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पुलिस अधीक्षक कार्यालय में ग्रामीण ने खाया सल्फास

2017/12/16



पुत्र के साथ शिकायत लेकर आया था ग्रामीण, भोपाल रैफर नवभारत न्यूज सीहोर/आष्टा, डेढ़ साल से भी अधिक समय से न्याय की आस लेकर पुलिस के पास पहुंच रहे ग्रामीण को लगा कि पुलिस उसकी मदद नहीं कर रही है तो उसने पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया. हालांकि पुलिस ने स्वयं अपने वाहन से उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया. जिला अस्पताल से ग्रामीण को भोपाल रेफर कर दिया गया. जानकारी के अनुसार आष्टा ब्लाक के ग्राम केवखेड़ी निवासी मोर सिंह ने बताया कि उसके पिता देव सिंह पिता बापू सिंह 55 वर्ष ने अपनी अल्टो कार एमपी 04 सीक्यू 5422 शुजालपुर निवासी महेन्द्र सिंह को 500 रुपए के स्टाम्प पर लिखा पढ़ी करके बेची थी. कार का सौदा दो लाख 15 हजार 850 रुपए में दलाल मुमताज जलाल के माध्यम से हुआ था. बीस माह पहले कार बेचते समय खरीदार ने 50 हजार रुपए नकद देते हुए शेष राशि एक माह में देने का करार किया था. महेन्द्र सिंह ने अभी तक कार की शेष राशि में से एक भी रुपया नहीं दिया है इसके अलावा धमकी भी दे रहा है. मोर सिंह ने बताया कि कार बेचने के एक माह बाद शेष नहीं मिलने पर उनके द्वारा आष्टा थाने के अलावा आष्टा एसडीओपी को भी अनेक बार आवेदन दिया जा चुका है, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं की गई. इसके अलावा उनके पिता आधा दर्जन से अधिक बार एसपी कार्यालय में भी आवेदन दे चुके हैं. आवेदन देते-देते 19 माह बीत चुके हैं. शुक्रवार को भी समस्या के निराकरण के लिए आस लगाकर एसपी आफिस पहुंचे थे, लेकिन एसपी साहब ने संतोषजनक जवाब नहीं देते हुए आवेदन लेकर उसके पिता को टरका दिया. न्याय नहीं मिलने से हताश होकर उसके पिता ने सल्फास गटक ली. मोर सिंह ने बताया कि शुजालपुर निवासी महेन्द्र सिंह ने उसकी कार को थर्ड पार्टी के रूप में पचोर के किसी व्यक्ति को बेच दी. आरोपी द्वारा कार के रूपए मांगने पर धमकी दे रहा है और रुपए भी वापस नहीं कर रहा है. आरोपी खुलेआम घूम रहा है. मोर सिंह ने आरोप लगाते हुए बताया कि आष्टा पुलिस से शिकायत किए जाने पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार तो कर लिया था, लेकिन सांठगांठ कर उसे छोड़ दिया गया. इस मामले में पुलिस का कहना है कि कार फाइनेंस पर खरीदी गई थी. कार को लिखापढ़ी कर सीधे बेच दिया गया था. इसके संबंध में फाइनेंस कंपनी को भी जानकारी नहीं दी गई थी. इसके अलावा महेन्द्र सिंह ने पुलिस को पूछताछ में बताया था कि फाइनेंस में बकाया रकम अधिक थी, जिसे देवसिंह द्वारा छिपाया गया था. इस तरह के मामले में पुलिस से समझाइश देकर दोनों पक्षों में सुलह कराने का प्रयास किया गया था. एएसपी एपी सिंह ने बताया कि मामले में ग्रामीण को एसपी कार्यालय के बाहर गेट के समीप के समीप उल्टी करते हुए देखा गया था. ग्रामीण के पास ही सल्फास की पुडिय़ा पड़ी थी. ग्रामीण को तत्काल उपचार के लिए उनके वाहन से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया. जिला अस्पताल से प्राथमिक उपचार के बाद उसे भोपाल रेफर कर दिया गया.


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