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सोने का मुकुट किया भेंट भोपाल, चुनावी शंखनाद के लिए म.प्र. पहुंची बसपा की मायावती यह कहते सफाई दी है कि वह धन लोलुपता की शिकार नहीं हैं, बल्कि विरोधी छबि खराब करने के लिये लोगों के बीच भ्रांतियां फैला रहे हैं. म.प्र. इकाई द्वारा मंच पर सम्मान स्वरूप भेंट सोने के मुकुट को पहनने के बाद हजारों लोगों को यह कहते हुये विश्वास भी दिलाने की कोशिश की कि वह चाहती तो खूब धन इकट्ठा कर सकती थीं. मायावती यहां लाल परेड मैदान में म.प्र.-छग के कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रही थी. यह बात अलग है कि म.प्र. के बारे में कम पर यूपी के संबंध में ज्यादा बोला. लेकिन बसपा पार्टी का टिकट देने के बदले खूब धन एकत्रित करती है जैसे आरोपों पर ङ्क्षचतित नजर आईं. अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कोने-कोने से पहुंचे दलित समाज के लोगों को यह बताकर भरोसे में लेने की कोशिश की कि चाहती तो बहुत धन इकट्ठा कर सकती थी. स्वार्थ होता तो मैं पदों से इस्तीफा नहीं दे देती. क्या यह तर्क कम है कि मैंने दूसरी पार्टियों की तरह पैसे लेकर नहीं बल्कि आम कार्यकर्ताओं को राज्यसभा भेजा है. यहां बता दें कि मायावती पर आय से अधिक सम्पत्ति रखने का आरोप समय-समय पर लगा है. मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चला है. शुक्रवार को भी सम्मान करते हुये पदाधिकारियों ने चांदी की थाली में सोने का मुकुट रखकर भेंट किया. यहां उन्हें चांदी की तलवार भी मंच पर प्रदान की गई है. इस सम्मान को प्रदर्शित करने उन्होंने न केवल मुकुट पहना बल्कि तलवार हाथ में लेकर लहराई है."/> सोने का मुकुट किया भेंट भोपाल, चुनावी शंखनाद के लिए म.प्र. पहुंची बसपा की मायावती यह कहते सफाई दी है कि वह धन लोलुपता की शिकार नहीं हैं, बल्कि विरोधी छबि खराब करने के लिये लोगों के बीच भ्रांतियां फैला रहे हैं. म.प्र. इकाई द्वारा मंच पर सम्मान स्वरूप भेंट सोने के मुकुट को पहनने के बाद हजारों लोगों को यह कहते हुये विश्वास भी दिलाने की कोशिश की कि वह चाहती तो खूब धन इकट्ठा कर सकती थीं. मायावती यहां लाल परेड मैदान में म.प्र.-छग के कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रही थी. यह बात अलग है कि म.प्र. के बारे में कम पर यूपी के संबंध में ज्यादा बोला. लेकिन बसपा पार्टी का टिकट देने के बदले खूब धन एकत्रित करती है जैसे आरोपों पर ङ्क्षचतित नजर आईं. अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कोने-कोने से पहुंचे दलित समाज के लोगों को यह बताकर भरोसे में लेने की कोशिश की कि चाहती तो बहुत धन इकट्ठा कर सकती थी. स्वार्थ होता तो मैं पदों से इस्तीफा नहीं दे देती. क्या यह तर्क कम है कि मैंने दूसरी पार्टियों की तरह पैसे लेकर नहीं बल्कि आम कार्यकर्ताओं को राज्यसभा भेजा है. यहां बता दें कि मायावती पर आय से अधिक सम्पत्ति रखने का आरोप समय-समय पर लगा है. मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चला है. शुक्रवार को भी सम्मान करते हुये पदाधिकारियों ने चांदी की थाली में सोने का मुकुट रखकर भेंट किया. यहां उन्हें चांदी की तलवार भी मंच पर प्रदान की गई है. इस सम्मान को प्रदर्शित करने उन्होंने न केवल मुकुट पहना बल्कि तलवार हाथ में लेकर लहराई है."/> सोने का मुकुट किया भेंट भोपाल, चुनावी शंखनाद के लिए म.प्र. पहुंची बसपा की मायावती यह कहते सफाई दी है कि वह धन लोलुपता की शिकार नहीं हैं, बल्कि विरोधी छबि खराब करने के लिये लोगों के बीच भ्रांतियां फैला रहे हैं. म.प्र. इकाई द्वारा मंच पर सम्मान स्वरूप भेंट सोने के मुकुट को पहनने के बाद हजारों लोगों को यह कहते हुये विश्वास भी दिलाने की कोशिश की कि वह चाहती तो खूब धन इकट्ठा कर सकती थीं. मायावती यहां लाल परेड मैदान में म.प्र.-छग के कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रही थी. यह बात अलग है कि म.प्र. के बारे में कम पर यूपी के संबंध में ज्यादा बोला. लेकिन बसपा पार्टी का टिकट देने के बदले खूब धन एकत्रित करती है जैसे आरोपों पर ङ्क्षचतित नजर आईं. अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कोने-कोने से पहुंचे दलित समाज के लोगों को यह बताकर भरोसे में लेने की कोशिश की कि चाहती तो बहुत धन इकट्ठा कर सकती थी. स्वार्थ होता तो मैं पदों से इस्तीफा नहीं दे देती. क्या यह तर्क कम है कि मैंने दूसरी पार्टियों की तरह पैसे लेकर नहीं बल्कि आम कार्यकर्ताओं को राज्यसभा भेजा है. यहां बता दें कि मायावती पर आय से अधिक सम्पत्ति रखने का आरोप समय-समय पर लगा है. मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चला है. शुक्रवार को भी सम्मान करते हुये पदाधिकारियों ने चांदी की थाली में सोने का मुकुट रखकर भेंट किया. यहां उन्हें चांदी की तलवार भी मंच पर प्रदान की गई है. इस सम्मान को प्रदर्शित करने उन्होंने न केवल मुकुट पहना बल्कि तलवार हाथ में लेकर लहराई है.">

