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शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का दर्द सामने आया भोपाल, वेदविहीन शिक्षा समाज को गर्त में ले जा रही है. चेतावनी भरे शब्दों के बीच यह वेदना है शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती की. वह मानस भवन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे. 'वर्तमान परिस्थिति में धर्म के प्रति हमारा कर्तव्य' विषय पर बोलते हुये उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों के लिये आधुनिक शिक्षा व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया. उनका यहां कहना था कि हमारी वैदिक शिक्षा को मिटाने के प्रयास का नतीजा को-एजुकेशन के रूप में सामने है. स्वाभाविक तौर पर इससे शील हरण की संभावना बनी रहती है.इससे पहले जगत्ïगुरु ने सागर कॉलेज में धर्म के क्षेत्र में आध्यात्मिक शिक्षा विषय पर अपनी बात रखी. यहां शनिवार को दिन में पादुका पूजन समारोह है. इसके बाद स्वामी जी बच्चों के प्रश्नों के जवाब भी देंगे. सांस्कारिक बनाती है वैदिक शिक्षा समाज के वातावरण को दूषित होने से बचाने के लिये शिक्षा नीति में परिवर्तन का सुझाव देते हुये उन्होंने वैदिक शिक्षा को संस्कारिक बनाने वाला बताया. इसके साथ ही कहा कि जीवन का उद्देश्य भौतिक विकास नहीं, संस्कार और भगवत्ति प्राप्ति है. इसलिये वेदविहीन शिक्षा, वेदविहीन विज्ञान के बिना जो भौतिक विकास दिखाई देता है असल में वह विनाश है. क्योंकि जल, हवा और पृथ्वी के बेतरतीब दोहन को विकास नहीं कहा जा सकता है. वह इसलिये कि लालची प्रवृत्ति के कारण हम समान रूप से पंचतत्वों पर आश्रित इस जगत में पाई जाने वाली 84 योनियों के जीव का हक मार रहे हैं."/> शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का दर्द सामने आया भोपाल, वेदविहीन शिक्षा समाज को गर्त में ले जा रही है. चेतावनी भरे शब्दों के बीच यह वेदना है शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती की. वह मानस भवन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे. 'वर्तमान परिस्थिति में धर्म के प्रति हमारा कर्तव्य' विषय पर बोलते हुये उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों के लिये आधुनिक शिक्षा व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया. उनका यहां कहना था कि हमारी वैदिक शिक्षा को मिटाने के प्रयास का नतीजा को-एजुकेशन के रूप में सामने है. स्वाभाविक तौर पर इससे शील हरण की संभावना बनी रहती है.इससे पहले जगत्ïगुरु ने सागर कॉलेज में धर्म के क्षेत्र में आध्यात्मिक शिक्षा विषय पर अपनी बात रखी. यहां शनिवार को दिन में पादुका पूजन समारोह है. इसके बाद स्वामी जी बच्चों के प्रश्नों के जवाब भी देंगे. सांस्कारिक बनाती है वैदिक शिक्षा समाज के वातावरण को दूषित होने से बचाने के लिये शिक्षा नीति में परिवर्तन का सुझाव देते हुये उन्होंने वैदिक शिक्षा को संस्कारिक बनाने वाला बताया. इसके साथ ही कहा कि जीवन का उद्देश्य भौतिक विकास नहीं, संस्कार और भगवत्ति प्राप्ति है. इसलिये वेदविहीन शिक्षा, वेदविहीन विज्ञान के बिना जो भौतिक विकास दिखाई देता है असल में वह विनाश है. क्योंकि जल, हवा और पृथ्वी के बेतरतीब दोहन को विकास नहीं कहा जा सकता है. वह इसलिये कि लालची प्रवृत्ति के कारण हम समान रूप से पंचतत्वों पर आश्रित इस जगत में पाई जाने वाली 84 योनियों के जीव का हक मार रहे हैं."/> शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का दर्द सामने आया भोपाल, वेदविहीन शिक्षा समाज को गर्त में ले जा रही है. चेतावनी भरे शब्दों के बीच यह वेदना है शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती की. वह मानस भवन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे. 'वर्तमान परिस्थिति में धर्म के प्रति हमारा कर्तव्य' विषय पर बोलते हुये उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों के लिये आधुनिक शिक्षा व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया. उनका यहां कहना था कि हमारी वैदिक शिक्षा को मिटाने के प्रयास का नतीजा को-एजुकेशन के रूप में सामने है. स्वाभाविक तौर पर इससे शील हरण की संभावना बनी रहती है.इससे पहले जगत्ïगुरु ने सागर कॉलेज में धर्म के क्षेत्र में आध्यात्मिक शिक्षा विषय पर अपनी बात रखी. यहां शनिवार को दिन में पादुका पूजन समारोह है. इसके बाद स्वामी जी बच्चों के प्रश्नों के जवाब भी देंगे. सांस्कारिक बनाती है वैदिक शिक्षा समाज के वातावरण को दूषित होने से बचाने के लिये शिक्षा नीति में परिवर्तन का सुझाव देते हुये उन्होंने वैदिक शिक्षा को संस्कारिक बनाने वाला बताया. इसके साथ ही कहा कि जीवन का उद्देश्य भौतिक विकास नहीं, संस्कार और भगवत्ति प्राप्ति है. इसलिये वेदविहीन शिक्षा, वेदविहीन विज्ञान के बिना जो भौतिक विकास दिखाई देता है असल में वह विनाश है. क्योंकि जल, हवा और पृथ्वी के बेतरतीब दोहन को विकास नहीं कहा जा सकता है. वह इसलिये कि लालची प्रवृत्ति के कारण हम समान रूप से पंचतत्वों पर आश्रित इस जगत में पाई जाने वाली 84 योनियों के जीव का हक मार रहे हैं.">

