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जेपी अस्पताल में चिकित्सकों का टोटा, कतारों में फंस रहे मरीज भोपाल, शहर बीमारियों की चपेट में है जबकि राजधानी का जिला चिकित्सालय जेपी खुद बीमार है. रोजाना डेढ़ हजार के पार यहां ओपीडी संख्या है. पर्ची बनवाने के लिये मरीजों को एक से डेढ़ घंटे का समय गंवाना पड़ रहा है. अस्पताल के हालात ऐसे हैं कि चिकित्सकों की कमी से भी अस्पताल जूझ रहा है, वहीं कुछ चिकित्सक एवं स्टाफ छुट्टी पर चल रहा है. जे.पी. अस्पताल में मरीजों का कहना है कि लंबी-लंबी कतारों की वजह से पर्ची बनवाने में एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है और इतना ही समय डाक्टर को दिखाने में लगता है. उस पर भी अस्पताल के कई डाक्टर एक से दो घंटे ही ओपीडी में देते हैं. देर से आते हैं और जल्दी चले जाते हैं जबकि ओपीडी का समय सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक का है. इसके बाद एक ही लैब होने के कारण सेम्पल कलेक्शन में दो से तीन घंटे तक समय लग जाता है. जिस डाक्टर को मरीज दिखाने गया है यदि वह डाक्टर ओपीडी के समय से पूर्व चला जाता है तब फिर से पर्ची बनवाना पड़ता है, जिससे ओपीडी का समय हो जाता है और मरीज से कल आने का कह दिया जाता है.इससे मरीज का काफी समय खराब होता है. मरीज के स्वास्थ्य की स्थिति ज्यादा बिगडऩे पर इमरजेंसी जाना पड़ता है और वहां भी काफी संख्या में मरीजों की भीड़ होती है. ज्ञात हो कि जेपी अस्पताल में ओपीडी पंजीयन काउंटर 3 से 4 ही हैं.  जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. चुघ के मुताबिक वेतनमान कम होने के कारण नये डाक्टर्स सरकारी अस्पतालों में काम नहीं करना चाहते. यह भी एक समस्या है, जिसके कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है."/> जेपी अस्पताल में चिकित्सकों का टोटा, कतारों में फंस रहे मरीज भोपाल, शहर बीमारियों की चपेट में है जबकि राजधानी का जिला चिकित्सालय जेपी खुद बीमार है. रोजाना डेढ़ हजार के पार यहां ओपीडी संख्या है. पर्ची बनवाने के लिये मरीजों को एक से डेढ़ घंटे का समय गंवाना पड़ रहा है. अस्पताल के हालात ऐसे हैं कि चिकित्सकों की कमी से भी अस्पताल जूझ रहा है, वहीं कुछ चिकित्सक एवं स्टाफ छुट्टी पर चल रहा है. जे.पी. अस्पताल में मरीजों का कहना है कि लंबी-लंबी कतारों की वजह से पर्ची बनवाने में एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है और इतना ही समय डाक्टर को दिखाने में लगता है. उस पर भी अस्पताल के कई डाक्टर एक से दो घंटे ही ओपीडी में देते हैं. देर से आते हैं और जल्दी चले जाते हैं जबकि ओपीडी का समय सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक का है. इसके बाद एक ही लैब होने के कारण सेम्पल कलेक्शन में दो से तीन घंटे तक समय लग जाता है. जिस डाक्टर को मरीज दिखाने गया है यदि वह डाक्टर ओपीडी के समय से पूर्व चला जाता है तब फिर से पर्ची बनवाना पड़ता है, जिससे ओपीडी का समय हो जाता है और मरीज से कल आने का कह दिया जाता है.इससे मरीज का काफी समय खराब होता है. मरीज के स्वास्थ्य की स्थिति ज्यादा बिगडऩे पर इमरजेंसी जाना पड़ता है और वहां भी काफी संख्या में मरीजों की भीड़ होती है. ज्ञात हो कि जेपी अस्पताल में ओपीडी पंजीयन काउंटर 3 से 4 ही हैं.  जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. चुघ के मुताबिक वेतनमान कम होने के कारण नये डाक्टर्स सरकारी अस्पतालों में काम नहीं करना चाहते. यह भी एक समस्या है, जिसके कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है."/> जेपी अस्पताल में चिकित्सकों का टोटा, कतारों में फंस रहे मरीज भोपाल, शहर बीमारियों की चपेट में है जबकि राजधानी का जिला चिकित्सालय जेपी खुद बीमार है. रोजाना डेढ़ हजार के पार यहां ओपीडी संख्या है. पर्ची बनवाने के लिये मरीजों को एक से डेढ़ घंटे का समय गंवाना पड़ रहा है. अस्पताल के हालात ऐसे हैं कि चिकित्सकों की कमी से भी अस्पताल जूझ रहा है, वहीं कुछ चिकित्सक एवं स्टाफ छुट्टी पर चल रहा है. जे.पी. अस्पताल में मरीजों का कहना है कि लंबी-लंबी कतारों की वजह से पर्ची बनवाने में एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है और इतना ही समय डाक्टर को दिखाने में लगता है. उस पर भी अस्पताल के कई डाक्टर एक से दो घंटे ही ओपीडी में देते हैं. देर से आते हैं और जल्दी चले जाते हैं जबकि ओपीडी का समय सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक का है. इसके बाद एक ही लैब होने के कारण सेम्पल कलेक्शन में दो से तीन घंटे तक समय लग जाता है. जिस डाक्टर को मरीज दिखाने गया है यदि वह डाक्टर ओपीडी के समय से पूर्व चला जाता है तब फिर से पर्ची बनवाना पड़ता है, जिससे ओपीडी का समय हो जाता है और मरीज से कल आने का कह दिया जाता है.इससे मरीज का काफी समय खराब होता है. मरीज के स्वास्थ्य की स्थिति ज्यादा बिगडऩे पर इमरजेंसी जाना पड़ता है और वहां भी काफी संख्या में मरीजों की भीड़ होती है. ज्ञात हो कि जेपी अस्पताल में ओपीडी पंजीयन काउंटर 3 से 4 ही हैं.  जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. चुघ के मुताबिक वेतनमान कम होने के कारण नये डाक्टर्स सरकारी अस्पतालों में काम नहीं करना चाहते. यह भी एक समस्या है, जिसके कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है.">

