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नई दिल्ली , नेशनल हेराल्ड समूह के संपादक संपादक नीलाभ मिश्र का आज चेन्नई में निधन हो गया। वह 57 वर्ष के थे । आउटलुक (हिन्दी)के पूर्व संपादक श्री मिश्र पिछले एक साल से बीमार चल रहे थे। पहले वह दिल्ली के आयुर्विज्ञान अस्पताल में भर्ती थे। लीवर प्रत्यर्पण के लिए उन्हें चेन्नई के ओपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उन्होंने सुबह साढ़े सात बजे अंतिम सांस ली। श्री मिश्र के परिवार में पत्नी कविता श्रीवास्तव हैं। वह प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। सोलह जून 1960 को बिहार के पटना में जन्मे श्री मिश्र ने पटना काॅलेज से बी ए (अंग्रेजी आॅनर्स )करने के बाद दिल्ली विश्विद्यालय से अंग्रेजी में एम ए किया। उन्होंने 84 में नवभारत टाइम्स से पत्रकारिता शुरू की थी और पटना तथा जयपुर संस्करण में कार्य करने के बाद जयपुर में इनाडु समूह से जुड़ गए। आउटलुक हिंदी के प्रकाशन पर वह दिल्ली आ गए और बाद में उसके संपादक बने। इसके बाद वह नेशनल हेराल्ड अखबार समूह के संपादक नियुक्त हुए। वह हिंदी और अंग्रेजी दोनों में लिखते थे। इसके अलावा उन्होंने हिंदी में महत्वपूर्ण आलोचनाएं भी लिखीं। वह देश में मानवाधिकार आंदोलन तथा कई सामाजिक आंदोलन से भी जुड़े थे। साहित्य और संस्कृति में उनकी गहरी रुचि थी।"/> नई दिल्ली , नेशनल हेराल्ड समूह के संपादक संपादक नीलाभ मिश्र का आज चेन्नई में निधन हो गया। वह 57 वर्ष के थे । आउटलुक (हिन्दी)के पूर्व संपादक श्री मिश्र पिछले एक साल से बीमार चल रहे थे। पहले वह दिल्ली के आयुर्विज्ञान अस्पताल में भर्ती थे। लीवर प्रत्यर्पण के लिए उन्हें चेन्नई के ओपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उन्होंने सुबह साढ़े सात बजे अंतिम सांस ली। श्री मिश्र के परिवार में पत्नी कविता श्रीवास्तव हैं। वह प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। सोलह जून 1960 को बिहार के पटना में जन्मे श्री मिश्र ने पटना काॅलेज से बी ए (अंग्रेजी आॅनर्स )करने के बाद दिल्ली विश्विद्यालय से अंग्रेजी में एम ए किया। उन्होंने 84 में नवभारत टाइम्स से पत्रकारिता शुरू की थी और पटना तथा जयपुर संस्करण में कार्य करने के बाद जयपुर में इनाडु समूह से जुड़ गए। आउटलुक हिंदी के प्रकाशन पर वह दिल्ली आ गए और बाद में उसके संपादक बने। इसके बाद वह नेशनल हेराल्ड अखबार समूह के संपादक नियुक्त हुए। वह हिंदी और अंग्रेजी दोनों में लिखते थे। इसके अलावा उन्होंने हिंदी में महत्वपूर्ण आलोचनाएं भी लिखीं। वह देश में मानवाधिकार आंदोलन तथा कई सामाजिक आंदोलन से भी जुड़े थे। साहित्य और संस्कृति में उनकी गहरी रुचि थी।"/> नई दिल्ली , नेशनल हेराल्ड समूह के संपादक संपादक नीलाभ मिश्र का आज चेन्नई में निधन हो गया। वह 57 वर्ष के थे । आउटलुक (हिन्दी)के पूर्व संपादक श्री मिश्र पिछले एक साल से बीमार चल रहे थे। पहले वह दिल्ली के आयुर्विज्ञान अस्पताल में भर्ती थे। लीवर प्रत्यर्पण के लिए उन्हें चेन्नई के ओपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उन्होंने सुबह साढ़े सात बजे अंतिम सांस ली। श्री मिश्र के परिवार में पत्नी कविता श्रीवास्तव हैं। वह प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। सोलह जून 1960 को बिहार के पटना में जन्मे श्री मिश्र ने पटना काॅलेज से बी ए (अंग्रेजी आॅनर्स )करने के बाद दिल्ली विश्विद्यालय से अंग्रेजी में एम ए किया। उन्होंने 84 में नवभारत टाइम्स से पत्रकारिता शुरू की थी और पटना तथा जयपुर संस्करण में कार्य करने के बाद जयपुर में इनाडु समूह से जुड़ गए। आउटलुक हिंदी के प्रकाशन पर वह दिल्ली आ गए और बाद में उसके संपादक बने। इसके बाद वह नेशनल हेराल्ड अखबार समूह के संपादक नियुक्त हुए। वह हिंदी और अंग्रेजी दोनों में लिखते थे। इसके अलावा उन्होंने हिंदी में महत्वपूर्ण आलोचनाएं भी लिखीं। वह देश में मानवाधिकार आंदोलन तथा कई सामाजिक आंदोलन से भी जुड़े थे। साहित्य और संस्कृति में उनकी गहरी रुचि थी।">

नेशनल हेराल्ड के संपादक नीलाभ मिश्र का निधन

2018/02/24



नई दिल्ली , नेशनल हेराल्ड समूह के संपादक संपादक नीलाभ मिश्र का आज चेन्नई में निधन हो गया। वह 57 वर्ष के थे । आउटलुक (हिन्दी)के पूर्व संपादक श्री मिश्र पिछले एक साल से बीमार चल रहे थे। पहले वह दिल्ली के आयुर्विज्ञान अस्पताल में भर्ती थे। लीवर प्रत्यर्पण के लिए उन्हें चेन्नई के ओपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उन्होंने सुबह साढ़े सात बजे अंतिम सांस ली। श्री मिश्र के परिवार में पत्नी कविता श्रीवास्तव हैं। वह प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। सोलह जून 1960 को बिहार के पटना में जन्मे श्री मिश्र ने पटना काॅलेज से बी ए (अंग्रेजी आॅनर्स )करने के बाद दिल्ली विश्विद्यालय से अंग्रेजी में एम ए किया। उन्होंने 84 में नवभारत टाइम्स से पत्रकारिता शुरू की थी और पटना तथा जयपुर संस्करण में कार्य करने के बाद जयपुर में इनाडु समूह से जुड़ गए। आउटलुक हिंदी के प्रकाशन पर वह दिल्ली आ गए और बाद में उसके संपादक बने। इसके बाद वह नेशनल हेराल्ड अखबार समूह के संपादक नियुक्त हुए। वह हिंदी और अंग्रेजी दोनों में लिखते थे। इसके अलावा उन्होंने हिंदी में महत्वपूर्ण आलोचनाएं भी लिखीं। वह देश में मानवाधिकार आंदोलन तथा कई सामाजिक आंदोलन से भी जुड़े थे। साहित्य और संस्कृति में उनकी गहरी रुचि थी।


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