Breaking News :

45 विद्यार्थियों के कॉलेज में भी हुये चुनाव भोपाल, शहर के 123 कॉलेजों में सरकार ने चुनाव करवाये हैं, पिछले महीने हुये शासकीय कॉलेजों में चुनाव की तरह न ही यहां छात्रों में उत्साह दिखा, न ही चुनावों जैसा तामझाम दिखायी दिया. यह चुनाव छात्रसंघठनों के चुनाव तक ही सिमट कर रह गये हैं. यहां डीएव्ही कॉलेज में भी चुनाव हुये हैं जहां सिर्फ बीकांम की तीन कक्षाओं में 45 छात्र ही अध्ययन करते है, यहां तीन कक्षाओं से तीन सीआर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सचिव पदों पर नियुक्त हैं, क्योकि संस्थान में चौथी कक्षा नहीं है, इसीकारण सहसचिव का पद यहां रिक्त रह गया हैं. कोर्ट के आदेश के कारण हुये निजी कॉलेजों में चुनाव से शहरी की शैक्षणिक संस्थानों की पोल खुल गयी हैं. यहां सिर्फ नाम के कॉलेज संचालित हो रहे हैं. सरकारी कॉलेजों के शिक्षकों को जब निर्वाचन अधिकारी बनाकर इन कॉलेजों में भेजा गया, तो अधिकतर कॉलेजों में न ही वोट देने के लिए मतदाता छात्र और प्रत्याशीयों का अभाव रहा हैं, जिस कारण अधिकतर कॉलेजों में सीआरों को मनोनीत करके चुनावी प्रक्रिया में शामिल किया गया हैं. इन चुनावों में छात्राओं को 50 फीसदी सीटों पर आरक्षण था, पर 75 फीसदी सीटों पर छात्राएं चुनी गयी हैं.मनमाफिक फीस वसुली पर लगेगी लगाम- प्रायवेट कॉलेज लेट फीस के नाम पर छात्रों से 300 से 500 रूपये अधिक वसुलते थे , छात्रों को चुनाव के माध्यम से प्रतिनिधि मिलने से इनपर लगाम लगेगी. प्रायवेट कॉलेज के छात्रों की मनमाफिक फीस वसुली पर रोक ही सबसे बड़ी मांग थी, छात्रसंघ पदाधिकारीयों में यह दूर कराने की बात की हैं. लड़कियों ने जीती सीटें चुनावों में छात्राओं को पचास फीसदी आरक्षण था, पर 75 फीसदी सीटों पर छात्राओं ने जीत दर्ज की हैं, छात्राओं की जीत से उनकी नेत्तत्व गुण भी उभर कर सामने आयेगे और छात्राओं की सुरक्षा संबंधी समस्याएं भी दुर हो पायेगी. छात्र संगठनों ने दिखाया दमखम यह चुनाव छात्रो के चुनाव कम और छात्रसंघठनों के चुनाव अधिक दिखायी दिये, परीक्षा के समय चुनाव होने से छात्रों ने चुनाव में दिलचस्पी नहीं दिखायी हैं, चुनावों में एबीवीपी एवं एनएसयूआई ने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी, शहर के 30 कॉलेजों से प्राप्त रूझानों में एबीवीपी के 20 एवं एनएसयूआई के 10 अध्यक्ष निर्वाचित हुये हैं. एबीवीपी के विभाग संयोजक ने जहां एबीवीपी की जीत को छात्रसमुदाय की जीत बताया हैं, वही एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने इन चुनावों को भाजपा शासन की खामियों के विरूद्ध छात्रों का रोष बताया हैं.   