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नवभारत न्यूज भोपाल, वर्ष 2017 को जाने में महज चंद दिन शेष हैं. लेकिन बीते दिनों में कई ऐसी घटनायें हुईं, जिससे सत्ता और सियासत सवालों के घेरे में आ गई. इनमें मन्दसौर गोलीकांड, भावांतर योजना और व्यापमं का मुद्दा प्रमुख रूप से शामिल है. क्योंकि जनता के जिम्मेदार इसी से जुड़ी कवायदों में साल भर सिमटे नजर आये हैं. बात शुरू करते हैं व्यापमं से. यह मुद्दा हालांकि 2013 से पहले का है. लेकिन न्यायालय में सीबीआई द्वारा जार्चशीट पेश किये जाने के बाद फिर गर्म हो गया. इससे पहले सीबीआई ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा हार्ड डिस्क टैंपरिंग को लेकर लगाये गये आरोप से मुक्त किया. भाजपा ने इसे सत्य की जीत बताते हुये कांग्रेस के नेता द्वारा की गई विद्वेषपूर्ण कार्यवाही करार दिया. लेकिन न्यायालय ने पीएमटी-2012 घोटाले के लिये सीबीआई द्वारा पेश की गई चार्जशीट आधार दोषी करार दे दिया. रातभर चली कार्यवाही में दलील से परे सीबीआई के दस्तावेजों को अहम मानते हुये बड़े रसूखदारों को जमानत देने से इंकार कर दिया. वहीं दूसरी ओर परिवहन भर्ती मामले में कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता के.के. मिश्रा को जेल की सजा भी सुनाई. क्योंकि वह यह सिद्ध नहीं कर पाये कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व साधना सिंह के खिलाफ लगाये गये आरोप से मानहानि न ही हुई है. चलते रहे शिवराज वाले बयानों के तीर साल भर प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज ङ्क्षसह चौहान विपक्ष पर निशाना साधते रहे और अफसरशाही पर भी उन्होंने तीन दागे जो बेहद चर्चित रहे. राजधानी के एक कार्यक्रम में उन्होंने अफसरों को उल्टा टांगने वाला बयान दिया तो कुछ दिनों बाद नौकरशाहों को सबसे अच्छे अफसर होने का प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया. अमेरिका यात्रा के बाद उन्होंने प्रदेश की सड़कों को वाङ्क्षशगटन डीसी की सड़कों से बेहतर बता दिया और बाद में तर्कों से उसे प्रमाणित भी किया. जबकि उनके लोक निर्माण मंत्री रामपाल सिंह ने प्रदेश की खस्ता हाल सड़कों पर यह कह कर मुहर लगा दी कि जो सड़कें खराब हैं, वे लोगों को कांग्रेसी कार्यकाल की याद दिलायेंगी. नर्मदा यात्रा में उलझी राजनीति 2017 में सर्वाधिक च्र्चित मामले नर्मदा यात्रा से संबंधित रहे. पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने शासकीय स्तर पर भव्य नर्मदा संकल्प यात्रा निकाली जिसका समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 मई को अमरकंटक में किया. इस यात्रा में लाखों लोगों को जोड़ा गया. इसमें नर्मदा संरक्षण का संकल्प भी लिया गया. उधर अक्टूबर में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय ङ्क्षसह ने नर्मदा परिक्रम प्रारंभ कर दी, जिसमें सिंह के अलावा उनी पत्नी अमृता सिंह के अलावा तमाम कांग्रेसी नेता व कार्यकर्ता शामिल हुये. यात्रा अभी जारी है. ङ्क्षसह की यात्रा में भी संत-महात्माओं का आशीर्वाद शामिल रहा. इसका शुभारंभ जगद्गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के आशीर्वाद से हुआ था. मन्दसौर गोली कांड से गरमाई राजनीति 6 जून 2017 को मन्दसौर के आंदोलनकारी किसानों पर पुलिस ने गोली चलाई, जिसमें आधा दर्जन