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पहले घटनाएं फिर आए सरकार के निर्णय

2017/12/30



नवभारत न्यूज भोपाल, कहा जाता है कि क्रिया की प्रतिक्रिया होती है. भौतिकी का यह सिद्धांत वर्ष 2017 में लागू हुआ दिखा. क्योंकि घटनाओं के बाद सरकार ने न केवल निर्णय लिये बल्कि इसके परिणाम भी दिखाई दिये. फिर चाहे गोलीकांड में मृत किसानों को एक-एक करोड़ की राशि देने का मामला हो या फिर किसानों से 8 रुपये किलो प्याज खरीद कर 2 रुपये में बेचने की कवायद. बहरहाल कई ऐसे निर्णय हैं जिससे जनता प्रभावित हुये बिना नहीं रह पाई. दंड विधि संशोधन विधेयक म.प्र. सरकार ने इस साल दंड विधि संशोधन विधेयक पेश कर देश में एक मिसाल पेश की. चूंकि 12 वर्ष से कम आयु की बालिका के मामले में आरोपी के लिये फांसी का प्रावधान किया गया है, इसलिये महिला सशक्तिकरण की दिशा में सुरक्षा का अभिनव प्रयास बताते हुये सरकार ने इसे बहु प्रचारित भी किया. लेकिन इसके पीछे भोपाल में पुलिस अधिकारी की बालिका के साथ हुई घटना कारण बनी, जिसने सरकार को हिला दिया. वजह यह भी रही कि इस दौरान आये एनसीआरबी के आंकड़ों में म.प्र. महिला अपराध के मामले में देशभर में अव्वल रहा है. क्रिया की प्रतिक्रिया 1-किसान आंदोलन मन्दसौर में किसानों ने आंदोलन किया. यह इतना उग्र हुआ कि इसे नियंत्रित करने के लिये पुलिस बल द्वारा चलाई गई गोली से 6 किसानों की मौत हो गई. घटना के बाद सरकार कटघरे में खड़ी हो गई. इस पर बतौर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की प्रतिक्रिया दशहरा मैदान में एक दिवसीय उपवास के रूप में आई. यहीं मृत किसानों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये की राशि के मुआवजे की घोषणा की गई. इसके प्रतिरोध में कांग्रेस के सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी टी.टी. नगर दशहरा मैदान में धरना दिया. 2- भावांतर योजना म.प्र. सरकार ने किसानों को उपज का वाजिब मूल्य देने भावांतर योजना लागू की. लेकिन इसके पीछे किसान आंदोलन तथा किसानों के बीच पनप रहे आक्रोश ही कारण रहा है, जिसके चलते सरकार ने यह योजना बनाई है. इससे पहले प्याज खरीदने के पीछे भी सरकार की मंशा किसानों द्वारा सड़क पर सब्जी, फल और दूध फेंककर विरोध दर्ज कराना रहा है. नर्मदा परिक्रमा चुनाव साल के मद्देनजर कार्यकर्ताओं तथा पदाधिकारियों को सक्रिय करने सत्ता पक्ष व विपक्ष के लिये नर्मदा व्यापक आधार के रूप में सामने आई है. अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नर्मदा सेवा मिशन शुरू किया तो यह यात्रा समाप्त होते हुये कांग्रेस के दिग्विजय सिंह (राज्यसभा सांसद) अपनी पत्नी अमृता सिंह के साथ नर्मदा परिक्रमा पर निकल पड़े. लिहाजा धर्म के मामले में दोनों ही एक-दूसरे को मात देते नजर आये. नई रेत नीति सरकार के सामने अवैध रेत उत्खनन का मुद्दा एक चुनौती के रूप में सामने था. लिहाजा सरकार ने रेत से जुड़े मुद्दे पर नया मसौदा बनाकर इसे व्यापक बनाने का प्रयास किया. लेकिन इसके पीछे समय-समय पर रेत खनन को लेकर उठने वाले सवाल ही रहे हैं. जिनके चलते सत्ता व संगठन से जुड़े कई जिम्मेदार आरोपी ठहराये जाते रहे हैं. यह बात अलग है कि नया नियम आया है तो किसके लिये, इस विषय पर कोई बोलने को तैयार नहीं है.


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