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केंद्रीय बजट

2018/02/02



मोदी सरकार के बजट में सबसे बड़ी विशेषता यही कही जा सकती है कि इससे जन स्वास्थ्य के लिये नेशनल हेल्प प्रोटेक्शन लागू की गयी है जिसे दुनिया की सबसे बड़ी सरकारी फंड से चलायी जाने वाली स्वास्थ योजना होने का दावा किया गया है. इसके अंतर्गत 10 करोड़ निर्धन वर्ग के लोग आयेंगे और उनके परिवारों को 5 लाख रुपये प्रति वर्ष इलाज दिया जाएगा. इसमें उनके पास एक हेल्थ कार्ड होगा जिसके आधार पर वह किसी भी सरकारी अस्पताल में 5 लाख रुपयों तक इलाज पा सकेंगे. यह योजना इसलिए चल जाने की उम्मीद है कि इस स्कीम की फंडिग सरकार करेगी. इस संदर्भ में केंद्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने अमेरिका की उस हेल्थ स्कीम का उल्लेख किया जिसे पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उनके कार्यकाल में लागू किया था जिसे बाद में नये राष्ट्रपति श्री डोनाल्ड ट्रम्प ने रद्द कर दिया. इसे किसान वर्ग के लिये लोक लुभावन बजट कहा जा सकता है जिसमें जो योजनाएं चल रही हैं उनकी ही उपलब्धि का बखान है. किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा बढ़ाकर पशुपालन आदि पर भी कर दिया गया है. अब हर फसल पर सरकार समर्थन मूल्य देगी. लेकिन मध्यप्रदेश में हाल ही में दालों के किसानों को समर्थन मूल्य होते हुए भी समर्थन मूल्य नहीं पा सके. स्कीमों में सबसे बड़ी बात उनकी घोषणाएं नहीं बल्कि यह होता है कि उनका क्रियान्वयन कैसे होता है. स्वास्थ्य की स्कीम में भी यह परखना होगा कि स्वास्थ्य सेवाएं अभी गांवों तक पहुंची नहीं है. नेशनल होल्कर स्कीम को इसी संदर्भ में जांचा परखा जायेगा. इसी योजना में 50 करोड़ लोगों को लाभान्वित होने का अनुमान है. श्री जेटली ने कहा कि सरकार यूनीवर्सल हेल्थ कवरेज की ओर बढ़ रही है. देश में क्षय रोग से सर्वाधिक मृत्यु होती है. इसके लिये 600 करोड़ रुपयों का प्रावधान है. हर तीन संसदीय क्षेत्रों में एक मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जायेगा. बजट की सबसे बड़ी चिंता और उपलब्धि वित्तीय (फिसकल) घाटा या उसे सम्हालना होता है. श्री जेटली ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी सरकार ने वर्तमान में इसे 3.5 प्रतिशत रखा और यह उम्मीद जाहिर की है कि वित्तीय वर्ष 2018-19 में उसे 3.3 प्रतिशत कर लिया जायेगा. उन्होंने यह स्वीकार किया कि चालू वर्ष में इसे 3.2 प्रतिशत रखना था पर पुनरीक्षित अनुमानों में यह 3.5 प्रतिशत रहा. फिसकल डेफीशिट 3.3 प्रतिशत पर 6,24,276 करोड़ रुपयों का रहेगा, जिसे सरकार कर्ज लेकर पूरा करेगी. किसान हित में सभी खाद्यान्नों के समर्थन मूल्यों में 1.5 गुना वृद्धि की गयी है. कृषि क्षेत्र में दो हजार करोड़ रुपयों का फंड स्थापित किया गया है. कृषि ऋणों के लिये 11 लाख करोड़ रुपयों की व्यवस्था की गयी है. कृषि व डेरी क्षेत्र में आपरेशन ग्रीन व आपरेशन फ्लड की तरह अब टमाटर, आलू और प्याज के लिये भी सहायता दी जायेगी. मध्यम वर्ग के लिये इस बजट में ज्यादा कुछ नहीं है. इनकम टैक्स में छूट की सीमा यथावत ही 3.5 लाख रुपये की रखी गयी है. जबकि आशा थी कि यह सीमा 5 लाख रुपये हो जायेगी. कर्मचारी वर्ग को स्टैंडर्ड कटौती को 40,000 रुपये तक कर दिया गया लेकिन आयकरदाताओं पर शिक्षा और स्वास्थ्य का सेस एक प्रतिशत बढ़ा दिया है. ट्रांसपोर्ट में स्वास्थ्य पर दी जा रही छूट खत्म कर दी गयी. वरिष्ठï नागरिकों को बैंक जमा पर दी जा रही छूट 7.5 लाख से दुगनी करते हुए उसे 15 लाख रुपये कर दिया गया है. सरकार की फंड बढ़ाने की योजनाओं में जो एक्सचेंज ट्रेड भारत-22 में जो 14,500 करोड़ रुपये पाने की योजना थी उसमें इससे भी ज्यादा रुपया आ गया. एयर इंडिया सहित 24 केंद्रीय उपक्रमों में विनिवेश किया जा रहा है जिसमें 72,500 करोड़ रुपयों की सर्वाधिक सीमा रखी गयी और इनको बेचने से एक लाख करोड़ रुपये प्राप्त होंगे. आगामी वित्त वर्ष 2018-19 में विनिवेश में 80,000 करोड़ रुपये पाने का लक्ष्य है. बजट में रेल बजट भी समाहित हो गया है. इस पर कुछ खास नहीं किया गया. यह कहा गया है कि पटरी बदली जायेगी और कुछ मीटर गेज लाइनों को ब्राड गेज किया जायेगा. राष्ट्रपति का वेतन बढ़ाकर 5 लाख, उपराष्ट्रपति को 4 लाख और राज्यपालों का वेतन 3.5 लाख कर दिया गया है. सांसदों को आश्वासन दिया गया है कि हर 5 साल में उनके भत्ते बढ़ाये जायेंगे. एक बड़ी राहत यह जरूर है कि पेट्रोल-डीजल में एक्साइज ड्यूटी 2 रुपये घटा दी गयी है. ट्रक व बसों के टायरों पर टैक्स बढ़ा दिया गया है. मोमबत्ती व पतंग महंगे, खाने का तेल महंगा, चश्मे महंगे लेकिन काजू सस्ता हो गया है. लोगों को चाहिये कि काजू खूब खायें. घड़ी और परफ्यूम महंगे हो गये. गुजरात के बडोदरा (बड़ौदा) में रेलवे विश्वविद्यालय स्थापित किया जायेगा. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि इस बजट से विकास व सुखद जीवन निर्मित होगा. यह सर्वजन हिताय है.


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