लोगों की मौत हो गई. इसके बाद तो इस कांड की गूंज पूरे देश में सुनाई देने लगी. राजनीति ऐसी गरमाई कि सरकार ने मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपया मुआवजे के रूप में देने का ऐलान कर दिया. कांग्रेस के तत्कालीन उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी किसानों के बीच पहुंचे. घटना के बाद मुख्यमंत्री ने जहां भेल दशहरा मैदान पर अनशन किया, वहीं कांग्रेस के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सत्याग्रह के लिये टी.टी. नगर दशहरा मैदान में मोर्चा संभाला. यह घटना पूरे प्रदेश को आहत करने वाली साबित हुई और लगातार तीन दिनों तक आंदोलनकारी हाइवे पर कब्जा कर वाहनों को आग के हवाले करते रहे. दु:खद घटना यह रही कि तीन माह बाद पुलिस ने टीकमगढ़ में किसानों को निर्वस्त्र कर दिया."/> नवभारत न्यूज भोपाल, वर्ष 2017 को जाने में महज चंद दिन शेष हैं. लेकिन बीते दिनों में कई ऐसी घटनायें हुईं, जिससे सत्ता और सियासत सवालों के घेरे में आ गई. इनमें मन्दसौर गोलीकांड, भावांतर योजना और व्यापमं का मुद्दा प्रमुख रूप से शामिल है. क्योंकि जनता के जिम्मेदार इसी से जुड़ी कवायदों में साल भर सिमटे नजर आये हैं. बात शुरू करते हैं व्यापमं से. यह मुद्दा हालांकि 2013 से पहले का है. लेकिन न्यायालय में सीबीआई द्वारा जार्चशीट पेश किये जाने के बाद फिर गर्म हो गया. इससे पहले सीबीआई ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा हार्ड डिस्क टैंपरिंग को लेकर लगाये गये आरोप से मुक्त किया. भाजपा ने इसे सत्य की जीत बताते हुये कांग्रेस के नेता द्वारा की गई विद्वेषपूर्ण कार्यवाही करार दिया. लेकिन न्यायालय ने पीएमटी-2012 घोटाले के लिये सीबीआई द्वारा पेश की गई चार्जशीट आधार दोषी करार दे दिया. रातभर चली कार्यवाही में दलील से परे सीबीआई के दस्तावेजों को अहम मानते हुये बड़े रसूखदारों को जमानत देने से इंकार कर दिया. वहीं दूसरी ओर परिवहन भर्ती मामले में कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता के.के. मिश्रा को जेल की सजा भी सुनाई. क्योंकि वह यह सिद्ध नहीं कर पाये कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व साधना सिंह के खिलाफ लगाये गये आरोप से मानहानि न ही हुई है. चलते रहे शिवराज वाले बयानों के तीर साल भर प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज ङ्क्षसह चौहान विपक्ष पर निशाना साधते रहे और अफसरशाही पर भी उन्होंने तीन दागे जो बेहद चर्चित रहे. राजधानी के एक कार्यक्रम में उन्होंने अफसरों को उल्टा टांगने वाला बयान दिया तो कुछ दिनों बाद नौकरशाहों को सबसे अच्छे अफसर होने का प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया. अमेरिका यात्रा के बाद उन्होंने प्रदेश की सड़कों को वाङ्क्षशगटन डीसी की सड़कों से बेहतर बता दिया और बाद में तर्कों से उसे प्रमाणित भी किया. जबकि उनके लोक निर्माण मंत्री रामपाल सिंह ने प्रदेश की खस्ता हाल सड़कों पर यह कह कर मुहर लगा दी कि जो सड़कें खराब हैं, वे लोगों को कांग्रेसी कार्यकाल की याद दिलायेंगी. नर्मदा यात्रा में उलझी राजनीति 2017 में सर्वाधिक च्र्चित मामले नर्मदा यात्रा से संबंधित रहे. पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने शासकीय स्तर पर भव्य नर्मदा संकल्प यात्रा निकाली जिसका समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 मई को अमरकंटक में किया. इस यात्रा में लाखों लोगों को जोड़ा गया. इसमें नर्मदा संरक्षण का संकल्प भी लिया गया. उधर अक्टूबर में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय ङ्क्षसह ने नर्मदा परिक्रम प्रारंभ कर दी, जिसमें सिंह के अलावा उनी पत्नी अमृता सिंह के अलावा तमाम कांग्रेसी नेता व कार्यकर्ता शामिल हुये. यात्रा अभी जारी है. ङ्क्षसह की यात्रा में भी संत-महात्माओं का आशीर्वाद शामिल रहा. इसका शुभारंभ जगद्गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के आशीर्वाद से हुआ था. मन्दसौर गोली कांड से गरमाई राजनीति 6 जून 2017 को मन्दसौर के आंदोलनकारी किसानों पर पुलिस ने गोली चलाई, जिसमें आधा दर्जन लोगों की मौत हो गई. इसके बाद तो इस कांड की गूंज पूरे देश में सुनाई देने लगी. राजनीति ऐसी गरमाई कि सरकार ने मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपया मुआवजे के रूप में देने का ऐलान कर दिया. कांग्रेस के तत्कालीन उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी किसानों के बीच पहुंचे. घटना के बाद मुख्यमंत्री ने जहां भेल दशहरा मैदान पर अनशन किया, वहीं कांग्रेस के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सत्याग्रह के लिये टी.टी. नगर दशहरा मैदान में मोर्चा संभाला. यह घटना पूरे प्रदेश को आहत करने वाली साबित हुई और लगातार तीन दिनों तक आंदोलनकारी हाइवे पर कब्जा कर वाहनों को आग के हवाले करते रहे. दु:खद घटना यह रही कि तीन माह बाद पुलिस ने टीकमगढ़ में किसानों को निर्वस्त्र कर दिया."/> नवभारत न्यूज भोपाल, वर्ष 2017 को जाने में महज चंद दिन शेष हैं. लेकिन बीते दिनों में कई ऐसी घटनायें हुईं, जिससे सत्ता और सियासत सवालों के घेरे में आ गई. इनमें मन्दसौर गोलीकांड, भावांतर योजना और व्यापमं का मुद्दा प्रमुख रूप से शामिल है. क्योंकि जनता के जिम्मेदार इसी से जुड़ी कवायदों में साल भर सिमटे नजर आये हैं. बात शुरू करते हैं व्यापमं से. यह मुद्दा हालांकि 2013 से पहले का है. लेकिन न्यायालय में सीबीआई द्वारा जार्चशीट पेश किये जाने के बाद फिर गर्म हो गया. इससे पहले सीबीआई ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा हार्ड डिस्क टैंपरिंग को लेकर लगाये गये आरोप से मुक्त किया. भाजपा ने इसे सत्य की जीत बताते हुये कांग्रेस के नेता द्वारा की गई विद्वेषपूर्ण कार्यवाही करार दिया. लेकिन न्यायालय ने पीएमटी-2012 घोटाले के लिये सीबीआई द्वारा पेश की गई चार्जशीट आधार दोषी करार दे दिया. रातभर चली कार्यवाही में दलील से परे सीबीआई के दस्तावेजों को अहम मानते हुये बड़े रसूखदारों को जमानत देने से इंकार कर दिया. वहीं दूसरी ओर परिवहन भर्ती मामले में कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता के.के. मिश्रा को जेल की सजा भी सुनाई. क्योंकि वह यह सिद्ध नहीं कर पाये कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व साधना सिंह के खिलाफ लगाये गये आरोप से मानहानि न ही हुई है. चलते रहे शिवराज वाले बयानों के तीर साल भर प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज ङ्क्षसह चौहान विपक्ष पर निशाना साधते रहे और अफसरशाही पर भी उन्होंने तीन दागे जो बेहद चर्चित रहे. राजधानी के एक कार्यक्रम में उन्होंने अफसरों