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नयी दिल्ली, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि बैंक घोटालों का कारोबार में आसानी पर भी असर होगा और बार-बार ऐसे घोटाले होने पर अर्थव्यवस्था में सुधार के सारे प्रयास धरे रह जाएंगे। श्री जेटली ने यहां वैश्विक व्यापार शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यह चिंता का विषय है कि बैंकों में ऋण घोटाला होता है तथा किसी को इसकी भनक तक नहीं लगती तथा न ही इन घाेटालों को लेकर कोई तंत्र को सचेत करता है। वित्त मंत्री ने जानबूझकर बैंकों का ऋण नहीं लौटाने को ‘अर्थव्यवस्था पर दाग’ करार देते हुए कहा कि बैंक घोटालों का कारोबार में आसानी के माहौल पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। बैंकों में इसी तरह से बार-बार यदि घोटाले होते रहे तो इनका अर्थव्यवस्था पर ज्यादा असर होगा और सुधार के सारे के सारे प्रयास बेकार हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि नियामकों की सिस्टम में और घोटाले रोकने में अहम भूमिका होती है। बार-बार घोटाले नहीं हों इसको लेकर नियामकों को ही अपनी तीसरी आँख खुली रखनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि भारतीय तंत्र में नियामकों की जगह राजनीतिज्ञ जवाबदेह होते हैं। घोटाले नहीं हों इसकी निगरानी के लिए उन्होंने ऐसी एजेंसी की जरूरत पर बल दिया जो देखे कि कौन सी प्रणाली लागू कि जानी चाहिये जो अनियमितताओं को पकड़े और तंत्र की खामियों को दूर करे। "/> नयी दिल्ली, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि बैंक घोटालों का कारोबार में आसानी पर भी असर होगा और बार-बार ऐसे घोटाले होने पर अर्थव्यवस्था में सुधार के सारे प्रयास धरे रह जाएंगे। श्री जेटली ने यहां वैश्विक व्यापार शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यह चिंता का विषय है कि बैंकों में ऋण घोटाला होता है तथा किसी को इसकी भनक तक नहीं लगती तथा न ही इन घाेटालों को लेकर कोई तंत्र को सचेत करता है। वित्त मंत्री ने जानबूझकर बैंकों का ऋण नहीं लौटाने को ‘अर्थव्यवस्था पर दाग’ करार देते हुए कहा कि बैंक घोटालों का कारोबार में आसानी के माहौल पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। बैंकों में इसी तरह से बार-बार यदि घोटाले होते रहे तो इनका अर्थव्यवस्था पर ज्यादा असर होगा और सुधार के सारे के सारे प्रयास बेकार हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि नियामकों की सिस्टम में और घोटाले रोकने में अहम भूमिका होती है। बार-बार घोटाले नहीं हों इसको लेकर नियामकों को ही अपनी तीसरी आँख खुली रखनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि भारतीय तंत्र में नियामकों की जगह राजनीतिज्ञ जवाबदेह होते हैं। घोटाले नहीं हों इसकी निगरानी के लिए उन्होंने ऐसी एजेंसी की जरूरत पर बल दिया जो देखे कि कौन सी प्रणाली लागू कि जानी चाहिये जो अनियमितताओं को पकड़े और तंत्र की खामियों को दूर करे। "/> नयी दिल्ली, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि बैंक घोटालों का कारोबार में आसानी पर भी असर होगा और बार-बार ऐसे घोटाले होने पर अर्थव्यवस्था में सुधार के सारे प्रयास धरे रह जाएंगे। श्री जेटली ने यहां वैश्विक व्यापार शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यह चिंता का विषय है कि बैंकों में ऋण घोटाला होता है तथा किसी को इसकी भनक तक नहीं लगती तथा न ही इन घाेटालों को लेकर कोई तंत्र को सचेत करता है। वित्त मंत्री ने जानबूझकर बैंकों का ऋण नहीं लौटाने को ‘अर्थव्यवस्था पर दाग’ करार देते हुए कहा कि बैंक घोटालों का कारोबार में आसानी के माहौल पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। बैंकों में इसी तरह से बार-बार यदि घोटाले होते रहे तो इनका अर्थव्यवस्था पर ज्यादा असर होगा और सुधार के सारे के सारे प्रयास बेकार हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि नियामकों की सिस्टम में और घोटाले रोकने में अहम भूमिका होती है। बार-बार घोटाले नहीं हों इसको लेकर नियामकों को ही अपनी तीसरी आँख खुली रखनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि भारतीय तंत्र में नियामकों की जगह राजनीतिज्ञ जवाबदेह होते हैं। घोटाले नहीं हों इसकी निगरानी के लिए उन्होंने ऐसी एजेंसी की जरूरत पर बल दिया जो देखे कि कौन सी प्रणाली लागू कि जानी चाहिये जो अनियमितताओं को पकड़े और तंत्र की खामियों को दूर करे। ">

कारोबार में आसानी पर भी होगा बैंक घोटालों का असर : जेटली

2018/02/24



नयी दिल्ली, वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि बैंक घोटालों का कारोबार में आसानी पर भी असर होगा और बार-बार ऐसे घोटाले होने पर अर्थव्यवस्था में सुधार के सारे प्रयास धरे रह जाएंगे। श्री जेटली ने यहां वैश्विक व्यापार शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यह चिंता का विषय है कि बैंकों में ऋण घोटाला होता है तथा किसी को इसकी भनक तक नहीं लगती तथा न ही इन घाेटालों को लेकर कोई तंत्र को सचेत करता है। वित्त मंत्री ने जानबूझकर बैंकों का ऋण नहीं लौटाने को ‘अर्थव्यवस्था पर दाग’ करार देते हुए कहा कि बैंक घोटालों का कारोबार में आसानी के माहौल पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। बैंकों में इसी तरह से बार-बार यदि घोटाले होते रहे तो इनका अर्थव्यवस्था पर ज्यादा असर होगा और सुधार के सारे के सारे प्रयास बेकार हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि नियामकों की सिस्टम में और घोटाले रोकने में अहम भूमिका होती है। बार-बार घोटाले नहीं हों इसको लेकर नियामकों को ही अपनी तीसरी आँख खुली रखनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि भारतीय तंत्र में नियामकों की जगह राजनीतिज्ञ जवाबदेह होते हैं। घोटाले नहीं हों इसकी निगरानी के लिए उन्होंने ऐसी एजेंसी की जरूरत पर बल दिया जो देखे कि कौन सी प्रणाली लागू कि जानी चाहिये जो अनियमितताओं को पकड़े और तंत्र की खामियों को दूर करे।


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