पर्ची बनवाने परेशान हो रहे मरीज

2017/11/22



जेपी अस्पताल में चिकित्सकों का टोटा, कतारों में फंस रहे मरीज भोपाल, शहर बीमारियों की चपेट में है जबकि राजधानी का जिला चिकित्सालय जेपी खुद बीमार है. रोजाना डेढ़ हजार के पार यहां ओपीडी संख्या है. पर्ची बनवाने के लिये मरीजों को एक से डेढ़ घंटे का समय गंवाना पड़ रहा है. अस्पताल के हालात ऐसे हैं कि चिकित्सकों की कमी से भी अस्पताल जूझ रहा है, वहीं कुछ चिकित्सक एवं स्टाफ छुट्टी पर चल रहा है. जे.पी. अस्पताल में मरीजों का कहना है कि लंबी-लंबी कतारों की वजह से पर्ची बनवाने में एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है और इतना ही समय डाक्टर को दिखाने में लगता है. उस पर भी अस्पताल के कई डाक्टर एक से दो घंटे ही ओपीडी में देते हैं. देर से आते हैं और जल्दी चले जाते हैं जबकि ओपीडी का समय सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक का है. इसके बाद एक ही लैब होने के कारण सेम्पल कलेक्शन में दो से तीन घंटे तक समय लग जाता है. जिस डाक्टर को मरीज दिखाने गया है यदि वह डाक्टर ओपीडी के समय से पूर्व चला जाता है तब फिर से पर्ची बनवाना पड़ता है, जिससे ओपीडी का समय हो जाता है और मरीज से कल आने का कह दिया जाता है.इससे मरीज का काफी समय खराब होता है. मरीज के स्वास्थ्य की स्थिति ज्यादा बिगडऩे पर इमरजेंसी जाना पड़ता है और वहां भी काफी संख्या में मरीजों की भीड़ होती है. ज्ञात हो कि जेपी अस्पताल में ओपीडी पंजीयन काउंटर 3 से 4 ही हैं.  जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. चुघ के मुताबिक वेतनमान कम होने के कारण नये डाक्टर्स सरकारी अस्पतालों में काम नहीं करना चाहते. यह भी एक समस्या है, जिसके कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है.


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