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भोपाल,  दाे दिन पहले दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से मुंबई के लिए निकलने के बाद लापता हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् के प्रवक्ता महंत मोहनदास की आखिरी लोकेशन पुलिस को उत्तरप्रदेश के मेरठ में मिली है। भोपाल स्टेशन पर शनिवार शाम हरिद्वार-मुंबई लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस पर महंत के एक सेवादार के उन्हें भोजन देने के लिए जाने पर महंत के ट्रेन में से लापता होने की सूचना मिलने के बाद शासकीय रेल पुलिस, भोपाल ने उनके मोबाइल फोन को सर्विंलास पर डाल दिया था। रेल पुलिस अधीक्षक अनिता मालवीय ने दूरभाष पर यूनीवार्ता को बताया कि कल शाम महंत मोहनदास के मोबाइल की लोकेशन मेरठ में मिली थी। एक संभावना यह भी है कि उस दिन ट्रेन के करीब नौ घंटे लेट होने के कारण महंत संभवत: सड़क मार्ग से रवाना हो गए। उन्होंने बताया कि महंत का ट्रेन नंबर 12172 के ए-1 कोच में 21 नंबर बर्थ पर आरक्षण था। उन्हें कल्याण तक जाना था। यह भी पता चला है कि उन्होंने हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर कोच अटेंडेंट को अपना सामान सौंपा और उसे कल्याण में महंत दामोदर दास को सौंपने को कहा, इसके बाद वे ट्रेन में बैठे ही नहीं। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि उनका सामान रेल पुलिस बल ने कल्याण स्टेशन पर सौंप दिया है। हालांकि जीआरपी अब भी इस मामले में अलग-अलग पहलुओं से जांच कर रही है। पिछले दिनों देश मेें फर्जी बाबाओं की सूची जारी करने के बाद अखाड़ा परिषद् चर्चाओं में आया था। इस सूची में बाबा रामरहीम और राधे मां समेत कई अन्य बाबा शामिल थे। सूची आने के कुछ ही दिन में महंत मोहनदास के लापता होने से सनसनी फैल गई है। बताया जा रहा है कि बाबा मोहनदास के पास एक पोटली भी थी, जिसमें लाखों रुपए थे, जो वे अपने इलाज के लिए ले जा रहे थे। इसके अलावा उन्होंने लाखों के सोने-चांदी के आभूषण भी पहने हुए थे।"/> भोपाल,  दाे दिन पहले दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से मुंबई के लिए निकलने के बाद लापता हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् के प्रवक्ता महंत मोहनदास की आखिरी लोकेशन पुलिस को उत्तरप्रदेश के मेरठ में मिली है। भोपाल स्टेशन पर शनिवार शाम हरिद्वार-मुंबई लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस पर महंत के एक सेवादार के उन्हें भोजन देने के लिए जाने पर महंत के ट्रेन में से लापता होने की सूचना मिलने के बाद शासकीय रेल पुलिस, भोपाल ने उनके मोबाइल फोन को सर्विंलास पर डाल दिया था। रेल पुलिस अधीक्षक अनिता मालवीय ने दूरभाष पर यूनीवार्ता को बताया कि कल शाम महंत मोहनदास के मोबाइल की लोकेशन मेरठ में मिली थी। एक संभावना यह भी है कि उस दिन ट्रेन के करीब नौ घंटे लेट होने के कारण महंत संभवत: सड़क मार्ग से रवाना हो गए। उन्होंने बताया कि महंत का ट्रेन नंबर 12172 के ए-1 कोच में 21 नंबर बर्थ पर आरक्षण था। उन्हें कल्याण तक जाना था। यह भी पता चला है कि उन्होंने हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर कोच अटेंडेंट को अपना सामान सौंपा और उसे कल्याण में महंत दामोदर दास को सौंपने को कहा, इसके बाद वे ट्रेन में बैठे ही नहीं। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि उनका सामान रेल पुलिस बल ने कल्याण स्टेशन पर सौंप दिया है। हालांकि जीआरपी अब भी इस मामले में अलग-अलग पहलुओं से जांच कर रही है। पिछले दिनों देश मेें फर्जी बाबाओं की सूची जारी करने के बाद अखाड़ा परिषद् चर्चाओं में आया था। इस सूची में बाबा रामरहीम और राधे मां समेत कई अन्य बाबा शामिल थे। सूची आने के कुछ ही दिन में महंत मोहनदास के लापता होने से सनसनी फैल गई है। बताया जा रहा है कि बाबा मोहनदास के पास एक पोटली भी थी, जिसमें लाखों रुपए थे, जो वे अपने इलाज के लिए ले जा रहे थे। इसके अलावा उन्होंने लाखों के सोने-चांदी के आभूषण भी पहने हुए थे।"/> भोपाल,  दाे दिन पहले दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से मुंबई के लिए निकलने के बाद लापता हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् के प्रवक्ता महंत मोहनदास की आखिरी लोकेशन पुलिस को उत्तरप्रदेश के मेरठ में मिली है। भोपाल स्टेशन पर शनिवार शाम हरिद्वार-मुंबई लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस पर महंत के एक सेवादार के उन्हें भोजन देने के लिए जाने पर महंत के ट्रेन में से लापता होने की सूचना मिलने के बाद शासकीय रेल पुलिस, भोपाल ने उनके मोबाइल फोन को सर्विंलास पर डाल दिया था। रेल पुलिस अधीक्षक अनिता मालवीय ने दूरभाष पर यूनीवार्ता को बताया कि कल शाम महंत मोहनदास के मोबाइल की लोकेशन मेरठ में मिली थी। एक संभावना यह भी है कि उस दिन ट्रेन के करीब नौ घंटे लेट होने के कारण महंत संभवत: सड़क मार्ग से रवाना हो गए। उन्होंने बताया कि महंत का ट्रेन नंबर 12172 के ए-1 कोच में 21 नंबर बर्थ पर आरक्षण था। उन्हें कल्याण तक जाना था। यह भी पता चला है कि उन्होंने हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर कोच अटेंडेंट को अपना सामान सौंपा और उसे कल्याण में महंत दामोदर दास को सौंपने को कहा, इसके बाद वे ट्रेन में बैठे ही नहीं। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि उनका सामान रेल पुलिस बल ने कल्याण स्टेशन पर सौंप दिया है। हालांकि जीआरपी अब भी इस मामले में अलग-अलग पहलुओं से जांच कर रही है। पिछले दिनों देश मेें फर्जी बाबाओं की सूची जारी करने के बाद अखाड़ा परिषद् चर्चाओं में आया था। इस सूची में बाबा रामरहीम और राधे मां समेत कई अन्य बाबा शामिल थे। सूची आने के कुछ ही दिन में महंत मोहनदास के लापता होने से सनसनी फैल गई है। बताया जा रहा है कि बाबा मोहनदास के पास एक पोटली भी थी, जिसमें लाखों रुपए थे, जो वे अपने इलाज के लिए ले जा रहे थे। इसके अलावा उन्होंने लाखों के सोने-चांदी के आभूषण भी पहने हुए थे।">