चुनावों पर छात्र नेताओं की राय   "/> 45 विद्यार्थियों के कॉलेज में भी हुये चुनाव भोपाल, शहर के 123 कॉलेजों में सरकार ने चुनाव करवाये हैं, पिछले महीने हुये शासकीय कॉलेजों में चुनाव की तरह न ही यहां छात्रों में उत्साह दिखा, न ही चुनावों जैसा तामझाम दिखायी दिया. यह चुनाव छात्रसंघठनों के चुनाव तक ही सिमट कर रह गये हैं. यहां डीएव्ही कॉलेज में भी चुनाव हुये हैं जहां सिर्फ बीकांम की तीन कक्षाओं में 45 छात्र ही अध्ययन करते है, यहां तीन कक्षाओं से तीन सीआर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सचिव पदों पर नियुक्त हैं, क्योकि संस्थान में चौथी कक्षा नहीं है, इसीकारण सहसचिव का पद यहां रिक्त रह गया हैं. कोर्ट के आदेश के कारण हुये निजी कॉलेजों में चुनाव से शहरी की शैक्षणिक संस्थानों की पोल खुल गयी हैं. यहां सिर्फ नाम के कॉलेज संचालित हो रहे हैं. सरकारी कॉलेजों के शिक्षकों को जब निर्वाचन अधिकारी बनाकर इन कॉलेजों में भेजा गया, तो अधिकतर कॉलेजों में न ही वोट देने के लिए मतदाता छात्र और प्रत्याशीयों का अभाव रहा हैं, जिस कारण अधिकतर कॉलेजों में सीआरों को मनोनीत करके चुनावी प्रक्रिया में शामिल किया गया हैं. इन चुनावों में छात्राओं को 50 फीसदी सीटों पर आरक्षण था, पर 75 फीसदी सीटों पर छात्राएं चुनी गयी हैं.मनमाफिक फीस वसुली पर लगेगी लगाम- प्रायवेट कॉलेज लेट फीस के नाम पर छात्रों से 300 से 500 रूपये अधिक वसुलते थे , छात्रों को चुनाव के माध्यम से प्रतिनिधि मिलने से इनपर लगाम लगेगी. प्रायवेट कॉलेज के छात्रों की मनमाफिक फीस वसुली पर रोक ही सबसे बड़ी मांग थी, छात्रसंघ पदाधिकारीयों में यह दूर कराने की बात की हैं. लड़कियों ने जीती सीटें चुनावों में छात्राओं को पचास फीसदी आरक्षण था, पर 75 फीसदी सीटों पर छात्राओं ने जीत दर्ज की हैं, छात्राओं की जीत से उनकी नेत्तत्व गुण भी उभर कर सामने आयेगे और छात्राओं की सुरक्षा संबंधी समस्याएं भी दुर हो पायेगी. छात्र संगठनों ने दिखाया दमखम यह चुनाव छात्रो के चुनाव कम और छात्रसंघठनों के चुनाव अधिक दिखायी दिये, परीक्षा के समय चुनाव होने से छात्रों ने चुनाव में दिलचस्पी नहीं दिखायी हैं, चुनावों में एबीवीपी एवं एनएसयूआई ने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी, शहर के 30 कॉलेजों से प्राप्त रूझानों में एबीवीपी के 20 एवं एनएसयूआई के 10 अध्यक्ष निर्वाचित हुये हैं. एबीवीपी के विभाग संयोजक ने जहां एबीवीपी की जीत को छात्रसमुदाय की जीत बताया हैं, वही एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने इन चुनावों को भाजपा शासन की खामियों के विरूद्ध छात्रों का रोष बताया हैं.   