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लंदन ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि गर्भवती महिलाओं के एस्प्रिन लेने से गर्भ में पल रहे बच्चों के मस्तिष्क पक्षाघात (सेरिब्रल पैल्सि) की चपेट में आने का खतरा ढाई गुना बढ़ जाता है.वैज्ञानिकों ने इसके साथ पैरासिटामोल के प्रति भी ऐसी माताओं को अगाह करते हुए इससे खतरे को 50 प्रतिशत तक होने की आशंका व्यक्त की है. यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगेन के वैज्ञानिकों ने डेनमार्क और नार्वे की 185,617 महिलाओं और उनके बच्चों पर अध्ययन किया . उनसे गर्भ के दौरान दर्द निवारक दवाओं के इस्तेमाल के बारे में पूछा गया था. हालांकि उन्होंने कहा है इन दावाओं पर और शोध करने की आवश्यकता है. उन्होंने यह भी कहा है कि उनके अध्ययन में दर्द निवारक दवा आइबुफ्रोन के इस्तेमाल से बच्चों के इस तरह की बीमारियों के शिकार होने का कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिला है. अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि ब्रिटने में हर साल दो हजार बच्चे मस्तिष्क पक्षाघात की चपेट में आते हैं. उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की सलाह पर गर्भवती महिलाओं के इन दवाओं के सेवन को सुरक्षित माना जा रहा था लेकिन अब इनकी समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है और इनके बदले दूसरी दवाओं का विकल्प बच्चों की सेहत के लिए बेहतर होगा. उन्होंने दावा किया कि ज्यादातर मामलों में इस तरह की दवाईयों के सेवन से गर्भ में पल रहे बच्चे के मस्तिष्क में ऑक्सीजन और खून की आपूर्ति बाधित होने अथवा मस्तिष्क में खून का रिसाव होने से यह बीमारी होती है. इसके अलावा बच्चों में मांसपेशियों में कमजारी, बोलने की समस्या, धुंधलापन और सीखने की प्रक्रिया में समस्या जैसे लक्ष्ण भी होते हैं जो दो अथवा तीन साल की उम्र के पहले नहीं प्रकट हो सकते."/> लंदन ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि गर्भवती महिलाओं के एस्प्रिन लेने से गर्भ में पल रहे बच्चों के मस्तिष्क पक्षाघात (सेरिब्रल पैल्सि) की चपेट में आने का खतरा ढाई गुना बढ़ जाता है.वैज्ञानिकों ने इसके साथ पैरासिटामोल के प्रति भी ऐसी माताओं को अगाह करते हुए इससे खतरे को 50 प्रतिशत तक होने की आशंका व्यक्त की है. यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगेन के वैज्ञानिकों ने डेनमार्क और नार्वे की 185,617 महिलाओं और उनके बच्चों पर अध्ययन किया . उनसे गर्भ के दौरान दर्द निवारक दवाओं के इस्तेमाल के बारे में पूछा गया था. हालांकि उन्होंने कहा है इन दावाओं पर और शोध करने की आवश्यकता है. उन्होंने यह भी कहा है कि उनके अध्ययन में दर्द निवारक दवा आइबुफ्रोन के इस्तेमाल से बच्चों के इस तरह की बीमारियों के शिकार होने का कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिला है. अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि ब्रिटने में हर साल दो हजार बच्चे मस्तिष्क पक्षाघात की चपेट में आते हैं. उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की सलाह पर गर्भवती महिलाओं के इन दवाओं के सेवन को सुरक्षित माना जा रहा था लेकिन अब इनकी समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है और इनके बदले दूसरी दवाओं का विकल्प बच्चों की सेहत के लिए बेहतर होगा. उन्होंने दावा किया कि ज्यादातर मामलों में इस तरह की दवाईयों के सेवन से गर्भ में पल रहे बच्चे के मस्तिष्क में ऑक्सीजन और खून की आपूर्ति बाधित होने अथवा मस्तिष्क में खून का रिसाव होने से यह बीमारी होती है. इसके अलावा बच्चों में मांसपेशियों में कमजारी, बोलने की समस्या, धुंधलापन और सीखने की प्रक्रिया में समस्या जैसे लक्ष्ण भी होते हैं जो दो अथवा तीन साल की उम्र के पहले नहीं प्रकट हो सकते."/> लंदन ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि गर्भवती महिलाओं के एस्प्रिन लेने से गर्भ में पल रहे बच्चों के मस्तिष्क पक्षाघात (सेरिब्रल पैल्सि) की चपेट में आने का खतरा ढाई गुना बढ़ जाता है.वैज्ञानिकों ने इसके साथ पैरासिटामोल के प्रति भी ऐसी माताओं को अगाह करते हुए इससे खतरे को 50 प्रतिशत तक होने की आशंका व्यक्त की है. यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगेन के वैज्ञानिकों ने डेनमार्क और नार्वे की 185,617 महिलाओं और उनके बच्चों पर अध्ययन किया . उनसे गर्भ के दौरान दर्द निवारक दवाओं के इस्तेमाल के बारे में पूछा गया था. हालांकि उन्होंने कहा है इन दावाओं पर और शोध करने की आवश्यकता है. उन्होंने यह भी कहा है कि उनके अध्ययन में दर्द निवारक दवा आइबुफ्रोन के इस्तेमाल से बच्चों के इस तरह की बीमारियों के शिकार होने का कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिला है. अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि ब्रिटने में हर साल दो हजार बच्चे मस्तिष्क पक्षाघात की चपेट में आते हैं. उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की सलाह पर गर्भवती महिलाओं के इन दवाओं के सेवन को सुरक्षित माना जा रहा था लेकिन अब इनकी समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है और इनके बदले दूसरी दवाओं का विकल्प बच्चों की सेहत के लिए बेहतर होगा. उन्होंने दावा किया कि ज्यादातर मामलों में इस तरह की दवाईयों के सेवन से गर्भ में पल रहे बच्चे के मस्तिष्क में ऑक्सीजन और खून की आपूर्ति बाधित होने अथवा मस्तिष्क में खून का रिसाव होने से यह बीमारी होती है. इसके अलावा बच्चों में मांसपेशियों में कमजारी, बोलने की समस्या, धुंधलापन और सीखने की प्रक्रिया में समस्या जैसे लक्ष्ण भी होते हैं जो दो अथवा तीन साल की उम्र के पहले नहीं प्रकट हो सकते.">