गर्त में ले जा रही है वेदविहीन शिक्षा

2017/11/25



शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का दर्द सामने आया भोपाल, वेदविहीन शिक्षा समाज को गर्त में ले जा रही है. चेतावनी भरे शब्दों के बीच यह वेदना है शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती की. वह मानस भवन में आयोजित धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे. 'वर्तमान परिस्थिति में धर्म के प्रति हमारा कर्तव्य' विषय पर बोलते हुये उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों के लिये आधुनिक शिक्षा व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया. उनका यहां कहना था कि हमारी वैदिक शिक्षा को मिटाने के प्रयास का नतीजा को-एजुकेशन के रूप में सामने है. स्वाभाविक तौर पर इससे शील हरण की संभावना बनी रहती है.इससे पहले जगत्ïगुरु ने सागर कॉलेज में धर्म के क्षेत्र में आध्यात्मिक शिक्षा विषय पर अपनी बात रखी. यहां शनिवार को दिन में पादुका पूजन समारोह है. इसके बाद स्वामी जी बच्चों के प्रश्नों के जवाब भी देंगे. सांस्कारिक बनाती है वैदिक शिक्षा समाज के वातावरण को दूषित होने से बचाने के लिये शिक्षा नीति में परिवर्तन का सुझाव देते हुये उन्होंने वैदिक शिक्षा को संस्कारिक बनाने वाला बताया. इसके साथ ही कहा कि जीवन का उद्देश्य भौतिक विकास नहीं, संस्कार और भगवत्ति प्राप्ति है. इसलिये वेदविहीन शिक्षा, वेदविहीन विज्ञान के बिना जो भौतिक विकास दिखाई देता है असल में वह विनाश है. क्योंकि जल, हवा और पृथ्वी के बेतरतीब दोहन को विकास नहीं कहा जा सकता है. वह इसलिये कि लालची प्रवृत्ति के कारण हम समान रूप से पंचतत्वों पर आश्रित इस जगत में पाई जाने वाली 84 योनियों के जीव का हक मार रहे हैं.


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