Breaking News :

हमीदिया अस्पताल ने चिल्ड्रन्स डे पर बच्चों को दिया तोहफा भोपाल, हमीदिया अस्पताल के पीडियाट्रिक और मेडीसिन विभाग ने मिलकर डायबिटीज रोग पीडि़त बच्चों की विशेष जांच और चिकित्सा करने के उद्देश्य से डायबिटीज क्लीनिक आरंभ करने की घोषणा की है. यह क्लीनिक अस्पताल के पीडियाट्रिक विभाग में चिल्ड्रंस डे 14 नवंबर से काम करना आरंभ कर देगी. अस्पताल प्रबंधन की कोशिश आने वाले समय में इस क्लीनिक को एम्स, नईदिल्ली में मौजूद डायबिटीज इन यंग क्लीनिक की तरह बनाने की रहेगी, जहां हार्मोन लैब से लेकर छोटे बच्चों को इंसुलिन देने तक इलाज की तमाम व्यवस्थाएं मौजूद हैं. उक्त जानकारी वल्र्ड डायबिटीज डे की पूर्व संध्या पर आयोजित एक पत्रकार वार्ता में असिस्टेंट प्रोफेसर, गांधी मेडीकल कॉलेज डॉ. सचिन चित्तावर, पीडियाट्रिशियन डॉ. जयश्री नाडकर्णी, मेडीसिन विभाग के प्रमुख डॉ. केके कावरे तथा डीन प्रोफेसर एमसी सोनगरा ने दी. डॉ. चित्तावर ने बताया कि डायबिटीज के 100 मरीजों में से लगभग 10 मरीज टाईप वन डायबिटीज के मरीज होते हैं तथा इसमें से अधिकांश मरीज बच्चे होते हैं. शरीर में जब इंसुलिन बनाने की क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाती है तब इस अवस्था को टाइप वन डायबिटीज माना जाता है. यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है. भारत में तीन में से दो टाइप वन डायबिटीज के मामले कीटोएसिडोसिस जैसी जानलेवा अवस्था में सामने आते हैं. डा. ज्योत्सना ने बताया कि कमजोर सामाजिक व आर्थिक पृष्ठभूमि के मरीजों पर इलाज का खर्च परेशान करने वाला होता है. ऐसे मरीजों के लिए इंसुलिन, इंसुलिन इंजेक्शन, ग्लूकोमीटर आदि की निशुल्क व्यवस्था के लिए सरकारी एवं निजी दोनों ही क्षेत्रों को आगे आना होगा उन्होंने यह भी कहा कि विशेष रूप से प्रशिक्षित चिकित्सकों की कमी देखते हुए उनका प्रयास होगा कि जूनियर डॉक्टरों के साथ साथ डीएम पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में प्रशिक्षित किया जाकर विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर किया जाए. डॉ. कावरे ने कहा कि मोटापे व खानपान की बदलती आदतों से बच्चों में टाइप टू डायबिटीज का खतरा बढ़ रहा है. इस बात को ध्यान में रखते हुए आने वाले समय में स्कूलों में जाकर भी बच्चों की जांच एवं जागरूकता कार्यक्रम चलाये जाएंगे ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चों को इस रोग की चपेट में आने से बचाया जा सके. प्रोफेसर एमसी सोनगरा ने कहा कि 10 में से एक महिला डायबिटीज की शिकार है. टाइप 2 डायबिटीज से पीडि़त महिलाओं को दिल की बीमारी होने की 10 गुना संभावना रहती है. उचित इलाज के अभाव में इसके मरीजों को आंख व किडनी से जड़ी समस्याएं उत्पन्न हो जाती है जिससे उनका इलाज करना और कठिन हो जाता है."/> हमीदिया अस्पताल ने चिल्ड्रन्स डे पर बच्चों को दिया तोहफा भोपाल, हमीदिया अस्पताल के पीडियाट्रिक और मेडीसिन विभाग ने मिलकर डायबिटीज रोग पीडि़त बच्चों की विशेष जांच और चिकित्सा करने के उद्देश्य से डायबिटीज क्लीनिक आरंभ करने की घोषणा की है. यह क्लीनिक अस्पताल के पीडियाट्रिक विभाग में चिल्ड्रंस डे 14 नवंबर से काम करना आरंभ कर देगी. अस्पताल प्रबंधन की कोशिश आने वाले समय में इस क्लीनिक को एम्स, नईदिल्ली में मौजूद डायबिटीज इन यंग क्लीनिक की तरह बनाने की रहेगी, जहां हार्मोन लैब से लेकर छोटे बच्चों को इंसुलिन देने तक इलाज की तमाम व्यवस्थाएं मौजूद हैं. उक्त जानकारी वल्र्ड डायबिटीज डे की पूर्व संध्या पर आयोजित एक पत्रकार वार्ता में असिस्टेंट प्रोफेसर, गांधी मेडीकल कॉलेज डॉ. सचिन चित्तावर, पीडियाट्रिशियन डॉ. जयश्री नाडकर्णी, मेडीसिन विभाग के प्रमुख डॉ. केके कावरे तथा डीन प्रोफेसर एमसी सोनगरा ने दी. डॉ. चित्तावर ने बताया कि डायबिटीज के 100 मरीजों में से लगभग 10 मरीज टाईप वन डायबिटीज के मरीज होते हैं तथा इसमें से अधिकांश मरीज बच्चे होते हैं. शरीर में जब इंसुलिन बनाने की क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाती है तब इस अवस्था को टाइप वन डायबिटीज माना जाता है. यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है. भारत में तीन में से दो टाइप वन डायबिटीज