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सोची (रूस), प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने आज यहां अपने रक्षा संबंधों को प्रगाढ़ बनाये रखने के संकल्प के साथ ‘सैन्य एवं तकनीकी सहयोग’ तथा आर्थिक सहयोग बढ़ाने के बारे में चर्चा की। काला सागर के तट पर स्थित इस मशहूर पर्यटक स्थल पर दोनों नेताओं की अनौपचारिक शिखर बैठक के बारे में श्री पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के रक्षा मंत्रालयों के बीच ‘निकट संपर्क’ बना हुआ है जो उनके बीच उच्चस्तरीय सामरिक साझेदारी का परिचायक है। उन्होंने कहा, “हमारे रक्षा मंत्रालयाें में बहुत निकट का संपर्क और सहयोग बना हुआ है। यह हमारी साझेदारी के अत्यंत उच्च रणनीतिक स्तर का परिचायक है।” समाचार एजेंसी तास की रिपोर्ट के अनुसार क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इससे पहले संवाददाताओं से कहा कि श्री पुतिन भारतीय प्रधानमंत्री के साथ सैन्य तकनीकी सहयोग पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने एकांत में इस बारे में बातचीत की है। अमेरिकी संसद द्वारा पारित अमेरिका से शत्रुता रखने वाले देशों पर प्रतिबंधात्मक कानून (कैट्स) के कारण ना केवल रूस के उद्योगों एवं कंपनियों को बल्कि रूसी कंपनियों के साथ काम करने वाली तृतीय विश्व के देशों की कंपनियों पर प्रतिबंध लगाये जा सकते हैं। इन कंपनियों में रूस की आधिकारिक शस्त्र व्यापार करने वाली कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट भी शामिल है। एक रिपोर्ट के अनुसार श्री मोदी और श्री पुतिन ने जिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की है उनमें रूस द्वारा भारत को सैन्य निर्यात को लेकर पूर्व में बनी सहमति के भविष्य का मुद्दा भी शामिल था। यह निर्यात 12 अरब डॉलर का है। गत माह चेन्नई में हुए डिफेंस एक्सपो में दोनों देशों की कंपनियों ने भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा उपयोग में लाये जा रहे रूसी रक्षा उपकरणों के कलपुर्ज़े बनाने के सात समझौतों पर हस्ताक्षर किये थे। रक्षा मंत्रालय ने 48 उपकरणों की पहचान की है जिन्हें रूस के सहयोग से भारत में बनाया जा सकता है। इन उपकरणों में हेलीकॉप्टर, विमान एवं नौसैनिक प्रणालियां शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार एकांत में वार्तालाप के दौरान श्री पुतिन ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक पटल पर दोनों देशों की संयुक्त गतिविधियों की सराहना की खासकर संयुक्त राष्ट्र, ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में। इस बीच रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि श्री पुतिन और श्री मोदी के बीच बातचीत बहुत सार्थक रही है और दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्तर पर विशिष्ट मुद्दों पर सहयोग के बारे में चर्चा की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह अनौपचारिक संवाद दोनों देशों के बीच सामरिक साझेदारी एवं विकास के लिए दिशा तय करने में सहायक सिद्ध होगा। श्री लावरोव ने कहा कि दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के मुद्दे पर भी विशेष ध्यान दिया और द्विपक्षीय व्यापार में सतत वृद्धि पर संतोष जाहिर किया। चालू वित्त वर्ष के शुरुआती माह में द्विपक्षीय व्यापार में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने अक्टूबर में भारत में होने वाली शिखर बैठक में आर्थिक तत्व की प्रधानता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाने के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा कि बातचीत में ऊर्जा क्षेत्र पर भी खासतौर पर चर्चा की गयी। दोनों