चुनावों पर छात्र नेताओं की राय   "/> 45 विद्यार्थियों के कॉलेज में भी हुये चुनाव भोपाल, शहर के 123 कॉलेजों में सरकार ने चुनाव करवाये हैं, पिछले महीने हुये शासकीय कॉलेजों में चुनाव की तरह न ही यहां छात्रों में उत्साह दिखा, न ही चुनावों जैसा तामझाम दिखायी दिया. यह चुनाव छात्रसंघठनों के चुनाव तक ही सिमट कर रह गये हैं. यहां डीएव्ही कॉलेज में भी चुनाव हुये हैं जहां सिर्फ बीकांम की तीन कक्षाओं में 45 छात्र ही अध्ययन करते है, यहां तीन कक्षाओं से तीन सीआर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सचिव पदों पर नियुक्त हैं, क्योकि संस्थान में चौथी कक्षा नहीं है, इसीकारण सहसचिव का पद यहां रिक्त रह गया हैं. कोर्ट के आदेश के कारण हुये निजी कॉलेजों में चुनाव से शहरी की शैक्षणिक संस्थानों की पोल खुल गयी हैं. यहां सिर्फ नाम के कॉलेज संचालित हो रहे हैं. सरकारी कॉलेजों के शिक्षकों को जब निर्वाचन अधिकारी बनाकर इन कॉलेजों में भेजा गया, तो अधिकतर कॉलेजों में न ही वोट देने के लिए मतदाता छात्र और प्रत्याशीयों का अभाव रहा हैं, जिस कारण अधिकतर कॉलेजों में सीआरों को मनोनीत करके चुनावी प्रक्रिया में शामिल किया गया हैं. इन चुनावों में छात्राओं को 50 फीसदी सीटों पर आरक्षण था, पर 75 फीसदी सीटों पर छात्राएं चुनी गयी हैं.मनमाफिक फीस वसुली पर लगेगी लगाम- प्रायवेट कॉलेज लेट फीस के नाम पर छात्रों से 300 से 500 रूपये अधिक वसुलते थे , छात्रों को चुनाव के माध्यम से प्रतिनिधि मिलने से इनपर लगाम लगेगी. प्रायवेट कॉलेज के छात्रों की मनमाफिक फीस वसुली पर रोक ही सबसे बड़ी मांग थी, छात्रसंघ पदाधिकारीयों में यह दूर कराने की बात की हैं. लड़कियों ने जीती सीटें चुनावों में छात्राओं को पचास फीसदी आरक्षण था, पर 75 फीसदी सीटों पर छात्राओं ने जीत दर्ज की हैं, छात्राओं की जीत से उनकी नेत्तत्व गुण भी उभर कर सामने आयेगे और छात्राओं की सुरक्षा संबंधी समस्याएं भी दुर हो पायेगी. छात्र संगठनों ने दिखाया दमखम यह चुनाव छात्रो के चुनाव कम और छात्रसंघठनों के चुनाव अधिक दिखायी दिये, परीक्षा के समय चुनाव होने से छात्रों ने चुनाव में दिलचस्पी नहीं दिखायी हैं, चुनावों में एबीवीपी एवं एनएसयूआई ने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी, शहर के 30 कॉलेजों से प्राप्त रूझानों में एबीवीपी के 20 एवं एनएसयूआई के 10 अध्यक्ष निर्वाचित हुये हैं. एबीवीपी के विभाग संयोजक ने जहां एबीवीपी की जीत को छात्रसमुदाय की जीत बताया हैं, वही एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने इन चुनावों को भाजपा शासन की खामियों के विरूद्ध छात्रों का रोष बताया हैं.   चुनावों पर छात्र नेताओं की राय   ">

