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राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के उपलक्ष्य में खिलाई गई थी बच्चों को गोली

नवभारत न्यूज रतलाम, राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के उपलक्ष्य में पुरे जिले में 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों को कृमि संक्रामण की रोकथाम के लिए एलबेम्डाजोल की गोली खिलाई गई। गोली खिलाने का मुख्य उद्देश्य बच्चों को बिमारी से दूर रखना है। इसी अभियान के तहत बरबड़ रोड़ स्थित संतमीरा स्कूल के बच्चों को भी एलम्बेडाजोल गोली खिलाई गई थी। गोली खाने के कुछ ही समय बाद बच्चों में ठंड लगने के साथ ही घबराहट एवं उल्टी की शिकायते होने लगी थी। इस पर बच्चों को जिला चिकित्सालय लाया गया। यहां 40 बच्चों को लाया गया, जिसमें 20 को प्राथमिक उपचार एवं 20 को भर्ती किया गया। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के उपलक्ष्य में शहर सहित जिले के स्कूल, आंगनवाडी केन्द्र, आशा कार्यकर्ता सहित अन्य विभाग द्वारा बच्चों को एलबेन्डाजोल की गोली खिलाई गई। बच्चों को शारीरिक एवं बोद्धिक विकास के लिए यह गोली खिलाई गई थी। यह गोली खाने से बरबड़ रोड़ स्थित संत मीरा कान्वेंट स्कूल के बच्चों को शिकायते होने लगी। पहले के वहां उपस्थित शिक्षक एवं स्टॉफ ने उन्हे सम्भालने का प्रयास किया लेकिन एक के बाद एक करके अधिकांश बच्चों को घबराहट, उल्टी एवं ठंड की शिकायत होने पर स्कूल प्रबंधन भी घबरा गया था और तुरंत सभी बच्चों को जिला चिकित्सालय लेकर आए। कृमि-संक्रमण से बच्चों का जहां एक ओर शारीरिक एवं बौद्धिक विकास बाधित होता है, वहीं दूसरी ओर उनके पोषण एवं हिमोग्लोबीन स्तर पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। बच्चों में कृमि संक्रमण के कारण शालेय उपस्थिति में कमी, एकाग्रता एवं सीखने की क्षमता में कमी आती है बच्चों में कृमि संक्रमण की रोकथाम एक कृमि नाशक मिठी गोली का सेवन करने से संभव है। उसी के चलते शुक्रवार को गोली खिलाई गई। रतलाम जिलें में इस वर्ष 5 लाख से अधिक बच्चों को गोली खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

खून बढ़ाने गई टीमों ने बिगाड़ी बच्चों की सेहत

खंडवा,खार-खालवा। स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों में खून की कमी न हो इसलिए क्रमीनाशक गोलियां एल्वेंडाझोल खिलाई। जिले के आधा दर्जन स्थानों पर स्कूली बच्चों पर असर बुरा पड़ा। खंडवा के बेडिय़ाव में 9, खालवा के असरफनगर में 35 बच्चों की तबीयत बिगड़ी। पुनासा,किल्लौद व अन्य स्थानों से भी इस तरह की खबरें हैं। बेडिय़ांव गांव में क्रमीनाशक गोली खिलाने से कुछ स्कूली बच्चों की हालत बिगड़ गई। कई बच्चों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। इसमें खुशबू पिता सुशील बेडिय़ाव, रिज़वाना फ रीद, नंदनी रविन्द्र, प्रेरणा दिनेश, वैष्णवी जितेंद्र, ट्विंकल दीपक, नेहा अनिल, राखी गणेश, प्रिया इंदरसिंह साल हैं। इनका पेट दर्द होने लगा था। गोली एल्बेंडा जोन है; जो कृमिनाशक है। सकू जगताब शिक्षिका ने बताया कि करीब 1 बजे दोपहर में गोली खिलाई। 20 मिनट बाद से बच्चों को तकलीफ होने लगी। आशा कार्यकर्ता उषा नागनपुरे ने ट्रेनिंग में बताया था कि बच्चों की मामूली तबीयत खराब हो सकती है।