को उल्टा टांगने वाला बयान दिया तो कुछ दिनों बाद नौकरशाहों को सबसे अच्छे अफसर होने का प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया. अमेरिका यात्रा के बाद उन्होंने प्रदेश की सड़कों को वाङ्क्षशगटन डीसी की सड़कों से बेहतर बता दिया और बाद में तर्कों से उसे प्रमाणित भी किया. जबकि उनके लोक निर्माण मंत्री रामपाल सिंह ने प्रदेश की खस्ता हाल सड़कों पर यह कह कर मुहर लगा दी कि जो सड़कें खराब हैं, वे लोगों को कांग्रेसी कार्यकाल की याद दिलायेंगी. नर्मदा यात्रा में उलझी राजनीति 2017 में सर्वाधिक च्र्चित मामले नर्मदा यात्रा से संबंधित रहे. पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने शासकीय स्तर पर भव्य नर्मदा संकल्प यात्रा निकाली जिसका समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 मई को अमरकंटक में किया. इस यात्रा में लाखों लोगों को जोड़ा गया. इसमें नर्मदा संरक्षण का संकल्प भी लिया गया. उधर अक्टूबर में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय ङ्क्षसह ने नर्मदा परिक्रम प्रारंभ कर दी, जिसमें सिंह के अलावा उनी पत्नी अमृता सिंह के अलावा तमाम कांग्रेसी नेता व कार्यकर्ता शामिल हुये. यात्रा अभी जारी है. ङ्क्षसह की यात्रा में भी संत-महात्माओं का आशीर्वाद शामिल रहा. इसका शुभारंभ जगद्गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के आशीर्वाद से हुआ था. मन्दसौर गोली कांड से गरमाई राजनीति 6 जून 2017 को मन्दसौर के आंदोलनकारी किसानों पर पुलिस ने गोली चलाई, जिसमें आधा दर्जन लोगों की मौत हो गई. इसके बाद तो इस कांड की गूंज पूरे देश में सुनाई देने लगी. राजनीति ऐसी गरमाई कि सरकार ने मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपया मुआवजे के रूप में देने का ऐलान कर दिया. कांग्रेस के तत्कालीन उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी किसानों के बीच पहुंचे. घटना के बाद मुख्यमंत्री ने जहां भेल दशहरा मैदान पर अनशन किया, वहीं कांग्रेस के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सत्याग्रह के लिये टी.टी. नगर दशहरा मैदान में मोर्चा संभाला. यह घटना पूरे प्रदेश को आहत करने वाली साबित हुई और लगातार तीन दिनों तक आंदोलनकारी हाइवे पर कब्जा कर वाहनों को आग के हवाले करते रहे. दु:खद घटना यह रही कि तीन माह बाद पुलिस ने टीकमगढ़ में किसानों को निर्वस्त्र कर दिया.">

गोलीकांड, भावांतर व व्यापमं के नाम रहा 2017

2017/12/30



नवभारत न्यूज भोपाल, वर्ष 2017 को जाने में महज चंद दिन शेष हैं. लेकिन बीते दिनों में कई ऐसी घटनायें हुईं, जिससे सत्ता और सियासत सवालों के घेरे में आ गई. इनमें मन्दसौर गोलीकांड, भावांतर योजना और व्यापमं का मुद्दा प्रमुख रूप से शामिल है. क्योंकि जनता के जिम्मेदार इसी से जुड़ी कवायदों में साल भर सिमटे नजर आये हैं. बात शुरू करते हैं व्यापमं से. यह मुद्दा हालांकि 2013 से पहले का है. लेकिन न्यायालय में सीबीआई द्वारा जार्चशीट पेश किये जाने के बाद फिर गर्म हो गया. इससे पहले सीबीआई ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा हार्ड डिस्क टैंपरिंग को लेकर लगाये गये आरोप से मुक्त किया. भाजपा ने इसे सत्य की जीत बताते हुये कांग्रेस के नेता द्वारा की गई विद्वेषपूर्ण कार्यवाही करार दिया. लेकिन न्यायालय ने पीएमटी-2012 घोटाले के लिये सीबीआई द्वारा पेश की गई चार्जशीट आधार दोषी करार दे दिया. रातभर चली कार्यवाही में दलील से परे सीबीआई के दस्तावेजों को अहम मानते हुये बड़े रसूखदारों को जमानत देने से इंकार कर दिया. वहीं दूसरी ओर परिवहन भर्ती मामले में कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता के.