नेताओं ने माना कि वर्ष 2017 में भारत को तेल निर्यात में दस गुनी वृद्धि हुई है। दोनों देशों की तेल कंपनियों के बीच सहयोग बढ़ाने के बारे में भी चर्चा की। दोनों देशों ने परमाणु ऊर्जा, सुरक्षा और उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी एशिया प्रशांत क्षेत्र में मिल कर काम करने के बारे में चर्चा की। श्री लावरोव ने कहा कि श्री पुतिन एवं श्री मोदी इस बात को लेकर संकल्पबद्ध हैं कि एशिया प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा एवं सहयोग का नया ढांचा निष्पक्ष सिद्धांतों, खुलेपन, समानता एवं समान सुरक्षा के पैमाने पर आधारित हो। दोनों नेताओं ने यूरेशियाई आर्थिक संघ और भारत के बीच संपर्क की अौपचारिकताएं पूरी होने पर संतोष व्यक्त किया। अक्टूबर में दोनों देशों के बीच यूरेशियाई आर्थिक संघ और भारत के मुक्त व्यापार प्रक्षेत्र बनाने के बारे में बातचीत शुरू होगी।"/> सोची (रूस), प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने आज यहां अपने रक्षा संबंधों को प्रगाढ़ बनाये रखने के संकल्प के साथ ‘सैन्य एवं तकनीकी सहयोग’ तथा आर्थिक सहयोग बढ़ाने के बारे में चर्चा की। काला सागर के तट पर स्थित इस मशहूर पर्यटक स्थल पर दोनों नेताओं की अनौपचारिक शिखर बैठक के बारे में श्री पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के रक्षा मंत्रालयों के बीच ‘निकट संपर्क’ बना हुआ है जो उनके बीच उच्चस्तरीय सामरिक साझेदारी का परिचायक है। उन्होंने कहा, “हमारे रक्षा मंत्रालयाें में बहुत निकट का संपर्क और सहयोग बना हुआ है। यह हमारी साझेदारी के अत्यंत उच्च रणनीतिक स्तर का परिचायक है।” समाचार एजेंसी तास की रिपोर्ट के अनुसार क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इससे पहले संवाददाताओं से कहा कि श्री पुतिन भारतीय प्रधानमंत्री के साथ सैन्य तकनीकी सहयोग पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने एकांत में इस बारे में बातचीत की है। अमेरिकी संसद द्वारा पारित अमेरिका से शत्रुता रखने वाले देशों पर प्रतिबंधात्मक कानून (कैट्स) के कारण ना केवल रूस के उद्योगों एवं कंपनियों को बल्कि रूसी कंपनियों के साथ काम करने वाली तृतीय विश्व के देशों की कंपनियों पर प्रतिबंध लगाये जा सकते हैं। इन कंपनियों में रूस की आधिकारिक शस्त्र व्यापार करने वाली कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट भी शामिल है। एक रिपोर्ट के अनुसार श्री मोदी और श्री पुतिन ने जिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की है उनमें रूस द्वारा भारत को सैन्य निर्यात को लेकर पूर्व में बनी सहमति के भविष्य का मुद्दा भी शामिल था। यह निर्यात 12 अरब डॉलर का है। गत माह चेन्नई में हुए डिफेंस एक्सपो में दोनों देशों की कंपनियों ने भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा उपयोग में लाये जा रहे रूसी रक्षा उपकरणों के कलपुर्ज़े बनाने के सात समझौतों पर हस्ताक्षर किये थे। रक्षा मंत्रालय ने 48 उपकरणों की पहचान की है जिन्हें रूस के सहयोग से भारत में बनाया जा सकता है। इन उपकरणों में हेलीकॉप्टर, विमान एवं नौसैनिक प्रणालियां शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार एकांत में वार्तालाप के दौरान श्री पुतिन ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक पटल पर दोनों देशों की संयुक्त गतिविधियों की सराहना की खासकर संयुक्त राष्ट्र, ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में। इस बीच रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि श्री पुतिन और श्री मोदी के बीच बातचीत बहुत सार्थक रही है और दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्तर