वार्ड में मची अफरा-तफरी

जर्नल ओपोडी में बच्चों को कतार में बैठाकर चिकित्सक मुकेश डाबर ने देखाना प्रारंभ किया था। लेकिन जब उन्हे लगा की बच्चों की स्थित गंभीर हो रही है और बच्चों की संख्या भी अधिक है तो उन्होंने सभी बच्चों को ईमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया और वहीं ईलाज भी प्रारंभ कर दिया। मामले की जानकारी मिलने पर बाल चिकित्सालय से भी चिकित्सक जिला चिकित्सालय पहुंचे और बच्चों का उपचार प्रारंभ किया।यहां कुछ ही देर में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। कुछ बच्चे तो इतना घबरा गए थे की वह रोने लगे थे। कुछ बच्चों को इतनी ठंड लग रही थी थी नर्स एवं स्कूल स्टॉफ ने उन्हे कंबल ओडा कर हिम्मत रखने की बात कह रहे थे। गोली खाने से 6,7 एवं 8 कक्षा के बच्चे प्रभावित हुए है। इमरजेंसी वार्ड में जगह कम होने पर एक पलंग पर दो-दो बच्चों को लेटाकर उपचार दिया गया।"/>

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के उपलक्ष्य में खिलाई गई थी बच्चों को गोली

नवभारत न्यूज रतलाम, राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के उपलक्ष्य में पुरे जिले में 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों को कृमि संक्रामण की रोकथाम के लिए एलबेम्डाजोल की गोली खिलाई गई। गोली खिलाने का मुख्य उद्देश्य बच्चों को बिमारी से दूर रखना है। इसी अभियान के तहत बरबड़ रोड़ स्थित संतमीरा स्कूल के बच्चों को भी एलम्बेडाजोल गोली खिलाई गई थी। गोली खाने के कुछ ही समय बाद बच्चों में ठंड लगने के साथ ही घबराहट एवं उल्टी की शिकायते होने लगी थी। इस पर बच्चों को जिला चिकित्सालय लाया गया। यहां 40 बच्चों को लाया गया, जिसमें 20 को प्राथमिक उपचार एवं 20 को भर्ती किया गया। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के उपलक्ष्य में शहर सहित जिले के स्कूल, आंगनवाडी केन्द्र, आशा कार्यकर्ता सहित अन्य विभाग द्वारा बच्चों को एलबेन्डाजोल की गोली खिलाई गई। बच्चों को शारीरिक एवं बोद्धिक विकास के लिए यह गोली खिलाई गई थी। यह गोली खाने से बरबड़ रोड़ स्थित संत मीरा कान्वेंट स्कूल के बच्चों को शिकायते होने लगी। पहले के वहां उपस्थित शिक्षक एवं स्टॉफ ने उन्हे सम्भालने का प्रयास किया लेकिन एक के बाद एक करके अधिकांश बच्चों को घबराहट, उल्टी एवं ठंड की शिकायत होने पर स्कूल प्रबंधन भी घबरा गया था और तुरंत सभी बच्चों को जिला चिकित्सालय लेकर आए। कृमि-संक्रमण से बच्चों का जहां एक ओर शारीरिक एवं बौद्धिक विकास बाधित होता है, वहीं दूसरी ओर उनके पोषण एवं हिमोग्लोबीन स्तर पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। बच्चों में कृमि संक्रमण के कारण शालेय उपस्थिति में कमी, एकाग्रता एवं सीखने की क्षमता में कमी आती है बच्चों में कृमि संक्रमण की रोकथाम एक कृमि नाशक मिठी गोली का सेवन करने से संभव है। उसी के चलते शुक्रवार को गोली खिलाई गई। रतलाम जिलें में इस वर्ष 5 लाख से अधिक बच्चों को गोली खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

