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भारत की विकास दर तेज़, वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती

2017/01/18



` नयी दिल्ली,  संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की धीमी चाल के बावजूद निजी खपत में बढ़ोतरी, बुनियादी ढाँचागत क्षेत्र में निवेश बढाने के सरकारी प्रयासाें तथा नीतिगत बदलावों के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर वर्ष 2017 में 7.7 प्रतिशत तथा वर्ष 2018 में 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान व्यक्त किया है। हालांकि वैश्विक निकाय ने अपनी रिपोर्ट में नोटबंदी के प्रभाव को शामिल नहीं किया है जबकि इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर खासा असर पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक एवं सामाजिक आयोग (एशिया और प्रशांत) में आर्थिक मामलों के अधिकारी मैथ्यू हैमिल , नेशनल इंस्टीट्यूट आफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी के निदेशक डॉ रतीन रॉय ने संयुक्त रुप से आज यहां ‘वर्ल्ड इकानाॅमिक सिचुएशन एंड प्रॉस्पेक्ट 2017’ रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार मौद्रिक नियमों में दी गयी ढील, आर्थिक सुधारों, आधारभूत ढांचे में निवेश बढ़ाने की दिशा में किये जाने वाले प्रयासों, सार्वजनिक निजी भागीदारी के साथ निजी खपत में आये जबरदस्त उछाल से भारतीय अर्थव्यवस्था सकारात्मक रहेगी। रिपोर्ट में वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर वर्ष 2017 में 2.7 प्रतिशत और वर्ष 2018 में 2.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो आर्थिक स्थिरता को दर्शाता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था के विकास में यह मामूली वृद्धि मुख्य रूप से दक्षिण एशिया के कारण होगी। अमेरिका, जापान और अफ्रीका के कमोडिटी निर्यात करने वाले देशों, लातिन अमेरिकी देशों तथा कैरेबियाई देशों की विकास दर अनुमान से कम होने की वजह से वर्ष 2016 में सकल वैश्विक उत्पाद की विकास दर मात्र 2.2 प्रतिशत की तेजी से बढ़ी, जो वर्ष 2009 की वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद सबसे कम है। वर्ष 2016-18 के सकल वैश्विक उत्पाद में बढ़ोतरी का लगभग 60 फीसदी हिस्सा दक्षिण एशियाई देशों का होगा। इसी तरह गत साल वैश्विक व्यापार भी मात्र 1.2 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। वैश्विक व्यापार में वर्ष 2017 के दौरान .27 प्रतिशत और 2018 में 3:3 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।


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