पर विशिष्ट मुद्दों पर सहयोग के बारे में चर्चा की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह अनौपचारिक संवाद दोनों देशों के बीच सामरिक साझेदारी एवं विकास के लिए दिशा तय करने में सहायक सिद्ध होगा। श्री लावरोव ने कहा कि दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के मुद्दे पर भी विशेष ध्यान दिया और द्विपक्षीय व्यापार में सतत वृद्धि पर संतोष जाहिर किया। चालू वित्त वर्ष के शुरुआती माह में द्विपक्षीय व्यापार में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने अक्टूबर में भारत में होने वाली शिखर बैठक में आर्थिक तत्व की प्रधानता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाने के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा कि बातचीत में ऊर्जा क्षेत्र पर भी खासतौर पर चर्चा की गयी। दोनों नेताओं ने माना कि वर्ष 2017 में भारत को तेल निर्यात में दस गुनी वृद्धि हुई है। दोनों देशों की तेल कंपनियों के बीच सहयोग बढ़ाने के बारे में भी चर्चा की। दोनों देशों ने परमाणु ऊर्जा, सुरक्षा और उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी एशिया प्रशांत क्षेत्र में मिल कर काम करने के बारे में चर्चा की। श्री लावरोव ने कहा कि श्री पुतिन एवं श्री मोदी इस बात को लेकर संकल्पबद्ध हैं कि एशिया प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा एवं सहयोग का नया ढांचा निष्पक्ष सिद्धांतों, खुलेपन, समानता एवं समान सुरक्षा के पैमाने पर आधारित हो। दोनों नेताओं ने यूरेशियाई आर्थिक संघ और भारत के बीच संपर्क की अौपचारिकताएं पूरी होने पर संतोष व्यक्त किया। अक्टूबर में दोनों देशों के बीच यूरेशियाई आर्थिक संघ और भारत के मुक्त व्यापार प्रक्षेत्र बनाने के बारे में बातचीत शुरू होगी।"/> सोची (रूस), प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने आज यहां अपने रक्षा संबंधों को प्रगाढ़ बनाये रखने के संकल्प के साथ ‘सैन्य एवं तकनीकी सहयोग’ तथा आर्थिक सहयोग बढ़ाने के बारे में चर्चा की। काला सागर के तट पर स्थित इस मशहूर पर्यटक स्थल पर दोनों नेताओं की अनौपचारिक शिखर बैठक के बारे में श्री पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के रक्षा मंत्रालयों के बीच ‘निकट संपर्क’ बना हुआ है जो उनके बीच उच्चस्तरीय सामरिक साझेदारी का परिचायक है। उन्होंने कहा, “हमारे रक्षा मंत्रालयाें में बहुत निकट का संपर्क और सहयोग बना हुआ है। यह हमारी साझेदारी के अत्यंत उच्च रणनीतिक स्तर का परिचायक है।” समाचार एजेंसी तास की रिपोर्ट के अनुसार क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इससे पहले संवाददाताओं से कहा कि श्री पुतिन भारतीय प्रधानमंत्री के साथ सैन्य तकनीकी सहयोग पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने एकांत में इस बारे में बातचीत की है। अमेरिकी संसद द्वारा पारित अमेरिका से शत्रुता रखने वाले देशों पर प्रतिबंधात्मक कानून (कैट्स) के कारण ना केवल रूस के उद्योगों एवं कंपनियों को बल्कि रूसी कंपनियों के साथ काम करने वाली तृतीय विश्व के देशों की कंपनियों पर प्रतिबंध लगाये जा सकते हैं। इन कंपनियों में रूस की आधिकारिक शस्त्र व्यापार करने वाली कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट भी शामिल है। एक रिपोर्ट के अनुसार श्री मोदी और श्री पुतिन ने जिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की है उनमें रूस द्वारा भारत को सैन्य निर्यात को लेकर पूर्व में बनी सहमति के भविष्य का मुद्दा भी शामिल था। यह निर्यात 12 अरब डॉलर का है। गत माह चेन्नई में हुए डिफेंस एक्सपो में दोनों देशों की कंपनियों ने भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा