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नयी दिल्ली,  दुनिया में प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नित नये अन्वेषणों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि भारत को भी विश्व के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए 'नयी सोच' अपनानी होगी वरना हम इतने पीछे रह जायेंगे कि कोई पूछेगा भी नहीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रौद्याेगिकी ने सम्पूर्ण दुनिया ही बदलकर रख दी है। पिछले तीन दशक में प्रौद्योगिकी का महत्व तेजी से सामने आने लगा है। इन 30 वर्षों में प्रौद्योगिकी ने हर क्षेत्र में जैसी भूमिका निभायी है, वैसी पूर्व के एक हजार साल में इसने नहीं निभायी थी। वह उच्चतम न्यायालय की समेकित मुकदमा प्रबंधन सूचना प्रणाली (आईसीएमआईएस)  के उद्घाटन अवसर पर विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम ‘डिजिटल और कागज मुक्त अदालत बनने की दिशा में बढ़ते उच्चतम न्यायालय के कदम’ में उपस्थित न्यायविदों और कानूनविदों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने दुनिया में ‘आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस’ के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के कारण नौकरियों पर संकट छाने का मुद्दा बहस का विषय है, लेकिन यह सच्चाई है कि पूरा विश्व ‘नयी सोच’ की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “पूरा दुनिया नयी सोच के साथ आगे बढ़ रही है और भारत को यदि इस दौड़ में शामिल रहना है तो उसे कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए उसी सोच के साथ आगे बढ़ना होगा।”"/> नयी दिल्ली,  दुनिया में प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नित नये अन्वेषणों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि भारत को भी विश्व के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए 'नयी सोच' अपनानी होगी वरना हम इतने पीछे रह जायेंगे कि कोई पूछेगा भी नहीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रौद्याेगिकी ने सम्पूर्ण दुनिया ही बदलकर रख दी है। पिछले तीन दशक में प्रौद्योगिकी का महत्व तेजी से सामने आने लगा है। इन 30 वर्षों में प्रौद्योगिकी ने हर क्षेत्र में जैसी भूमिका निभायी है, वैसी पूर्व के एक हजार साल में इसने नहीं निभायी थी। वह उच्चतम न्यायालय की समेकित मुकदमा प्रबंधन सूचना प्रणाली (आईसीएमआईएस)  के उद्घाटन अवसर पर विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम ‘डिजिटल और कागज मुक्त अदालत बनने की दिशा में बढ़ते उच्चतम न्यायालय के कदम’ में उपस्थित न्यायविदों और कानूनविदों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने दुनिया में ‘आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस’ के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के कारण नौकरियों पर संकट छाने का मुद्दा बहस का विषय है, लेकिन यह सच्चाई है कि पूरा विश्व ‘नयी सोच’ की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “पूरा दुनिया नयी सोच के साथ आगे बढ़ रही है और भारत को यदि इस दौड़ में शामिल रहना है तो उसे कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए उसी सोच के साथ आगे बढ़ना होगा।”"/> नयी दिल्ली,  दुनिया में प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नित नये अन्वेषणों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि भारत को भी विश्व के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए 'नयी सोच' अपनानी होगी वरना हम इतने पीछे रह जायेंगे कि कोई पूछेगा भी नहीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रौद्याेगिकी ने सम्पूर्ण दुनिया ही बदलकर रख दी है। पिछले तीन दशक में प्रौद्योगिकी का महत्व तेजी से सामने आने लगा है। इन 30 वर्षों में प्रौद्योगिकी ने हर क्षेत्र में जैसी भूमिका निभायी है, वैसी पूर्व के एक हजार साल में इसने नहीं निभायी थी। वह उच्चतम न्यायालय की समेकित मुकदमा प्रबंधन सूचना प्रणाली (आईसीएमआईएस)  के उद्घाटन अवसर पर विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम ‘डिजिटल और कागज मुक्त अदालत बनने की दिशा में बढ़ते उच्चतम न्यायालय के कदम’ में उपस्थित न्यायविदों और कानूनविदों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने दुनिया में ‘आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस’ के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के कारण नौकरियों पर संकट छाने का मुद्दा बहस का विषय है, लेकिन यह सच्चाई है कि पूरा विश्व ‘नयी सोच’ की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “पूरा दुनिया नयी सोच के साथ आगे बढ़ रही है और भारत को यदि इस दौड़ में शामिल रहना है तो उसे कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए उसी सोच के साथ आगे बढ़ना होगा।”">

भारत को ‘नयी सोच’ अपनानी होगी : मोदी

2017/05/10



नयी दिल्ली,  दुनिया में प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे नित नये अन्वेषणों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि भारत को भी विश्व के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए 'नयी सोच' अपनानी होगी वरना हम इतने पीछे रह जायेंगे कि कोई पूछेगा भी नहीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रौद्याेगिकी ने सम्पूर्ण दुनिया ही बदलकर रख दी है। पिछले तीन दशक में प्रौद्योगिकी का महत्व तेजी से सामने आने लगा है। इन 30 वर्षों में प्रौद्योगिकी ने हर क्षेत्र में जैसी भूमिका निभायी है, वैसी पूर्व के एक हजार साल में इसने नहीं निभायी थी। वह उच्चतम न्यायालय की समेकित मुकदमा प्रबंधन सूचना प्रणाली (आईसीएमआईएस)  के उद्घाटन अवसर पर विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम ‘डिजिटल और कागज मुक्त अदालत बनने की दिशा में बढ़ते उच्चतम न्यायालय के कदम’ में उपस्थित न्यायविदों और कानूनविदों को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने दुनिया में ‘आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस’ के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के कारण नौकरियों पर संकट छाने का मुद्दा बहस का विषय है, लेकिन यह सच्चाई है कि पूरा विश्व ‘नयी सोच’ की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “पूरा दुनिया नयी सोच के साथ आगे बढ़ रही है और भारत को यदि इस दौड़ में शामिल रहना है तो उसे कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए उसी सोच के साथ आगे बढ़ना होगा।”


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