के मामले कीटोएसिडोसिस जैसी जानलेवा अवस्था में सामने आते हैं. डा. ज्योत्सना ने बताया कि कमजोर सामाजिक व आर्थिक पृष्ठभूमि के मरीजों पर इलाज का खर्च परेशान करने वाला होता है. ऐसे मरीजों के लिए इंसुलिन, इंसुलिन इंजेक्शन, ग्लूकोमीटर आदि की निशुल्क व्यवस्था के लिए सरकारी एवं निजी दोनों ही क्षेत्रों को आगे आना होगा उन्होंने यह भी कहा कि विशेष रूप से प्रशिक्षित चिकित्सकों की कमी देखते हुए उनका प्रयास होगा कि जूनियर डॉक्टरों के साथ साथ डीएम पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में प्रशिक्षित किया जाकर विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर किया जाए. डॉ. कावरे ने कहा कि मोटापे व खानपान की बदलती आदतों से बच्चों में टाइप टू डायबिटीज का खतरा बढ़ रहा है. इस बात को ध्यान में रखते हुए आने वाले समय में स्कूलों में जाकर भी बच्चों की जांच एवं जागरूकता कार्यक्रम चलाये जाएंगे ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चों को इस रोग की चपेट में आने से बचाया जा सके. प्रोफेसर एमसी सोनगरा ने कहा कि 10 में से एक महिला डायबिटीज की शिकार है. टाइप 2 डायबिटीज से पीडि़त महिलाओं को दिल की बीमारी होने की 10 गुना संभावना रहती है. उचित इलाज के अभाव में इसके मरीजों को आंख व किडनी से जड़ी समस्याएं उत्पन्न हो जाती है जिससे उनका इलाज करना और कठिन हो जाता है."/> हमीदिया अस्पताल ने चिल्ड्रन्स डे पर बच्चों को दिया तोहफा भोपाल, हमीदिया अस्पताल के पीडियाट्रिक और मेडीसिन विभाग ने मिलकर डायबिटीज रोग पीडि़त बच्चों की विशेष जांच और चिकित्सा करने के उद्देश्य से डायबिटीज क्लीनिक आरंभ करने की घोषणा की है. यह क्लीनिक अस्पताल के पीडियाट्रिक विभाग में चिल्ड्रंस डे 14 नवंबर से काम करना आरंभ कर देगी. अस्पताल प्रबंधन की कोशिश आने वाले समय में इस क्लीनिक को एम्स, नईदिल्ली में मौजूद डायबिटीज इन यंग क्लीनिक की तरह बनाने की रहेगी, जहां हार्मोन लैब से लेकर छोटे बच्चों को इंसुलिन देने तक इलाज की तमाम व्यवस्थाएं मौजूद हैं. उक्त जानकारी वल्र्ड डायबिटीज डे की पूर्व संध्या पर आयोजित एक पत्रकार वार्ता में असिस्टेंट प्रोफेसर, गांधी मेडीकल कॉलेज डॉ. सचिन चित्तावर, पीडियाट्रिशियन डॉ. जयश्री नाडकर्णी, मेडीसिन विभाग के प्रमुख डॉ. केके कावरे तथा डीन प्रोफेसर एमसी सोनगरा ने दी. डॉ. चित्तावर ने बताया कि डायबिटीज के 100 मरीजों में से लगभग 10 मरीज टाईप वन डायबिटीज के मरीज होते हैं तथा इसमें से अधिकांश मरीज बच्चे होते हैं. शरीर में जब इंसुलिन बनाने की क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाती है तब इस अवस्था को टाइप वन डायबिटीज माना जाता है. यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है. भारत में तीन में से दो टाइप वन डायबिटीज के मामले कीटोएसिडोसिस जैसी जानलेवा अवस्था में सामने आते हैं. डा. ज्योत्सना ने बताया कि कमजोर सामाजिक व आर्थिक पृष्ठभूमि के मरीजों पर इलाज का खर्च परेशान करने वाला होता है. ऐसे मरीजों के लिए इंसुलिन, इंसुलिन इंजेक्शन, ग्लूकोमीटर आदि की निशुल्क व्यवस्था के लिए सरकारी एवं निजी दोनों ही क्षेत्रों को आगे आना होगा उन्होंने यह भी कहा कि विशेष रूप से प्रशिक्षित चिकित्सकों की कमी देखते हुए उनका प्रयास होगा कि जूनियर डॉक्टरों के साथ साथ डीएम पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में प्रशिक्षित किया जाकर विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर किया जाए. डॉ. कावरे ने कहा कि मोटापे व खानपान की बदलती आदतों से बच्चों में टाइप टू डायबिटीज का खतरा बढ़ रहा है. इस बात को ध्यान में रखते हुए आने वाले समय में स्कूलों में जाकर भी बच्चों की जांच एवं जागरूकता कार्यक्रम चलाये जाएंगे ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चों को इस रोग की चपेट में आने से बचाया जा सके. प्रोफेसर एमसी सोनगरा ने कहा कि 10 में से एक महिला डायबिटीज की शिकार है. टाइप 2 डायबिटीज से पीडि़त महिलाओं को दिल की बीमारी होने की 10 गुना संभावना रहती है. उचित इलाज के अभाव में इसके मरीजों को आंख व किडनी से जड़ी समस्याएं उत्पन्न हो जाती है जिससे उनका इलाज करना और कठिन हो जाता है.">