उपयोग में लाये जा रहे रूसी रक्षा उपकरणों के कलपुर्ज़े बनाने के सात समझौतों पर हस्ताक्षर किये थे। रक्षा मंत्रालय ने 48 उपकरणों की पहचान की है जिन्हें रूस के सहयोग से भारत में बनाया जा सकता है। इन उपकरणों में हेलीकॉप्टर, विमान एवं नौसैनिक प्रणालियां शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार एकांत में वार्तालाप के दौरान श्री पुतिन ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक पटल पर दोनों देशों की संयुक्त गतिविधियों की सराहना की खासकर संयुक्त राष्ट्र, ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में। इस बीच रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि श्री पुतिन और श्री मोदी के बीच बातचीत बहुत सार्थक रही है और दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्तर पर विशिष्ट मुद्दों पर सहयोग के बारे में चर्चा की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह अनौपचारिक संवाद दोनों देशों के बीच सामरिक साझेदारी एवं विकास के लिए दिशा तय करने में सहायक सिद्ध होगा। श्री लावरोव ने कहा कि दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के मुद्दे पर भी विशेष ध्यान दिया और द्विपक्षीय व्यापार में सतत वृद्धि पर संतोष जाहिर किया। चालू वित्त वर्ष के शुरुआती माह में द्विपक्षीय व्यापार में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने अक्टूबर में भारत में होने वाली शिखर बैठक में आर्थिक तत्व की प्रधानता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाने के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा कि बातचीत में ऊर्जा क्षेत्र पर भी खासतौर पर चर्चा की गयी। दोनों नेताओं ने माना कि वर्ष 2017 में भारत को तेल निर्यात में दस गुनी वृद्धि हुई है। दोनों देशों की तेल कंपनियों के बीच सहयोग बढ़ाने के बारे में भी चर्चा की। दोनों देशों ने परमाणु ऊर्जा, सुरक्षा और उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी एशिया प्रशांत क्षेत्र में मिल कर काम करने के बारे में चर्चा की। श्री लावरोव ने कहा कि श्री पुतिन एवं श्री मोदी इस बात को लेकर संकल्पबद्ध हैं कि एशिया प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा एवं सहयोग का नया ढांचा निष्पक्ष सिद्धांतों, खुलेपन, समानता एवं समान सुरक्षा के पैमाने पर आधारित हो। दोनों नेताओं ने यूरेशियाई आर्थिक संघ और भारत के बीच संपर्क की अौपचारिकताएं पूरी होने पर संतोष व्यक्त किया। अक्टूबर में दोनों देशों के बीच यूरेशियाई आर्थिक संघ और भारत के मुक्त व्यापार प्रक्षेत्र बनाने के बारे में बातचीत शुरू होगी।">

पुतिन-मोदी ने सैन्य, तकनीकी तथा आर्थिक सहयोग पर की बातचीत

2018/05/22



सोची (रूस), प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने आज यहां अपने रक्षा संबंधों को प्रगाढ़ बनाये रखने के संकल्प के साथ ‘सैन्य एवं तकनीकी सहयोग’ तथा आर्थिक सहयोग बढ़ाने के बारे में चर्चा की। काला सागर के तट पर स्थित इस मशहूर पर्यटक स्थल पर दोनों नेताओं की अनौपचारिक शिखर बैठक के बारे में श्री पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के रक्षा मंत्रालयों के बीच ‘निकट संपर्क’ बना हुआ है जो उनके बीच उच्चस्तरीय सामरिक साझेदारी का परिचायक है। उन्होंने कहा, “हमारे रक्षा मंत्रालयाें में बहुत निकट का संपर्क और सहयोग बना हुआ है। यह हमारी साझेदारी के अत्यंत उच्च रणनीतिक स्तर का परिचायक है।” समाचार एजेंसी तास की रिपोर्ट के अनुसार क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इससे पहले संवाददाताओं से कहा कि श्री पुतिन भारतीय प्रधानमंत्री के साथ सैन्य तकनीकी