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नयी दिल्ली,  नीति आयोग ने आर्थिक सुधारों पर बल देते हुए कहा है कि चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था साढ़े सात प्रतिशत की दर आर्थिक विकास करने की की संभावना है जबकि अगले दो वित्त वर्ष में आठ प्रतिशत का आंकड़ा हासिल कर लेगी। नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढिया ने पिछले तीन साल की उपलब्धिों ब्यौरा देते हुए आज यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मौजूदा सरकार को अर्थव्यवस्था अस्त व्यस्त हालत में मिली थी। सरकार ने आर्थिक सुधार के कड़े कदम उठाए हैं जिनसे भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि आने कुछ वर्षों में इन सुधारों का असर दिखने लगेगा और अगले दो वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था आठ प्रतिशत की विकास दर हासिल कर लेगी। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति की दर तीन वर्ष के निचले स्तर पर हैं और चालू खाता घाटा एक प्रतिशत कम हुआ है। श्री पनगढिया ने कहा कि मौजूदा सरकार के आर्थिक सुधारों में वस्तु एवं सेवाकर और दिवालिया एवं शाेधन अधिनयम सबसे महत्वपूर्ण सुधार हैं। उन्होंने नोटबंदी को भी कड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि बैंकों की गैर निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) बड़ी समस्या हैं और सरकार इससे निपटने के प्रयास कर रही है। अगले छह महीनों में इसका असर दिखने लगेगा।"/> नयी दिल्ली,  नीति आयोग ने आर्थिक सुधारों पर बल देते हुए कहा है कि चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था साढ़े सात प्रतिशत की दर आर्थिक विकास करने की की संभावना है जबकि अगले दो वित्त वर्ष में आठ प्रतिशत का आंकड़ा हासिल कर लेगी। नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढिया ने पिछले तीन साल की उपलब्धिों ब्यौरा देते हुए आज यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मौजूदा सरकार को अर्थव्यवस्था अस्त व्यस्त हालत में मिली थी। सरकार ने आर्थिक सुधार के कड़े कदम उठाए हैं जिनसे भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि आने कुछ वर्षों में इन सुधारों का असर दिखने लगेगा और अगले दो वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था आठ प्रतिशत की विकास दर हासिल कर लेगी। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति की दर तीन वर्ष के निचले स्तर पर हैं और चालू खाता घाटा एक प्रतिशत कम हुआ है। श्री पनगढिया ने कहा कि मौजूदा सरकार के आर्थिक सुधारों में वस्तु एवं सेवाकर और दिवालिया एवं शाेधन अधिनयम सबसे महत्वपूर्ण सुधार हैं। उन्होंने नोटबंदी को भी कड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि बैंकों की गैर निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) बड़ी समस्या हैं और सरकार इससे निपटने के प्रयास कर रही है। अगले छह महीनों में इसका असर दिखने लगेगा।"/> नयी दिल्ली,  नीति आयोग ने आर्थिक सुधारों पर बल देते हुए कहा है कि चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था साढ़े सात प्रतिशत की दर आर्थिक विकास करने की की संभावना है जबकि अगले दो वित्त वर्ष में आठ प्रतिशत का आंकड़ा हासिल कर लेगी। नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढिया ने पिछले तीन साल की उपलब्धिों ब्यौरा देते हुए आज यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मौजूदा सरकार को अर्थव्यवस्था अस्त व्यस्त हालत में मिली थी। सरकार ने आर्थिक सुधार के कड़े कदम उठाए हैं जिनसे भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि आने कुछ वर्षों में इन सुधारों का असर दिखने लगेगा और अगले दो वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था आठ प्रतिशत की विकास दर हासिल कर लेगी। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति की दर तीन वर्ष के निचले स्तर पर हैं और चालू खाता घाटा एक प्रतिशत कम हुआ है। श्री पनगढिया ने कहा कि मौजूदा सरकार के आर्थिक सुधारों में वस्तु एवं सेवाकर और दिवालिया एवं शाेधन अधिनयम सबसे महत्वपूर्ण सुधार हैं। उन्होंने नोटबंदी को भी कड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि बैंकों की गैर निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) बड़ी समस्या हैं और सरकार इससे निपटने के प्रयास कर रही है। अगले छह महीनों में इसका असर दिखने लगेगा।">

चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर साढे सात प्रतिशत रहने की संभावना

2017/06/02



नयी दिल्ली,  नीति आयोग ने आर्थिक सुधारों पर बल देते हुए कहा है कि चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था साढ़े सात प्रतिशत की दर आर्थिक विकास करने की की संभावना है जबकि अगले दो वित्त वर्ष में आठ प्रतिशत का आंकड़ा हासिल कर लेगी। नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढिया ने पिछले तीन साल की उपलब्धिों ब्यौरा देते हुए आज यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मौजूदा सरकार को अर्थव्यवस्था अस्त व्यस्त हालत में मिली थी। सरकार ने आर्थिक सुधार के कड़े कदम उठाए हैं जिनसे भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि आने कुछ वर्षों में इन सुधारों का असर दिखने लगेगा और अगले दो वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था आठ प्रतिशत की विकास दर हासिल कर लेगी। उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति की दर तीन वर्ष के निचले स्तर पर हैं और चालू खाता घाटा एक प्रतिशत कम हुआ है। श्री पनगढिया ने कहा कि मौजूदा सरकार के आर्थिक सुधारों में वस्तु एवं सेवाकर और दिवालिया एवं शाेधन अधिनयम सबसे महत्वपूर्ण सुधार हैं। उन्होंने नोटबंदी को भी कड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि बैंकों की गैर निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) बड़ी समस्या हैं और सरकार इससे निपटने के प्रयास कर रही है। अगले छह महीनों में इसका असर दिखने लगेगा।


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