चाहती तो खूब धन इकट्ठा कर सकती थी

2017/11/25



सोने का मुकुट किया भेंट भोपाल, चुनावी शंखनाद के लिए म.प्र. पहुंची बसपा की मायावती यह कहते सफाई दी है कि वह धन लोलुपता की शिकार नहीं हैं, बल्कि विरोधी छबि खराब करने के लिये लोगों के बीच भ्रांतियां फैला रहे हैं. म.प्र. इकाई द्वारा मंच पर सम्मान स्वरूप भेंट सोने के मुकुट को पहनने के बाद हजारों लोगों को यह कहते हुये विश्वास भी दिलाने की कोशिश की कि वह चाहती तो खूब धन इकट्ठा कर सकती थीं. मायावती यहां लाल परेड मैदान में म.प्र.-छग के कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रही थी. यह बात अलग है कि म.प्र. के बारे में कम पर यूपी के संबंध में ज्यादा बोला. लेकिन बसपा पार्टी का टिकट देने के बदले खूब धन एकत्रित करती है जैसे आरोपों पर ङ्क्षचतित नजर आईं. अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कोने-कोने से पहुंचे दलित समाज के लोगों को यह बताकर भरोसे में लेने की कोशिश की कि चाहती तो बहुत धन इकट्ठा कर सकती थी. स्वार्थ होता तो मैं पदों से इस्तीफा नहीं दे देती. क्या यह तर्क कम है कि मैंने दूसरी पार्टियों की तरह पैसे लेकर नहीं बल्कि आम कार्यकर्ताओं को राज्यसभा भेजा है. यहां बता दें कि मायावती पर आय से अधिक सम्पत्ति रखने का आरोप समय-समय पर लगा है. मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चला है. शुक्रवार को भी सम्मान करते हुये पदाधिकारियों ने चांदी की थाली में सोने का मुकुट रखकर भेंट किया. यहां उन्हें चांदी की तलवार भी मंच पर प्रदान की गई है. इस सम्मान को प्रदर्शित करने उन्होंने न केवल मुकुट पहना बल्कि तलवार हाथ में लेकर लहराई है.


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