छात्रसंघ चुनावों में छात्राओं ने मारी बाजी

2017/11/28



  45 विद्यार्थियों के कॉलेज में भी हुये चुनाव भोपाल, शहर के 123 कॉलेजों में सरकार ने चुनाव करवाये हैं, पिछले महीने हुये शासकीय कॉलेजों में चुनाव की तरह न ही यहां छात्रों में उत्साह दिखा, न ही चुनावों जैसा तामझाम दिखायी दिया. यह चुनाव छात्रसंघठनों के चुनाव तक ही सिमट कर रह गये हैं. यहां डीएव्ही कॉलेज में भी चुनाव हुये हैं जहां सिर्फ बीकांम की तीन कक्षाओं में 45 छात्र ही अध्ययन करते है, यहां तीन कक्षाओं से तीन सीआर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं सचिव पदों पर नियुक्त हैं, क्योकि संस्थान में चौथी कक्षा नहीं है, इसीकारण सहसचिव का पद यहां रिक्त रह गया हैं. कोर्ट के आदेश के कारण हुये निजी कॉलेजों में चुनाव से शहरी की शैक्षणिक संस्थानों की पोल खुल गयी हैं. यहां सिर्फ नाम के कॉलेज संचालित हो रहे हैं. सरकारी कॉलेजों के शिक्षकों को जब निर्वाचन अधिकारी बनाकर इन कॉलेजों में भेजा गया, तो अधिकतर कॉलेजों में न ही वोट देने के लिए मतदाता छात्र और प्रत्याशीयों का अभाव रहा हैं, जिस कारण अधिकतर कॉलेजों में सीआरों को मनोनीत करके चुनावी प्रक्रिया में शामिल किया गया हैं. इन चुनावों में छात्राओं को 50 फीसदी सीटों पर आरक्षण था, पर 75 फीसदी सीटों पर छात्राएं चुनी गयी हैं.मनमाफिक फीस वसुली पर लगेगी लगाम- प्रायवेट कॉलेज लेट फीस के नाम पर छात्रों से 300 से 500 रूपये अधिक वसुलते थे , छात्रों को चुनाव के माध्यम से प्रतिनिधि मिलने से इनपर लगाम लगेगी. प्रायवेट कॉलेज के छात्रों की मनमाफिक फीस वसुली पर रोक ही सबसे बड़ी मांग थी, छात्रसंघ पदाधिकारीयों में यह दूर कराने की बात की हैं. लड़कियों ने जीती सीटें चुनावों में छात्राओं को पचास फीसदी आरक्षण था, पर 75 फीसदी सीटों पर छात्राओं ने जीत दर्ज की हैं, छात्राओं की जीत से उनकी नेत्तत्व गुण भी उभर कर सामने आयेगे और छात्राओं की सुरक्षा संबंधी समस्याएं भी दुर हो पायेगी. छात्र संगठनों ने दिखाया दमखम यह चुनाव छात्रो के चुनाव कम और छात्रसंघठनों के चुनाव अधिक दिखायी दिये, परीक्षा के समय चुनाव होने से छात्रों ने चुनाव में दिलचस्पी नहीं दिखायी हैं, चुनावों में एबीवीपी एवं एनएसयूआई ने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी, शहर के 30 कॉलेजों से प्राप्त रूझानों में एबीवीपी के 20 एवं एनएसयूआई के 10 अध्यक्ष निर्वाचित हुये हैं. एबीवीपी के विभाग संयोजक ने जहां एबीवीपी की जीत को छात्रसमुदाय की जीत बताया हैं, वही एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष आशुतोष चौकसे ने इन चुनावों को भाजपा शासन की खामियों के विरूद्ध छात्रों का रोष बताया हैं.   चुनावों पर छात्र नेताओं की राय

  • यह जीत प्रदेश की शिक्षा नीतियो को उजागर करने वाला चुनाव रहा, छात्रों ने हमारे संगठन पर और भाजपा सरकार की नीतियो के खिलाफ वोट किया हैं, इन चुनावों का असर विघानसभा चुनावों पर भी दिखेगा.               - आशुतोष चौकसे - जिलाअध्यक्ष एनएसयूआई
 
  • एबीवीपी की छात्रों के हित की लडायी हमेशा जारी रहेगी, चुनावों में हमने बेहतर प्रदर्शन किया हैं, हम सारे वादे पूरे करेगे और छात्रसंघ पदाधिकारीयों के लिए उचित प्रोटोकॉल और सुविधाओं के लिए लड़ेगे.                      -हर्ष चंदेल - विभाग संयोजक एबीवीपी


Opinions expressed in the comments are not reflective of Nava Bharat. Comments are moderated automatically.

Related Posts