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इसी संसार में है स्वर्ग व नरक: भाईजी

मानस भवन में पालकी उत्सव की प्रस्तुति भोपाल, श्री साई अमृत कथा में सुमीत पोन्दा भाईजी ने मनुष्य के कर्मों के बारे में बताया कि अपने किए कर्मों का फल मनुष्य को इस जन्म में नही तो अगले कई जन्मों में चुकाना पड़ता है. इसलिए मनुष्य को पुण्य कार्य में ध्यान देना चाहिए क्योकि स्वर्ग और नर्क इसी संसार में है. उसे समझाने के लिए उन्होंने साई-चरित्र का विशेष उल्लेख किया. भाईजी ने कथा में आगे बताया कि भारतवर्ष की जाति व्यवस्था कर्म पर आधारित थी जो पिछले कुछ दो तीन सौ वर्षों मेें जन्म के आधार की व्यवस्था में तब्दील हो गई और बाबा इस जन्म पर आधाधारित व्यवस्था के बिल्कुल खिलाफ थे. कथा में भाईजी ने पालकी उत्सव की बहुत अद्भुत संगीतमय प्रस्तुति करते हुए मानस भवन में उसे जीवंत कर दिया. जिसपर सभी भक्तगण झूम उठे. कथा विश्राम के पूर्व बाबा की समाधि का वर्णन करते हुए भाईजी तथा सभी भक्तजन भावुक हो उठे. इस प्रकार पांचवी कथा को अश्रुपूर्ण विदाई दी गई.  "/> इसी संसार में है स्वर्ग व नरक: भाईजी

मानस भवन में पालकी उत्सव की प्रस्तुति भोपाल, श्री साई अमृत कथा में सुमीत पोन्दा भाईजी ने मनुष्य के कर्मों के बारे में बताया कि अपने किए कर्मों का फल मनुष्य को इस जन्म में नही तो अगले कई जन्मों में चुकाना पड़ता है. इसलिए मनुष्य को पुण्य कार्य में ध्यान देना चाहिए क्योकि स्वर्ग और नर्क इसी संसार में है. उसे समझाने के लिए उन्होंने साई-चरित्र का विशेष उल्लेख किया. भाईजी ने कथा में आगे बताया कि भारतवर्ष की जाति व्यवस्था कर्म पर आधारित थी जो पिछले कुछ दो तीन सौ वर्षों मेें जन्म के आधार की व्यवस्था में तब्दील हो गई और बाबा इस जन्म पर आधाधारित व्यवस्था के बिल्कुल खिलाफ थे. कथा में भाईजी ने पालकी उत्सव की बहुत अद्भुत संगीतमय प्रस्तुति करते हुए मानस भवन में उसे जीवंत कर दिया. जिसपर सभी भक्तगण झूम उठे. कथा विश्राम के पूर्व बाबा की समाधि का वर्णन करते हुए भाईजी तथा सभी भक्तजन भावुक हो उठे. इस प्रकार पांचवी कथा को अश्रुपूर्ण विदाई दी गई.  "/> इसी संसार में है स्वर्ग व नरक: भाईजी

मानस भवन में पालकी उत्सव की प्रस्तुति भोपाल, श्री साई अमृत कथा में सुमीत पोन्दा भाईजी ने मनुष्य के कर्मों के बारे में बताया कि अपने किए कर्मों का फल मनुष्य को इस जन्म में नही तो अगले कई जन्मों में चुकाना पड़ता है. इसलिए मनुष्य को पुण्य कार्य में ध्यान देना चाहिए क्योकि स्वर्ग और नर्क इसी संसार में है. उसे समझाने के लिए उन्होंने साई-चरित्र का विशेष उल्लेख किया. भाईजी ने कथा में आगे बताया कि भारतवर्ष की जाति व्यवस्था कर्म पर आधारित थी जो पिछले कुछ दो तीन सौ वर्षों मेें जन्म के आधार की व्यवस्था में तब्दील हो गई और बाबा इस जन्म पर आधाधारित व्यवस्था के बिल्कुल खिलाफ थे. कथा में भाईजी ने पालकी उत्सव की बहुत अद्भुत संगीतमय प्रस्तुति करते हुए मानस भवन में उसे जीवंत कर दिया. जिसपर सभी भक्तगण झूम उठे. कथा विश्राम के पूर्व बाबा की समाधि का वर्णन करते हुए भाईजी तथा सभी भक्तजन भावुक हो उठे. इस प्रकार पांचवी कथा को अश्रुपूर्ण विदाई दी गई.  ">

कथा में लिया अंगदान का संकल्प

2018/01/16



इसी संसार में है स्वर्ग व नरक: भाईजी

मानस भवन में पालकी उत्सव की प्रस्तुति भोपाल, श्री साई अमृत कथा में सुमीत पोन्दा भाईजी ने मनुष्य के कर्मों के बारे में बताया कि अपने किए कर्मों का फल मनुष्य को इस जन्म में नही तो अगले कई जन्मों में चुकाना पड़ता है. इसलिए मनुष्य को पुण्य कार्य में ध्यान देना चाहिए क्योकि स्वर्ग और नर्क इसी संसार में है. उसे समझाने के लिए उन्होंने साई-चरित्र का विशेष उल्लेख किया. भाईजी ने कथा में आगे बताया कि भारतवर्ष की जाति व्यवस्था कर्म पर आधारित थी जो पिछले कुछ दो तीन सौ वर्षों मेें जन्म के आधार की व्यवस्था में तब्दील हो गई और बाबा इस जन्म पर आधाधारित व्यवस्था के बिल्कुल खिलाफ थे. कथा में भाईजी ने पालकी उत्सव की बहुत अद्भुत संगीतमय प्रस्तुति करते हुए मानस भवन में उसे जीवंत कर दिया. जिसपर सभी भक्तगण झूम उठे. कथा विश्राम के पूर्व बाबा की समाधि का वर्णन करते हुए भाईजी तथा सभी भक्तजन भावुक हो उठे. इस प्रकार पांचवी कथा को अश्रुपूर्ण विदाई दी गई.  


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