एस्प्रिन से गर्भ में पल रहे बच्चे को खतरा

2017/11/27



लंदन ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि गर्भवती महिलाओं के एस्प्रिन लेने से गर्भ में पल रहे बच्चों के मस्तिष्क पक्षाघात (सेरिब्रल पैल्सि) की चपेट में आने का खतरा ढाई गुना बढ़ जाता है.वैज्ञानिकों ने इसके साथ पैरासिटामोल के प्रति भी ऐसी माताओं को अगाह करते हुए इससे खतरे को 50 प्रतिशत तक होने की आशंका व्यक्त की है. यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगेन के वैज्ञानिकों ने डेनमार्क और नार्वे की 185,617 महिलाओं और उनके बच्चों पर अध्ययन किया . उनसे गर्भ के दौरान दर्द निवारक दवाओं के इस्तेमाल के बारे में पूछा गया था. हालांकि उन्होंने कहा है इन दावाओं पर और शोध करने की आवश्यकता है. उन्होंने यह भी कहा है कि उनके अध्ययन में दर्द निवारक दवा आइबुफ्रोन के इस्तेमाल से बच्चों के इस तरह की बीमारियों के शिकार होने का कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिला है. अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि ब्रिटने में हर साल दो हजार बच्चे मस्तिष्क पक्षाघात की चपेट में आते हैं. उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की सलाह पर गर्भवती महिलाओं के इन दवाओं के सेवन को सुरक्षित माना जा रहा था लेकिन अब इनकी समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है और इनके बदले दूसरी दवाओं का विकल्प बच्चों की सेहत के लिए बेहतर होगा. उन्होंने दावा किया कि ज्यादातर मामलों में इस तरह की दवाईयों के सेवन से गर्भ में पल रहे बच्चे के मस्तिष्क में ऑक्सीजन और खून की आपूर्ति बाधित होने अथवा मस्तिष्क में खून का रिसाव होने से यह बीमारी होती है. इसके अलावा बच्चों में मांसपेशियों में कमजारी, बोलने की समस्या, धुंधलापन और सीखने की प्रक्रिया में समस्या जैसे लक्ष्ण भी होते हैं जो दो अथवा तीन साल की उम्र के पहले नहीं प्रकट हो सकते.


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