है। इस प्रकरण के हवाले से आयोग ने अनेकों महत्वपूर्ण अनुशंसाऐं की है जो पेंशनर्स को राहत प्रदान करने में कारगर साबित होंगी। आयोग द्वारा यहां जारी विज्ञप्ति के अनुसार शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय शहडोल से 31 जनवरी 1997 को प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त डाॅ.एम.ए.खान की पत्नी जमीला बेगम ने आयोग को आवेदन देकर बताया की उनके पति का 12 मार्च 1998 को देहावसान हो चुका है। मध्यप्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम के तहत वेतन निर्धारण नहीं किया गया जिसके चलते परिवार पेंशन पुनरीक्षित नहीं हो पाई है। आयोग ने इस मामले में पीड़िता को 15 हजार रूपये की अंतरिम राहत दिलाई है।">

मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने पीड़ित पक्ष को राहत दिलाई

2017/01/17



भोपाल,  मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने 17 साल से पेंशन का ऐरियर और बढी हुई पेंशन नहीं मिलने के प्रकरण में पीड़ित पक्ष को 15 हजार की अंतरिम राहत दिलाई है। इस प्रकरण के हवाले से आयोग ने अनेकों महत्वपूर्ण अनुशंसाऐं की है जो पेंशनर्स को राहत प्रदान करने में कारगर साबित होंगी। आयोग द्वारा यहां जारी विज्ञप्ति के अनुसार शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय शहडोल से 31 जनवरी 1997 को प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त डाॅ.एम.ए.खान की पत्नी जमीला बेगम ने आयोग को आवेदन देकर बताया की उनके पति का 12 मार्च 1998 को देहावसान हो चुका है। मध्यप्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम के तहत वेतन निर्धारण नहीं किया गया जिसके चलते परिवार पेंशन पुनरीक्षित नहीं हो पाई है। आयोग ने इस मामले में पीड़िता को 15 हजार रूपये की अंतरिम राहत दिलाई है।


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