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ढाका, बाॅलीवुड अभिनेत्री अाैर यूनिसेफ की सद्भावना दूत प्रियंका चाेपड़ा ने विश्वभर के बाल शरणार्थियाें की सहायता के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अागे आने का आग्रह किया है। वह अाज बंगलादेश के काॅक्स बाजार के शरणार्थी शिविराें का दाैरा कर रही थी। प्रियंका चोपड़ा ने कातुपालोंग शरणार्थी शिविर से अपने फेसबुक पर लाइव संदेश प्रसारित करते हुए राेहिंग्या शरणार्थी संकट की चर्चा के अलावा यूनिसेफ द्वारा बच्चाें के जीवन रक्षा में इस संस्था की काेशिशाें पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्हाेंने कहा कि विश्व समुदाय काे राेहिंग्या बच्चाें की खातिर अागे अाना चाहिए और यह देखना चाहिए कि ये बच्चे किन हालात में रह रहे हैं, इनके समक्ष भाेजन, साफ पानी, घर, बेहतर सफाई अाैर शिक्षा जैसी क्या बुनियादी समस्याएं हैं, जिन्हें पूरा किया जाना जरूरी है। उन्हाेंने ‘फेसबुक’ पर लिखा, “हर बच्चे काे अपने भविष्य की चिंता करने का अधिकार है, वे चाहे जिस भी जाति, धर्म या देश के हाें। इससे काेई फर्क नहीं पड़ता कि इनके पूर्वजाें ने कैसे-कैसे कार्य किये, लेकिन हमें समाज की सुरक्षा की चिंता है, साथ ही इनके प्रति सहानुभूति दिखाये जाने की जरूरत है। विश्व काे इन बच्चाें के देखभाल की जरूरत है। भले ही ये बच्चे भटकी पीढियाें के हाें।” इन शिविरों में करीब 700,000 शरणार्थी हैं, जिनमें 60 प्रतिशत बच्चे हैं, जिन्हें बुनियादी सुविधाएं नसीब नहीं हैं । उचित सफाई न हाेने से इन शिविराें में बीमारियां भी फैल रही हैं। प्रियंका चाेपड़ा ने कहा, “ काेई भी दान छाेटा नहीं हाेता है, काेई भी दानदाता हाे सकता है, किसी समय एेसा किया जा सकता है, बस रहम दिखाने की दरकार है। उन्होंने कहा कि ये सभी बाल शरणार्थी पढना-लिखना चाहते हैं। इनमें से अधिकांश शरणार्थियाें ने बंगलादेश की अोर से दी गई सहायता के लिए उसका धन्यवाद किया है। प्रियंका ने कहा “ अब कम से कम ये बच्चे शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं अौर मैं आज पांच साल के एक बच्चे से मिली। इस बच्चे ने कहा कि वह पत्रकार बनकर दुनिया काे बताना चाहता है कि जब कई देशाें में युद्ध हाेते हैं, ताे वह सभी के लिए बुरा हाेता है।”प्रियंका चाेपड़ा करीब 12 वर्षाें से ‘यूनिसेफ’ की सद्भावना दूत के रूप में कार्य कर रही हैं।"/> ढाका, बाॅलीवुड अभिनेत्री अाैर यूनिसेफ की सद्भावना दूत प्रियंका चाेपड़ा ने विश्वभर के बाल शरणार्थियाें की सहायता के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अागे आने का आग्रह किया है। वह अाज बंगलादेश के काॅक्स बाजार के शरणार्थी शिविराें का दाैरा कर रही थी। प्रियंका चोपड़ा ने कातुपालोंग शरणार्थी शिविर से अपने फेसबुक पर लाइव संदेश प्रसारित करते हुए राेहिंग्या शरणार्थी संकट की चर्चा के अलावा यूनिसेफ द्वारा बच्चाें के जीवन रक्षा में इस संस्था की काेशिशाें पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्हाेंने कहा कि विश्व समुदाय काे राेहिंग्या बच्चाें की खातिर अागे अाना चाहिए और यह देखना चाहिए कि ये बच्चे किन हालात में रह रहे हैं, इनके समक्ष भाेजन, साफ पानी, घर, बेहतर सफाई अाैर शिक्षा जैसी क्या बुनियादी समस्याएं हैं, जिन्हें पूरा किया जाना जरूरी है। उन्हाेंने ‘फेसबुक’ पर लिखा, “हर बच्चे काे अपने भविष्य की चिंता करने का अधिकार है, वे चाहे जिस भी जाति, धर्म या देश के हाें। इससे काेई फर्क नहीं पड़ता कि इनके पूर्वजाें ने कैसे-कैसे कार्य किये, लेकिन हमें समाज की सुरक्षा की चिंता है, साथ ही इनके प्रति सहानुभूति दिखाये जाने की जरूरत है। विश्व काे इन बच्चाें के देखभाल की जरूरत है। भले ही ये बच्चे भटकी पीढियाें के हाें।” इन शिविरों में करीब 700,000 शरणार्थी हैं, जिनमें 60 प्रतिशत बच्चे हैं, जिन्हें बुनियादी सुविधाएं नसीब नहीं हैं । उचित सफाई न हाेने से इन शिविराें में बीमारियां भी फैल रही हैं। प्रियंका चाेपड़ा ने कहा, “ काेई भी दान छाेटा नहीं हाेता है, काेई भी दानदाता हाे सकता है, किसी समय एेसा किया जा सकता है, बस रहम दिखाने की दरकार है। उन्होंने कहा कि ये सभी बाल शरणार्थी पढना-लिखना चाहते हैं। इनमें से अधिकांश शरणार्थियाें ने बंगलादेश की अोर से दी गई सहायता के लिए उसका धन्यवाद किया है। प्रियंका ने कहा “ अब कम से कम ये बच्चे शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं अौर मैं आज पांच साल के एक बच्चे से मिली। इस बच्चे ने कहा कि वह पत्रकार बनकर दुनिया काे बताना चाहता है कि जब कई देशाें में युद्ध हाेते हैं, ताे वह सभी के लिए बुरा हाेता है।”प्रियंका चाेपड़ा करीब 12 वर्षाें से ‘यूनिसेफ’ की सद्भावना दूत के रूप में कार्य कर रही हैं।"/> ढाका, बाॅलीवुड अभिनेत्री अाैर यूनिसेफ की सद्भावना दूत प्रियंका चाेपड़ा ने विश्वभर के बाल शरणार्थियाें की सहायता के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अागे आने का आग्रह किया है। वह अाज बंगलादेश के काॅक्स बाजार के शरणार्थी शिविराें का दाैरा कर रही थी। प्रियंका चोपड़ा ने कातुपालोंग शरणार्थी शिविर से अपने फेसबुक पर लाइव संदेश प्रसारित करते हुए राेहिंग्या शरणार्थी संकट की चर्चा के अलावा यूनिसेफ द्वारा बच्चाें के जीवन रक्षा में इस संस्था की काेशिशाें पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्हाेंने कहा कि विश्व समुदाय काे राेहिंग्या बच्चाें की खातिर अागे अाना चाहिए और यह देखना चाहिए कि ये बच्चे किन हालात में रह रहे हैं, इनके समक्ष भाेजन, साफ पानी, घर, बेहतर सफाई अाैर शिक्षा जैसी क्या बुनियादी समस्याएं हैं, जिन्हें पूरा किया जाना जरूरी है। उन्हाेंने ‘फेसबुक’ पर लिखा, “हर बच्चे काे अपने भविष्य की चिंता करने का अधिकार है, वे चाहे जिस भी जाति, धर्म या देश के हाें। इससे काेई फर्क नहीं पड़ता कि इनके पूर्वजाें ने कैसे-कैसे कार्य किये, लेकिन हमें समाज की सुरक्षा की चिंता है, साथ ही इनके प्रति सहानुभूति दिखाये जाने की जरूरत है। विश्व काे इन बच्चाें के देखभाल की जरूरत है। भले ही ये बच्चे भटकी पीढियाें के हाें।” इन शिविरों में करीब 700,000 शरणार्थी हैं, जिनमें 60 प्रतिशत बच्चे हैं, जिन्हें बुनियादी सुविधाएं नसीब नहीं हैं । उचित सफाई न हाेने से इन शिविराें में बीमारियां भी फैल रही हैं। प्रियंका चाेपड़ा ने कहा, “ काेई भी दान छाेटा नहीं हाेता है, काेई भी दानदाता