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भोपाल, नभासं, शहर के शाहपुरा पॉश इलाके में स्थित एक्सटॉल कॉलेज में यू तो एक आलिशान इमारत में संचालित हो रहा है, पर टीचिंग स्टांफ एवं तीन साल से कॉलेज में प्रिंसिपल की नियुक्ति नहीं हुई हैं. कॉलेज में कक्षाएं तो है, पर कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों की भारी कमी हैं, यहां बीकांम, बीएससी, बीबीए एवं बीएससी इलेक्टॉनिक मीडिय़ा जैसे कोर्स संचालित होते हैं, पर टीचिंग स्टांफ की कमी के कारण यहां छात्र - छात्रा एडमीशन लेने के बाद सिर्फ परीक्षाओं के रोल नंबर लेने ही कॉलेज आते हैं. न यहां केन्टीन का टेंडर जारी होता है, न ही पुस्तकालय से छात्रों को पढ़ायी के लिए किताबे जारी की जाती हैं. कॉलेज के छात्रों का कहना है, कि कॉलेज में रेगुलर न जाना पड़े इसीलिए यहां छात्र एडमीशन लेते हैं. बीयू एवं माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय दोनो की डिग्री प्रदान करने वाले इस संस्थान में लेटफीस के नाम पर 300 से 500 रूपये तक वसुली की जाती हैं. बिना टीचर के कैसे पढ़े कॉलेज में कक्षाएं तो है, पर कक्षाओं में पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं हैं, छात्र एडमीशन के बाद जब कॉलेज में पढने जाता हैं तो बिना टीचर के पढ़े कैसे यह प्रश्न उसे घेरता हैं, यहां की बदहाली का यह हाल हैं, कि यहां 3 वर्ष से प्रिंसिपल नहीं है, इसी कारण छात्र - छात्रा सिर्फ पेपर देने एवं फीस भरने ही यहां आते हैं. लेट फीस के नाम पर वसूली कॉलेज में फीस भरने की आखरी तारीख की सूचना छात्र - छात्राओं तक नहीं पहुंचायी जाती है जबकि कॉलेज के छात्रो का ऑफिसल गुर्प वॉटसएप पर संचालित होता है, जब छात्र फीस भरने कॉलेज जाते हैं, तो लेटफीस के नाम पर उनसे 300. से 500 रूपये तक वसुले जाते हैं. एकजॉम फार्म के नाम पर भी छात्रों से तयशुल्क से अधिक लिया जाता हैं, जब छात्र उनसे ज्यादा शुल्क का कारण पूछते है, तो वह कॉलेज के पुस्तकालय शुल्क व ऑडिटोरियम शुल्क का हवाला देते हुए बच्चों से अधिक रूपये ले रहे हैं."/> भोपाल, नभासं, शहर के शाहपुरा पॉश इलाके में स्थित एक्सटॉल कॉलेज में यू तो एक आलिशान इमारत में संचालित हो रहा है, पर टीचिंग स्टांफ एवं तीन साल से कॉलेज में प्रिंसिपल की नियुक्ति नहीं हुई हैं. कॉलेज में कक्षाएं तो है, पर कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों की भारी कमी हैं, यहां बीकांम, बीएससी, बीबीए एवं बीएससी इलेक्टॉनिक मीडिय़ा जैसे कोर्स संचालित होते हैं, पर टीचिंग स्टांफ की कमी के कारण यहां छात्र - छात्रा एडमीशन लेने के बाद सिर्फ परीक्षाओं के रोल नंबर लेने ही कॉलेज आते हैं. न यहां केन्टीन का टेंडर जारी होता है, न ही पुस्तकालय से छात्रों को पढ़ायी के लिए किताबे जारी की जाती हैं. कॉलेज के छात्रों का कहना है, कि कॉलेज में रेगुलर न जाना पड़े इसीलिए यहां छात्र एडमीशन लेते हैं. बीयू एवं माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय दोनो की डिग्री प्रदान करने वाले इस संस्थान में लेटफीस के नाम पर 300 से 500 रूपये तक वसुली की जाती हैं. बिना टीचर के कैसे पढ़े कॉलेज में कक्षाएं तो है, पर कक्षाओं में पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं हैं, छात्र एडमीशन के बाद जब कॉलेज में पढने जाता हैं तो बिना टीचर के पढ़े कैसे यह प्रश्न उसे घेरता हैं, यहां की बदहाली का यह हाल हैं, कि यहां 3 वर्ष से प्रिंसिपल नहीं है, इसी कारण छात्र - छात्रा सिर्फ पेपर देने एवं फीस भरने ही यहां आते हैं. लेट फीस के नाम पर वसूली कॉलेज में फीस भरने की आखरी तारीख की सूचना छात्र - छात्राओं तक नहीं पहुंचायी जाती है जबकि कॉलेज के छात्रो का ऑफिसल गुर्प वॉटसएप पर संचालित होता है, जब छात्र फीस भरने कॉलेज जाते हैं, तो लेटफीस के नाम पर उनसे 300. से 500 रूपये तक वसुले जाते हैं. एकजॉम फार्म के नाम पर भी छात्रों से तयशुल्क से अधिक लिया जाता हैं, जब छात्र उनसे ज्यादा शुल्क का कारण पूछते है, तो वह कॉलेज के पुस्तकालय शुल्क व ऑडिटोरियम शुल्क का हवाला देते हुए बच्चों से अधिक रूपये ले रहे हैं."/> भोपाल, नभासं, शहर के शाहपुरा पॉश इलाके में स्थित एक्सटॉल कॉलेज में यू तो एक आलिशान इमारत में संचालित हो रहा है, पर टीचिंग स्टांफ एवं तीन साल से कॉलेज में प्रिंसिपल की नियुक्ति नहीं हुई हैं. कॉलेज में कक्षाएं तो है, पर कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों की भारी कमी हैं, यहां बीकांम, बीएससी, बीबीए एवं बीएससी इलेक्टॉनिक मीडिय़ा जैसे कोर्स संचालित होते हैं, पर टीचिंग स्टांफ की कमी के कारण यहां छात्र - छात्रा एडमीशन लेने के बाद सिर्फ परीक्षाओं के रोल नंबर लेने ही कॉलेज आते हैं. न यहां केन्टीन का टेंडर जारी होता है, न ही पुस्तकालय से छात्रों को पढ़ायी के लिए किताबे जारी की जाती हैं. कॉलेज के छात्रों का कहना है, कि कॉलेज में रेगुलर न जाना पड़े इसीलिए यहां छात्र एडमीशन लेते हैं. बीयू एवं माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय दोनो की डिग्री प्रदान करने वाले इस संस्थान में लेटफीस के नाम पर 300 से 500 रूपये तक वसुली की जाती हैं. बिना टीचर के कैसे पढ़े कॉलेज में कक्षाएं तो है, पर कक्षाओं में पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं हैं, छात्र एडमीशन के बाद जब कॉलेज में पढने जाता हैं तो बिना टीचर के पढ़े कैसे यह प्रश्न उसे घेरता हैं, यहां की बदहाली का यह हाल हैं, कि यहां 3 वर्ष से प्रिंसिपल नहीं है, इसी कारण छात्र - छात्रा सिर्फ पेपर देने एवं फीस भरने ही यहां आते हैं. लेट फीस के नाम पर वसूली कॉलेज में फीस भरने की आखरी तारीख की सूचना छात्र - छात्राओं तक नहीं पहुंचायी जाती है जबकि कॉलेज के छात्रो का ऑफिसल गुर्प वॉटसएप पर संचालित होता है, जब छात्र फीस भरने कॉलेज जाते हैं, तो लेटफीस के नाम पर उनसे 300. से 500 रूपये तक वसुले जाते हैं. एकजॉम फार्म के नाम पर भी छात्रों से तयशुल्क से अधिक लिया जाता हैं, जब छात्र उनसे ज्यादा शुल्क का कारण पूछते है, तो वह कॉलेज के पुस्तकालय शुल्क व ऑडिटोरियम शुल्क का हवाला देते हुए बच्चों से अधिक रूपये ले रहे हैं.">

