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अाजमगढ 06 फरवरी (वार्ता) नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के ड्राइवर रहे आजाद हिंद फौज के कर्नल निजामुद्दीन का आज यहां निधन हो गया। कर्नल निजामुद्दीन की उम्र 107 वर्ष से ज्यादा थी। लम्बे समय से बीमार चल रहे वयोवृद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ने अपने पैतृक गांव ढकवा में अंतिम सांस ली। उनके परिवार में पत्नी, तीन बेटे और दो बेटियां हैं। उनके दो बेटे बाहर सऊदी अरब और मुम्बई में हैं जबकि बडा बेटा शेख अकरम उन्हीं के पास रहता था। परिजनों के मुताबिक उनका अंतिम संस्कार गांव के ही कब्रिस्तान में किया जायेगा। निजामुद्दीन ने नेताजी की मृत्यु 1945 में हवाई जहाज की दुर्घटना में होने से इन्कार किया था। उन्होंने नेताजी की मृत्यु की जांच के लिए बने आयोगो से भी यही कहा था। उनका कहना था कि हवाई दुर्घटना के बाद भी वह नेताजी से मिले थे तो ये कैसे मान लिया जाये कि उनकी मृत्यु उस दुर्घटना में हुई थी। निजामुद्दीन 1942 में ब्रिटिश सेना में शामिल होकर सिंगापुर चले गये लेकिन कुछ ही समय बाद वह आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गये। वह नेताजी के ड्राइवर और अंगरक्षक थे। उनका वास्तविक नाम सैफुद्दीन था लेकिन खुफिया संगठन आइएनए में भर्ती होने के बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर निजामुद्दीन रख लिया था। वह 1969 में आजमगढ लौट आये। उनके परिजनों के अनुसार नेताजी के साथ कहीं जाते समय 1944 में निजामुद्दीन को बर्मा के जंगलाें में गोली लग गयी थी। नेताजी ने उन्हें कर्नल उप नाम दिया था। 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान वाराणसी के एक रैली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनसे मुलाकात की थी। उनका आशीर्वाद लिया था।"/> अाजमगढ 06 फरवरी (वार्ता) नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के ड्राइवर रहे आजाद हिंद फौज के कर्नल निजामुद्दीन का आज यहां निधन हो गया। कर्नल निजामुद्दीन की उम्र 107 वर्ष से ज्यादा थी। लम्बे समय से बीमार चल रहे वयोवृद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ने अपने पैतृक गांव ढकवा में अंतिम सांस ली। उनके परिवार में पत्नी, तीन बेटे और दो बेटियां हैं। उनके दो बेटे बाहर सऊदी अरब और मुम्बई में हैं जबकि बडा बेटा शेख अकरम उन्हीं के पास रहता था। परिजनों के मुताबिक उनका अंतिम संस्कार गांव के ही कब्रिस्तान में किया जायेगा। निजामुद्दीन ने नेताजी की मृत्यु 1945 में हवाई जहाज की दुर्घटना में होने से इन्कार किया था। उन्होंने नेताजी की मृत्यु की जांच के लिए बने आयोगो से भी यही कहा था। उनका कहना था कि हवाई दुर्घटना के बाद भी वह नेताजी से मिले थे तो ये कैसे मान लिया जाये कि उनकी मृत्यु उस दुर्घटना में हुई थी। निजामुद्दीन 1942 में ब्रिटिश सेना में शामिल होकर सिंगापुर चले गये लेकिन कुछ ही समय बाद वह आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गये। वह नेताजी के ड्राइवर और अंगरक्षक थे। उनका वास्तविक नाम सैफुद्दीन था लेकिन खुफिया संगठन आइएनए में भर्ती होने के बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर निजामुद्दीन रख लिया था। वह 1969 में आजमगढ लौट आये। उनके परिजनों के अनुसार नेताजी के साथ कहीं जाते समय 1944 में निजामुद्दीन को बर्मा के जंगलाें में गोली लग गयी थी। नेताजी ने उन्हें कर्नल उप नाम दिया था। 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान वाराणसी के एक रैली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनसे मुलाकात की थी। उनका आशीर्वाद लिया था।"/> अाजमगढ 06 फरवरी (वार्ता) नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के ड्राइवर रहे आजाद हिंद फौज के कर्नल निजामुद्दीन का आज यहां निधन हो गया। कर्नल निजामुद्दीन की उम्र 107 वर्ष से ज्यादा थी। लम्बे समय से बीमार चल रहे वयोवृद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ने अपने पैतृक गांव ढकवा में अंतिम सांस ली। उनके परिवार में पत्नी, तीन बेटे और दो बेटियां हैं। उनके दो बेटे बाहर सऊदी अरब और मुम्बई में हैं जबकि बडा बेटा शेख अकरम उन्हीं के पास रहता था। परिजनों के मुताबिक उनका अंतिम संस्कार गांव के ही कब्रिस्तान में किया जायेगा। निजामुद्दीन ने नेताजी की मृत्यु 1945 में हवाई जहाज की दुर्घटना में होने से इन्कार किया था। उन्होंने नेताजी की मृत्यु की जांच के लिए बने आयोगो से भी यही कहा था। उनका कहना था कि हवाई दुर्घटना के बाद भी वह नेताजी से मिले थे तो ये कैसे मान लिया जाये कि उनकी मृत्यु उस दुर्घटना में हुई थी। निजामुद्दीन 1942 में ब्रिटिश सेना में शामिल होकर सिंगापुर चले गये लेकिन कुछ ही समय बाद वह आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गये। वह नेताजी के ड्राइवर और अंगरक्षक थे। उनका वास्तविक नाम सैफुद्दीन था लेकिन खुफिया संगठन आइएनए में भर्ती होने के बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर निजामुद्दीन रख लिया था। वह 1969 में आजमगढ लौट आये। उनके परिजनों के अनुसार नेताजी के साथ कहीं जाते समय 1944 में निजामुद्दीन को बर्मा के जंगलाें में गोली लग गयी थी। नेताजी ने उन्हें कर्नल उप नाम दिया था। 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान वाराणसी के एक रैली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनसे मुलाकात की थी। उनका आशीर्वाद लिया था।">