खून बढ़ाने गई टीमों ने बिगाड़ी बच्चों की सेहत

खंडवा,खार-खालवा। स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों में खून की कमी न हो इसलिए क्रमीनाशक गोलियां एल्वेंडाझोल खिलाई। जिले के आधा दर्जन स्थानों पर स्कूली बच्चों पर असर बुरा पड़ा। खंडवा के बेडिय़ाव में 9, खालवा के असरफनगर में 35 बच्चों की तबीयत बिगड़ी। पुनासा,किल्लौद व अन्य स्थानों से भी इस तरह की खबरें हैं। बेडिय़ांव गांव में क्रमीनाशक गोली खिलाने से कुछ स्कूली बच्चों की हालत बिगड़ गई। कई बच्चों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। इसमें खुशबू पिता सुशील बेडिय़ाव, रिज़वाना फ रीद, नंदनी रविन्द्र, प्रेरणा दिनेश, वैष्णवी जितेंद्र, ट्विंकल दीपक, नेहा अनिल, राखी गणेश, प्रिया इंदरसिंह साल हैं। इनका पेट दर्द होने लगा था। गोली एल्बेंडा जोन है; जो कृमिनाशक है। सकू जगताब शिक्षिका ने बताया कि करीब 1 बजे दोपहर में गोली खिलाई। 20 मिनट बाद से बच्चों को तकलीफ होने लगी। आशा कार्यकर्ता उषा नागनपुरे ने ट्रेनिंग में बताया था कि बच्चों की मामूली तबीयत खराब हो सकती है।

वार्ड में मची अफरा-तफरी

जर्नल ओपोडी में बच्चों को कतार में बैठाकर चिकित्सक मुकेश डाबर ने देखाना प्रारंभ किया था। लेकिन जब उन्हे लगा की बच्चों की स्थित गंभीर हो रही है और बच्चों की संख्या भी अधिक है तो उन्होंने सभी बच्चों को ईमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया और वहीं ईलाज भी प्रारंभ कर दिया। मामले की जानकारी मिलने पर बाल चिकित्सालय से भी चिकित्सक जिला चिकित्सालय पहुंचे और बच्चों का उपचार प्रारंभ किया।यहां कुछ ही देर में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। कुछ बच्चे तो इतना घबरा गए थे की वह रोने लगे थे। कुछ बच्चों को इतनी ठंड लग रही थी थी नर्स एवं स्कूल स्टॉफ ने उन्हे कंबल ओडा कर हिम्मत रखने की बात कह रहे थे। गोली खाने से 6,7 एवं 8 कक्षा के बच्चे प्रभावित हुए है। इमरजेंसी वार्ड में जगह कम होने पर एक पलंग पर दो-दो बच्चों को लेटाकर उपचार दिया गया।"/>

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के उपलक्ष्य में खिलाई गई थी बच्चों को गोली

नवभारत न्यूज रतलाम, राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के उपलक्ष्य में पुरे जिले में 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों को कृमि संक्रामण की रोकथाम के लिए एलबेम्डाजोल की गोली खिलाई गई। गोली खिलाने का मुख्य उद्देश्य बच्चों को बिमारी से दूर रखना है। इसी अभियान के तहत बरबड़ रोड़ स्थित संतमीरा स्कूल के बच्चों को भी एलम्बेडाजोल गोली खिलाई गई थी। गोली खाने के कुछ ही समय बाद बच्चों में ठंड लगने के साथ ही घबराहट एवं उल्टी की शिकायते होने लगी थी। इस पर बच्चों को जिला चिकित्सालय लाया गया। यहां 40 बच्चों को लाया गया, जिसमें 20 को प्राथमिक उपचार एवं 20 को भर्ती किया गया। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के उपलक्ष्य में शहर सहित जिले के स्कूल, आंगनवाडी केन्द्र, आशा कार्यकर्ता सहित अन्य विभाग द्वारा बच्चों को एलबेन्डाजोल की गोली खिलाई गई। बच्चों को शारीरिक एवं बोद्धिक विकास के लिए यह गोली खिलाई गई थी। यह गोली खाने से बरबड़ रोड़ स्थित संत मीरा कान्वेंट स्कूल के बच्चों को शिकायते होने लगी। पहले के वहां उपस्थित शिक्षक एवं स्टॉफ ने उन्हे सम्भालने का प्रयास किया लेकिन एक के बाद एक करके अधिकांश बच्चों को घबराहट, उल्टी एवं ठंड की शिकायत होने पर स्कूल प्रबंधन भी घबरा गया था और तुरंत सभी बच्चों को जिला चिकित्सालय लेकर आए। कृमि-संक्रमण से बच्चों का जहां एक ओर शारीरिक एवं बौद्धिक विकास बाधित होता है, वहीं दूसरी ओर उनके पोषण एवं हिमोग्लोबीन स्तर पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। बच्चों में कृमि संक्रमण के कारण शालेय उपस्थिति में कमी, एकाग्रता एवं सीखने की क्षमता में कमी आती है बच्चों में कृमि संक्रमण की रोकथाम एक कृमि नाशक मिठी गोली का सेवन करने से संभव है। उसी के चलते शुक्रवार को गोली खिलाई गई। रतलाम जिलें में इस वर्ष 5 लाख से अधिक बच्चों को गोली खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