के. मिश्रा को जेल की सजा भी सुनाई. क्योंकि वह यह सिद्ध नहीं कर पाये कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान व साधना सिंह के खिलाफ लगाये गये आरोप से मानहानि न ही हुई है. चलते रहे शिवराज वाले बयानों के तीर साल भर प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज ङ्क्षसह चौहान विपक्ष पर निशाना साधते रहे और अफसरशाही पर भी उन्होंने तीन दागे जो बेहद चर्चित रहे. राजधानी के एक कार्यक्रम में उन्होंने अफसरों को उल्टा टांगने वाला बयान दिया तो कुछ दिनों बाद नौकरशाहों को सबसे अच्छे अफसर होने का प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया. अमेरिका यात्रा के बाद उन्होंने प्रदेश की सड़कों को वाङ्क्षशगटन डीसी की सड़कों से बेहतर बता दिया और बाद में तर्कों से उसे प्रमाणित भी किया. जबकि उनके लोक निर्माण मंत्री रामपाल सिंह ने प्रदेश की खस्ता हाल सड़कों पर यह कह कर मुहर लगा दी कि जो सड़कें खराब हैं, वे लोगों को कांग्रेसी कार्यकाल की याद दिलायेंगी. नर्मदा यात्रा में उलझी राजनीति 2017 में सर्वाधिक च्र्चित मामले नर्मदा यात्रा से संबंधित रहे. पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने शासकीय स्तर पर भव्य नर्मदा संकल्प यात्रा निकाली जिसका समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 मई को अमरकंटक में किया. इस यात्रा में लाखों लोगों को जोड़ा गया. इसमें नर्मदा संरक्षण का संकल्प भी लिया गया. उधर अक्टूबर में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय ङ्क्षसह ने नर्मदा परिक्रम प्रारंभ कर दी, जिसमें सिंह के अलावा उनी पत्नी अमृता सिंह के अलावा तमाम कांग्रेसी नेता व कार्यकर्ता शामिल हुये. यात्रा अभी जारी है. ङ्क्षसह की यात्रा में भी संत-महात्माओं का आशीर्वाद शामिल रहा. इसका शुभारंभ जगद्गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के आशीर्वाद से हुआ था. मन्दसौर गोली कांड से गरमाई राजनीति 6 जून 2017 को मन्दसौर के आंदोलनकारी किसानों पर पुलिस ने गोली चलाई, जिसमें आधा दर्जन लोगों की मौत हो गई. इसके बाद तो इस कांड की गूंज पूरे देश में सुनाई देने लगी. राजनीति ऐसी गरमाई कि सरकार ने मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपया मुआवजे के रूप में देने का ऐलान कर दिया. कांग्रेस के तत्कालीन उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी किसानों के बीच पहुंचे. घटना के बाद मुख्यमंत्री ने जहां भेल दशहरा मैदान पर अनशन किया, वहीं कांग्रेस के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सत्याग्रह के लिये टी.टी. नगर दशहरा मैदान में मोर्चा संभाला. यह घटना पूरे प्रदेश को आहत करने वाली साबित हुई और लगातार तीन दिनों तक आंदोलनकारी हाइवे पर कब्जा कर वाहनों को आग के हवाले करते रहे. दु:खद घटना यह रही कि तीन माह बाद पुलिस ने टीकमगढ़ में किसानों को निर्वस्त्र कर दिया.


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