नहीं रहे नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के ड्राइवर 107 वर्ष के कर्नल निजामुद्दीन

2017/02/06



अाजमगढ 06 फरवरी (वार्ता) नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के ड्राइवर रहे आजाद हिंद फौज के कर्नल निजामुद्दीन का आज यहां निधन हो गया। कर्नल निजामुद्दीन की उम्र 107 वर्ष से ज्यादा थी। लम्बे समय से बीमार चल रहे वयोवृद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ने अपने पैतृक गांव ढकवा में अंतिम सांस ली। उनके परिवार में पत्नी, तीन बेटे और दो बेटियां हैं। उनके दो बेटे बाहर सऊदी अरब और मुम्बई में हैं जबकि बडा बेटा शेख अकरम उन्हीं के पास रहता था। परिजनों के मुताबिक उनका अंतिम संस्कार गांव के ही कब्रिस्तान में किया जायेगा। निजामुद्दीन ने नेताजी की मृत्यु 1945 में हवाई जहाज की दुर्घटना में होने से इन्कार किया था। उन्होंने नेताजी की मृत्यु की जांच के लिए बने आयोगो से भी यही कहा था। उनका कहना था कि हवाई दुर्घटना के बाद भी वह नेताजी से मिले थे तो ये कैसे मान लिया जाये कि उनकी मृत्यु उस दुर्घटना में हुई थी। निजामुद्दीन 1942 में ब्रिटिश सेना में शामिल होकर सिंगापुर चले गये लेकिन कुछ ही समय बाद वह आजाद हिंद फौज में भर्ती हो गये। वह नेताजी के ड्राइवर और अंगरक्षक थे। उनका वास्तविक नाम सैफुद्दीन था लेकिन खुफिया संगठन आइएनए में भर्ती होने के बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर निजामुद्दीन रख लिया था। वह 1969 में आजमगढ लौट आये। उनके परिजनों के अनुसार नेताजी के साथ कहीं जाते समय 1944 में निजामुद्दीन को बर्मा के जंगलाें में गोली लग गयी थी। नेताजी ने उन्हें कर्नल उप नाम दिया था। 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान वाराणसी के एक रैली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनसे मुलाकात की थी। उनका आशीर्वाद लिया था।


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