हाे सकता है, किसी समय एेसा किया जा सकता है, बस रहम दिखाने की दरकार है। उन्होंने कहा कि ये सभी बाल शरणार्थी पढना-लिखना चाहते हैं। इनमें से अधिकांश शरणार्थियाें ने बंगलादेश की अोर से दी गई सहायता के लिए उसका धन्यवाद किया है। प्रियंका ने कहा “ अब कम से कम ये बच्चे शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं अौर मैं आज पांच साल के एक बच्चे से मिली। इस बच्चे ने कहा कि वह पत्रकार बनकर दुनिया काे बताना चाहता है कि जब कई देशाें में युद्ध हाेते हैं, ताे वह सभी के लिए बुरा हाेता है।”प्रियंका चाेपड़ा करीब 12 वर्षाें से ‘यूनिसेफ’ की सद्भावना दूत के रूप में कार्य कर रही हैं।">

प्रियंका चाेपड़ा की राेहिंग्या बच्चाें के लिए काेष जुटाने की भावुक अपील

2018/05/25



ढाका, बाॅलीवुड अभिनेत्री अाैर यूनिसेफ की सद्भावना दूत प्रियंका चाेपड़ा ने विश्वभर के बाल शरणार्थियाें की सहायता के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अागे आने का आग्रह किया है। वह अाज बंगलादेश के काॅक्स बाजार के शरणार्थी शिविराें का दाैरा कर रही थी। प्रियंका चोपड़ा ने कातुपालोंग शरणार्थी शिविर से अपने फेसबुक पर लाइव संदेश प्रसारित करते हुए राेहिंग्या शरणार्थी संकट की चर्चा के अलावा यूनिसेफ द्वारा बच्चाें के जीवन रक्षा में इस संस्था की काेशिशाें पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्हाेंने कहा कि विश्व समुदाय काे राेहिंग्या बच्चाें की खातिर अागे अाना चाहिए और यह देखना चाहिए कि ये बच्चे किन हालात में रह रहे हैं, इनके समक्ष भाेजन, साफ पानी, घर, बेहतर सफाई अाैर शिक्षा जैसी क्या बुनियादी समस्याएं हैं, जिन्हें पूरा किया जाना जरूरी है। उन्हाेंने ‘फेसबुक’ पर लिखा, “हर बच्चे काे अपने भविष्य की चिंता करने का अधिकार है, वे चाहे जिस भी जाति, धर्म या देश के हाें। इससे काेई फर्क नहीं पड़ता कि इनके पूर्वजाें ने कैसे-कैसे कार्य किये, लेकिन हमें समाज की सुरक्षा की चिंता है, साथ ही इनके प्रति सहानुभूति दिखाये जाने की जरूरत है। विश्व काे इन बच्चाें के देखभाल की जरूरत है। भले ही ये बच्चे भटकी पीढियाें के हाें।” इन शिविरों में करीब 700,000 शरणार्थी हैं, जिनमें 60 प्रतिशत बच्चे हैं, जिन्हें बुनियादी सुविधाएं नसीब नहीं हैं । उचित सफाई न हाेने से इन शिविराें में बीमारियां भी फैल रही हैं। प्रियंका चाेपड़ा ने कहा, “ काेई भी दान छाेटा नहीं हाेता है, काेई भी दानदाता हाे सकता है, किसी समय एेसा किया जा सकता है, बस रहम दिखाने की दरकार है। उन्होंने कहा कि ये सभी बाल शरणार्थी पढना-लिखना चाहते हैं। इनमें से अधिकांश शरणार्थियाें ने बंगलादेश की अोर से दी गई सहायता के लिए उसका धन्यवाद किया है। प्रियंका ने कहा “ अब कम से कम ये बच्चे शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं अौर मैं आज पांच साल के एक बच्चे से मिली। इस बच्चे ने कहा कि वह पत्रकार बनकर दुनिया काे बताना चाहता है कि जब कई देशाें में युद्ध हाेते हैं, ताे वह सभी के लिए बुरा हाेता है।”प्रियंका चाेपड़ा करीब 12 वर्षाें से ‘यूनिसेफ’ की सद्भावना दूत के रूप में कार्य कर रही हैं।


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