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वाशिंगटन, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज एक बार फिर से ईरान से संबंधित परमाणु समझौते से संबंध में बड़ा बयान देते हुए कहा कि वह ईरान पर लगे परमाणु प्रतिबंधों में आखिरी बार डील दे रहे हैं, ताकि यूरोप और अमेरिका इस परमाणु समझौते की 'भीषण खामियों' को दूर कर सकें। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार श्री ट्रंप ने 120 दिनों के लिए ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील दी है।अमेरिका चाहता है कि यूरोपीय संघ के हस्ताक्षरकर्ता देश, ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पर स्थायी पाबंदियां लगाने पर सहमत हो जाएं।वर्तमान समझौते के अंतर्गत इनकी अवधि वर्ष 2025 तक है। श्री ट्रंप ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा, “यह आखिरी मौका दिया जा रहा है, ऐसी सहमति के अभाव में अमेरिका परमाणु समझौते में बने रहने के लिए पाबंदियों में फिर से ढील नहीं देगा।अगर मुझे किसी भी समय ऐसा महसूस हुआ कि इसकी संभावनाएं नहीं है तो अमेरिका उसी समय समझौते से अपने हाथ खींच लेगा।” ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने कहा कि यह सशक्त समझौते को जानबूझकर कमतर करने का प्रयास है।जर्मनी ने कहा है कि वह इस समझौते के पूर्ण क्रियान्वयन के पक्ष में है और ब्रिटेन और फ्रांस के साथ बातचीत करके इस विषय पर आगे बढ़ना चाहता है। श्री ट्रंप यह भी चाहते है कि अमेरिकी कांग्रेस परमाणु समझौते में अमेरिका की भागेदारी संबंधी कानून में संशोधन करे, ताकि अगर ईरान कुछ शर्तों का उल्लंघन करे, तो अमेरिका उस पर फिर से सभी पाबंदियां थोप सके। गौरतलब है कि ईरान और विश्व के छह देशों के बीच वर्ष 2015 में यह परमाणु समझौता हुआ था।समझौते के अनुसार ईरान को अपने यूरेनियम संवर्धन में व्यापक कमी लाना था।"/> वाशिंगटन, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज एक बार फिर से ईरान से संबंधित परमाणु समझौते से संबंध में बड़ा बयान देते हुए कहा कि वह ईरान पर लगे परमाणु प्रतिबंधों में आखिरी बार डील दे रहे हैं, ताकि यूरोप और अमेरिका इस परमाणु समझौते की 'भीषण खामियों' को दूर कर सकें। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार श्री ट्रंप ने 120 दिनों के लिए ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील दी है।अमेरिका चाहता है कि यूरोपीय संघ के हस्ताक्षरकर्ता देश, ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पर स्थायी पाबंदियां लगाने पर सहमत हो जाएं।वर्तमान समझौते के अंतर्गत इनकी अवधि वर्ष 2025 तक है। श्री ट्रंप ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा, “यह आखिरी मौका दिया जा रहा है, ऐसी सहमति के अभाव में अमेरिका परमाणु समझौते में बने रहने के लिए पाबंदियों में फिर से ढील नहीं देगा।अगर मुझे किसी भी समय ऐसा महसूस हुआ कि इसकी संभावनाएं नहीं है तो अमेरिका उसी समय समझौते से अपने हाथ खींच लेगा।” ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने कहा कि यह सशक्त समझौते को जानबूझकर कमतर करने का प्रयास है।जर्मनी ने कहा है कि वह इस समझौते के पूर्ण क्रियान्वयन के पक्ष में है और ब्रिटेन और फ्रांस के साथ बातचीत करके इस विषय पर आगे बढ़ना चाहता है। श्री ट्रंप यह भी चाहते है कि अमेरिकी कांग्रेस परमाणु समझौते में अमेरिका की भागेदारी संबंधी कानून में संशोधन करे, ताकि अगर ईरान कुछ शर्तों का उल्लंघन करे, तो अमेरिका उस पर फिर से सभी पाबंदियां थोप सके। गौरतलब है कि ईरान और विश्व के छह देशों के बीच वर्ष 2015 में यह परमाणु समझौता हुआ था।समझौते के अनुसार ईरान को अपने यूरेनियम संवर्धन में व्यापक कमी लाना था।"/> वाशिंगटन, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज एक बार फिर से ईरान से संबंधित परमाणु समझौते से संबंध में बड़ा बयान देते हुए कहा कि वह ईरान पर लगे परमाणु प्रतिबंधों में आखिरी बार डील दे रहे हैं, ताकि यूरोप और अमेरिका इस परमाणु समझौते की 'भीषण खामियों' को दूर कर सकें। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार श्री ट्रंप ने 120 दिनों के लिए ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील दी है।अमेरिका चाहता है कि यूरोपीय संघ के हस्ताक्षरकर्ता देश, ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पर स्थायी पाबंदियां लगाने पर सहमत हो जाएं।वर्तमान समझौते के अंतर्गत इनकी अवधि वर्ष 2025 तक है। श्री ट्रंप ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा, “यह आखिरी मौका दिया जा रहा है, ऐसी सहमति के अभाव में अमेरिका परमाणु समझौते में बने रहने के लिए पाबंदियों में फिर से ढील नहीं देगा।अगर मुझे किसी भी समय ऐसा महसूस हुआ कि इसकी संभावनाएं नहीं है तो अमेरिका उसी समय समझौते से अपने हाथ खींच लेगा।” ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने कहा कि यह सशक्त समझौते को जानबूझकर कमतर करने का प्रयास है।जर्मनी ने कहा है कि वह इस समझौते के पूर्ण क्रियान्वयन के पक्ष में है और ब्रिटेन और फ्रांस के साथ बातचीत करके इस विषय पर आगे बढ़ना चाहता है। श्री ट्रंप यह भी चाहते है कि अमेरिकी कांग्रेस परमाणु समझौते में अमेरिका की भागेदारी संबंधी कानून में संशोधन करे, ताकि अगर ईरान कुछ शर्तों का उल्लंघन करे, तो अमेरिका उस पर फिर से सभी पाबंदियां थोप सके। गौरतलब है कि ईरान और विश्व के छह देशों के बीच वर्ष 2015 में यह परमाणु समझौता हुआ था।समझौते के अनुसार ईरान को अपने यूरेनियम संवर्धन में व्यापक कमी लाना था।">

ट्रंप ने ‘आखिरी बार’ दूूूी ईरान परमाणु समझौते की शर्तों में ढ़ील

2018/01/13



वाशिंगटन, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज एक बार फिर से ईरान से संबंधित परमाणु समझौते से संबंध में बड़ा बयान देते हुए कहा कि वह ईरान पर लगे परमाणु प्रतिबंधों में आखिरी बार डील दे रहे हैं, ताकि यूरोप और अमेरिका इस परमाणु समझौते की 'भीषण खामियों' को दूर कर सकें। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार श्री ट्रंप ने 120 दिनों के लिए ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील दी है।अमेरिका चाहता है कि यूरोपीय संघ के हस्ताक्षरकर्ता देश, ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पर स्थायी पाबंदियां लगाने पर सहमत हो जाएं।वर्तमान समझौते के अंतर्गत इनकी अवधि वर्ष 2025 तक है। श्री ट्रंप ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा, “यह आखिरी मौका दिया जा रहा है, ऐसी सहमति के अभाव में अमेरिका परमाणु समझौते में बने रहने के लिए पाबंदियों में फिर से ढील नहीं देगा।अगर मुझे किसी भी समय ऐसा महसूस हुआ कि इसकी संभावनाएं नहीं है तो अमेरिका उसी समय समझौते से अपने हाथ खींच लेगा।” ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने कहा कि यह सशक्त समझौते को जानबूझकर कमतर करने का प्रयास है।जर्मनी ने कहा है कि वह इस समझौते के पूर्ण क्रियान्वयन के पक्ष में है और ब्रिटेन और फ्रांस के साथ बातचीत करके इस विषय पर आगे बढ़ना चाहता है। श्री ट्रंप यह भी चाहते है कि अमेरिकी कांग्रेस परमाणु समझौते में अमेरिका की भागेदारी संबंधी कानून में संशोधन करे, ताकि अगर ईरान कुछ शर्तों का उल्लंघन करे, तो अमेरिका उस पर फिर से सभी पाबंदियां थोप सके। गौरतलब है कि ईरान और विश्व के छह देशों के बीच वर्ष 2015 में यह परमाणु समझौता हुआ था।समझौते के अनुसार ईरान को अपने यूरेनियम संवर्धन में व्यापक कमी लाना था।


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