सहयोग पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने एकांत में इस बारे में बातचीत की है। अमेरिकी संसद द्वारा पारित अमेरिका से शत्रुता रखने वाले देशों पर प्रतिबंधात्मक कानून (कैट्स) के कारण ना केवल रूस के उद्योगों एवं कंपनियों को बल्कि रूसी कंपनियों के साथ काम करने वाली तृतीय विश्व के देशों की कंपनियों पर प्रतिबंध लगाये जा सकते हैं। इन कंपनियों में रूस की आधिकारिक शस्त्र व्यापार करने वाली कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट भी शामिल है। एक रिपोर्ट के अनुसार श्री मोदी और श्री पुतिन ने जिन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की है उनमें रूस द्वारा भारत को सैन्य निर्यात को लेकर पूर्व में बनी सहमति के भविष्य का मुद्दा भी शामिल था। यह निर्यात 12 अरब डॉलर का है। गत माह चेन्नई में हुए डिफेंस एक्सपो में दोनों देशों की कंपनियों ने भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा उपयोग में लाये जा रहे रूसी रक्षा उपकरणों के कलपुर्ज़े बनाने के सात समझौतों पर हस्ताक्षर किये थे। रक्षा मंत्रालय ने 48 उपकरणों की पहचान की है जिन्हें रूस के सहयोग से भारत में बनाया जा सकता है। इन उपकरणों में हेलीकॉप्टर, विमान एवं नौसैनिक प्रणालियां शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार एकांत में वार्तालाप के दौरान श्री पुतिन ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक पटल पर दोनों देशों की संयुक्त गतिविधियों की सराहना की खासकर संयुक्त राष्ट्र, ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में। इस बीच रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि श्री पुतिन और श्री मोदी के बीच बातचीत बहुत सार्थक रही है और दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्तर पर विशिष्ट मुद्दों पर सहयोग के बारे में चर्चा की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह अनौपचारिक संवाद दोनों देशों के बीच सामरिक साझेदारी एवं विकास के लिए दिशा तय करने में सहायक सिद्ध होगा। श्री लावरोव ने कहा कि दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के मुद्दे पर भी विशेष ध्यान दिया और द्विपक्षीय व्यापार में सतत वृद्धि पर संतोष जाहिर किया। चालू वित्त वर्ष के शुरुआती माह में द्विपक्षीय व्यापार में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने अक्टूबर में भारत में होने वाली शिखर बैठक में आर्थिक तत्व की प्रधानता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाने के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा कि बातचीत में ऊर्जा क्षेत्र पर भी खासतौर पर चर्चा की गयी। दोनों नेताओं ने माना कि वर्ष 2017 में भारत को तेल निर्यात में दस गुनी वृद्धि हुई है। दोनों देशों की तेल कंपनियों के बीच सहयोग बढ़ाने के बारे में भी चर्चा की। दोनों देशों ने परमाणु ऊर्जा, सुरक्षा और उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी एशिया प्रशांत क्षेत्र में मिल कर काम करने के बारे में चर्चा की। श्री लावरोव ने कहा कि श्री पुतिन एवं श्री मोदी इस बात को लेकर संकल्पबद्ध हैं कि एशिया प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा एवं सहयोग का नया ढांचा निष्पक्ष सिद्धांतों, खुलेपन, समानता एवं समान सुरक्षा के पैमाने पर आधारित हो। दोनों नेताओं ने यूरेशियाई आर्थिक संघ और भारत के बीच संपर्क की अौपचारिकताएं पूरी होने पर संतोष व्यक्त किया। अक्टूबर में दोनों देशों के बीच यूरेशियाई आर्थिक संघ और भारत के मुक्त व्यापार प्रक्षेत्र बनाने के बारे में बातचीत शुरू होगी।


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