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भ्रष्टाचार का स्तर

2018/02/24



एक अंतराष्ट्रीय संस्था ‘ट्रन्सपेरेन्सी इन्टरनेशनल’ ने राष्ट्रोंमें भ्रष्टाचार का आंकलन और अध्ययन कर उस सूची में भारत को भ्रष्टाचार वाले राष्ट्रोंमें 81वें स्थान पर रखा. सन् 2016 में भारत को 79 स्थान पर रखा गया था. इस हिसाब से भारत में 2 अंकों से ऊपर से भ्रष्टाचार बढ़ा हैं. इस संस्था ने 180 देशों को इस सूची में रखा है. इसमें चीन की स्थिति भी लगभग भारत के समान ही है. इसे 77वें स्थान पर रखा गया है जबकि पाकिस्तान 117वें स्थान पर है. सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार आफ्रीकी देश सोमालिया में पाया गया है जो 180 देशों में 180वें स्थान पर है. इसके बाद दक्षिण सूडान, सीरिया और अफगानिस्तान में पाया गया. सबसे कम न्यूजीलैंजड जो पहले (1) नंबर पर है दूसरे नंबर पर डेनमार्क, तीसरे नंबर पर फिनलैंड और चौथे नंबर पर नार्वे हैं. ऐसे अध्ययन बिल्कुल सटीक तो नहीं माने जा सकते लेकिन सामान्य जानकारी का जरिया हो सकते हैं. यह 1995 से शुरू किया गया है और इसमें भ्रष्टाचार का आंकलन विश्लेषकों, कारोबारियों के अनुभवों पर आधारित है. भ्रष्टाचार नापने का कोई वैज्ञानिक या तकनीकी आधार हो भी नहीं सकता है. इस रिपोर्ट से यह तो जाहिर हो ही जाता है कि भ्रष्टाचार लगभग सभी देशों में है. स्थिति का निर्धारण कम या ज्यादा होना अनुमानों व अटकलों पर ही रहेगा. भारत में इसे किसी पार्टी की सरकार की क्षमता और अक्षमता से नहीं देखा जा सकता है. जहां तक भ्रष्टाचार का सवाल व राजनेताओं और राजनैतिक क्षेत्र में उच्च स्तर के उद्योग व्यापार, बैंकों और सरकारी नौकरियों, ग्रामीण स्तर तक मनरेगा और पंचायतों तक व्याप्त है. इस समय तीन भूतपूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा के ओमप्रकाश चौटाला और बिहार के लालू यादव व जगन्नाथ मिश्र भ्रष्टाचार के लिये जेलों में बैठे हैं. कई मुख्यमंत्रियों जयललिता, मुलायम सिंह, वीरभद्र सिंह, मायावती आदि पर आय से अधिक धन संपत्ति बटोरने के मामले चल रहे हैं. पार्टियों ने अपने कई भ्रष्टï मंत्रियों के भ्रष्टाचार के आरोप के चलते पदों से हटाया था. मध्यप्रदेश में भाजपा नेता वीरेंद्र कुमार सखलेचा हटाये गये थे. अनेकों मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं. बैंकों में बैंक अधिकारियों व उद्योगपतियों के मिले जुले या संयुक्त भ्रष्टाचार अभी सामने आ ही चुके हैं. यहां सबसे छोटे स्तर पर पंचायतों में सरपंच और पंचायत सचिवों के सरकारी फंड की हेराफेरी के मामले आये दिन सामने आये हैं. ग्रामीण स्तर की और दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार योजना मानी जा रही मनरेगा में स्थानीय स्तर का काम लेने वाले अधिकारी फर्जी नामों के जाब कार्ड बना लेता है. उत्तर प्रदेश के रायबरेली के एक गांव में मनरेगा के तहत एक तालाब खोदा गया बताया गया जबकि वह तालाब वहां पता नहीं कब से मौजूद था. किसी सरकार ने भ्रष्टाचारबढ़ाया या किसी ने घटाया है- यह केवल कहने पर के आरोप व दावे है. भ्रष्टाचार सर्वव्यापी है. कई भ्रष्टाचार लाभ पाने के लिये हो रहा है तो कही भ्रष्टाचार लोगों की मजबूरी होता है. सरकारों में उच्च स्तर पर और बैंकों में कसी व्यवस्थाएं रहती है फिर भी भ्रष्टाचार हो ही रहा है. क्या किया जाए- कैसी व्यवस्था की जाए कि भ्रष्टाचार समाप्त हो यही शाश्वत प्रश्न या पहेली बना हुआ है?


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