डायबेटिक बच्चों के लिये खुलेगी विशेष क्लीनिक

2017/11/14



हमीदिया अस्पताल ने चिल्ड्रन्स डे पर बच्चों को दिया तोहफा भोपाल, हमीदिया अस्पताल के पीडियाट्रिक और मेडीसिन विभाग ने मिलकर डायबिटीज रोग पीडि़त बच्चों की विशेष जांच और चिकित्सा करने के उद्देश्य से डायबिटीज क्लीनिक आरंभ करने की घोषणा की है. यह क्लीनिक अस्पताल के पीडियाट्रिक विभाग में चिल्ड्रंस डे 14 नवंबर से काम करना आरंभ कर देगी. अस्पताल प्रबंधन की कोशिश आने वाले समय में इस क्लीनिक को एम्स, नईदिल्ली में मौजूद डायबिटीज इन यंग क्लीनिक की तरह बनाने की रहेगी, जहां हार्मोन लैब से लेकर छोटे बच्चों को इंसुलिन देने तक इलाज की तमाम व्यवस्थाएं मौजूद हैं. उक्त जानकारी वल्र्ड डायबिटीज डे की पूर्व संध्या पर आयोजित एक पत्रकार वार्ता में असिस्टेंट प्रोफेसर, गांधी मेडीकल कॉलेज डॉ. सचिन चित्तावर, पीडियाट्रिशियन डॉ. जयश्री नाडकर्णी, मेडीसिन विभाग के प्रमुख डॉ. केके कावरे तथा डीन प्रोफेसर एमसी सोनगरा ने दी. डॉ. चित्तावर ने बताया कि डायबिटीज के 100 मरीजों में से लगभग 10 मरीज टाईप वन डायबिटीज के मरीज होते हैं तथा इसमें से अधिकांश मरीज बच्चे होते हैं. शरीर में जब इंसुलिन बनाने की क्षमता पूरी तरह खत्म हो जाती है तब इस अवस्था को टाइप वन डायबिटीज माना जाता है. यह किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है. भारत में तीन में से दो टाइप वन डायबिटीज के मामले कीटोएसिडोसिस जैसी जानलेवा अवस्था में सामने आते हैं. डा. ज्योत्सना ने बताया कि कमजोर सामाजिक व आर्थिक पृष्ठभूमि के मरीजों पर इलाज का खर्च परेशान करने वाला होता है. ऐसे मरीजों के लिए इंसुलिन, इंसुलिन इंजेक्शन, ग्लूकोमीटर आदि की निशुल्क व्यवस्था के लिए सरकारी एवं निजी दोनों ही क्षेत्रों को आगे आना होगा उन्होंने यह भी कहा कि विशेष रूप से प्रशिक्षित चिकित्सकों की कमी देखते हुए उनका प्रयास होगा कि जूनियर डॉक्टरों के साथ साथ डीएम पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में प्रशिक्षित किया जाकर विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर किया जाए. डॉ. कावरे ने कहा कि मोटापे व खानपान की बदलती आदतों से बच्चों में टाइप टू डायबिटीज का खतरा बढ़ रहा है. इस बात को ध्यान में रखते हुए आने वाले समय में स्कूलों में जाकर भी बच्चों की जांच एवं जागरूकता कार्यक्रम चलाये जाएंगे ताकि ज्यादा से ज्यादा बच्चों को इस रोग की चपेट में आने से बचाया जा सके. प्रोफेसर एमसी सोनगरा ने कहा कि 10 में से एक महिला डायबिटीज की शिकार है. टाइप 2 डायबिटीज से पीडि़त महिलाओं को दिल की बीमारी होने की 10 गुना संभावना रहती है. उचित इलाज के अभाव में इसके मरीजों को आंख व किडनी से जड़ी समस्याएं उत्पन्न हो जाती है जिससे उनका इलाज करना और कठिन हो जाता है.


Opinions expressed in the comments are not reflective of Nava Bharat. Comments are moderated automatically.

Related Posts