बिना प्राचार्य के चल रहा कॉलेज

2017/11/22



भोपाल, नभासं, शहर के शाहपुरा पॉश इलाके में स्थित एक्सटॉल कॉलेज में यू तो एक आलिशान इमारत में संचालित हो रहा है, पर टीचिंग स्टांफ एवं तीन साल से कॉलेज में प्रिंसिपल की नियुक्ति नहीं हुई हैं. कॉलेज में कक्षाएं तो है, पर कक्षाओं में पढ़ाने वाले शिक्षकों की भारी कमी हैं, यहां बीकांम, बीएससी, बीबीए एवं बीएससी इलेक्टॉनिक मीडिय़ा जैसे कोर्स संचालित होते हैं, पर टीचिंग स्टांफ की कमी के कारण यहां छात्र - छात्रा एडमीशन लेने के बाद सिर्फ परीक्षाओं के रोल नंबर लेने ही कॉलेज आते हैं. न यहां केन्टीन का टेंडर जारी होता है, न ही पुस्तकालय से छात्रों को पढ़ायी के लिए किताबे जारी की जाती हैं. कॉलेज के छात्रों का कहना है, कि कॉलेज में रेगुलर न जाना पड़े इसीलिए यहां छात्र एडमीशन लेते हैं. बीयू एवं माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय दोनो की डिग्री प्रदान करने वाले इस संस्थान में लेटफीस के नाम पर 300 से 500 रूपये तक वसुली की जाती हैं. बिना टीचर के कैसे पढ़े कॉलेज में कक्षाएं तो है, पर कक्षाओं में पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं हैं, छात्र एडमीशन के बाद जब कॉलेज में पढने जाता हैं तो बिना टीचर के पढ़े कैसे यह प्रश्न उसे घेरता हैं, यहां की बदहाली का यह हाल हैं, कि यहां 3 वर्ष से प्रिंसिपल नहीं है, इसी कारण छात्र - छात्रा सिर्फ पेपर देने एवं फीस भरने ही यहां आते हैं. लेट फीस के नाम पर वसूली कॉलेज में फीस भरने की आखरी तारीख की सूचना छात्र - छात्राओं तक नहीं पहुंचायी जाती है जबकि कॉलेज के छात्रो का ऑफिसल गुर्प वॉटसएप पर संचालित होता है, जब छात्र फीस भरने कॉलेज जाते हैं, तो लेटफीस के नाम पर उनसे 300. से 500 रूपये तक वसुले जाते हैं. एकजॉम फार्म के नाम पर भी छात्रों से तयशुल्क से अधिक लिया जाता हैं, जब छात्र उनसे ज्यादा शुल्क का कारण पूछते है, तो वह कॉलेज के पुस्तकालय शुल्क व ऑडिटोरियम शुल्क का हवाला देते हुए बच्चों से अधिक रूपये ले रहे हैं.


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