फर्जी बाबाओं की सूची बनाने वाले लापता महंत की आखिरी लोकेशन मेरठ में मिली

2017/09/18



भोपाल,  दाे दिन पहले दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से मुंबई के लिए निकलने के बाद लापता हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् के प्रवक्ता महंत मोहनदास की आखिरी लोकेशन पुलिस को उत्तरप्रदेश के मेरठ में मिली है। भोपाल स्टेशन पर शनिवार शाम हरिद्वार-मुंबई लोकमान्य तिलक टर्मिनस एक्सप्रेस पर महंत के एक सेवादार के उन्हें भोजन देने के लिए जाने पर महंत के ट्रेन में से लापता होने की सूचना मिलने के बाद शासकीय रेल पुलिस, भोपाल ने उनके मोबाइल फोन को सर्विंलास पर डाल दिया था। रेल पुलिस अधीक्षक अनिता मालवीय ने दूरभाष पर यूनीवार्ता को बताया कि कल शाम महंत मोहनदास के मोबाइल की लोकेशन मेरठ में मिली थी। एक संभावना यह भी है कि उस दिन ट्रेन के करीब नौ घंटे लेट होने के कारण महंत संभवत: सड़क मार्ग से रवाना हो गए। उन्होंने बताया कि महंत का ट्रेन नंबर 12172 के ए-1 कोच में 21 नंबर बर्थ पर आरक्षण था। उन्हें कल्याण तक जाना था। यह भी पता चला है कि उन्होंने हजरत निजामुद्दीन स्टेशन पर कोच अटेंडेंट को अपना सामान सौंपा और उसे कल्याण में महंत दामोदर दास को सौंपने को कहा, इसके बाद वे ट्रेन में बैठे ही नहीं। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि उनका सामान रेल पुलिस बल ने कल्याण स्टेशन पर सौंप दिया है। हालांकि जीआरपी अब भी इस मामले में अलग-अलग पहलुओं से जांच कर रही है। पिछले दिनों देश मेें फर्जी बाबाओं की सूची जारी करने के बाद अखाड़ा परिषद् चर्चाओं में आया था। इस सूची में बाबा रामरहीम और राधे मां समेत कई अन्य बाबा शामिल थे। सूची आने के कुछ ही दिन में महंत मोहनदास के लापता होने से सनसनी फैल गई है। बताया जा रहा है कि बाबा मोहनदास के पास एक पोटली भी थी, जिसमें लाखों रुपए थे, जो वे अपने इलाज के लिए ले जा रहे थे। इसके अलावा उन्होंने लाखों के सोने-चांदी के आभूषण भी पहने हुए थे।


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