खून बढ़ाने गई टीमों ने बिगाड़ी बच्चों की सेहत

खंडवा,खार-खालवा। स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों में खून की कमी न हो इसलिए क्रमीनाशक गोलियां एल्वेंडाझोल खिलाई। जिले के आधा दर्जन स्थानों पर स्कूली बच्चों पर असर बुरा पड़ा। खंडवा के बेडिय़ाव में 9, खालवा के असरफनगर में 35 बच्चों की तबीयत बिगड़ी। पुनासा,किल्लौद व अन्य स्थानों से भी इस तरह की खबरें हैं। बेडिय़ांव गांव में क्रमीनाशक गोली खिलाने से कुछ स्कूली बच्चों की हालत बिगड़ गई। कई बच्चों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। इसमें खुशबू पिता सुशील बेडिय़ाव, रिज़वाना फ रीद, नंदनी रविन्द्र, प्रेरणा दिनेश, वैष्णवी जितेंद्र, ट्विंकल दीपक, नेहा अनिल, राखी गणेश, प्रिया इंदरसिंह साल हैं। इनका पेट दर्द होने लगा था। गोली एल्बेंडा जोन है; जो कृमिनाशक है। सकू जगताब शिक्षिका ने बताया कि करीब 1 बजे दोपहर में गोली खिलाई। 20 मिनट बाद से बच्चों को तकलीफ होने लगी। आशा कार्यकर्ता उषा नागनपुरे ने ट्रेनिंग में बताया था कि बच्चों की मामूली तबीयत खराब हो सकती है।

वार्ड में मची अफरा-तफरी

जर्नल ओपोडी में बच्चों को कतार में बैठाकर चिकित्सक मुकेश डाबर ने देखाना प्रारंभ किया था। लेकिन जब उन्हे लगा की बच्चों की स्थित गंभीर हो रही है और बच्चों की संख्या भी अधिक है तो उन्होंने सभी बच्चों को ईमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया और वहीं ईलाज भी प्रारंभ कर दिया। मामले की जानकारी मिलने पर बाल चिकित्सालय से भी चिकित्सक जिला चिकित्सालय पहुंचे और बच्चों का उपचार प्रारंभ किया।यहां कुछ ही देर में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। कुछ बच्चे तो इतना घबरा गए थे की वह रोने लगे थे। कुछ बच्चों को इतनी ठंड लग रही थी थी नर्स एवं स्कूल स्टॉफ ने उन्हे कंबल ओडा कर हिम्मत रखने की बात कह रहे थे। गोली खाने से 6,7 एवं 8 कक्षा के बच्चे प्रभावित हुए है। इमरजेंसी वार्ड में जगह कम होने पर एक पलंग पर दो-दो बच्चों को लेटाकर उपचार दिया गया।">

एलबेन्डाजोल की गोली खाने से 40 बच्चे बीमार

2018/02/10



राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के उपलक्ष्य में खिलाई गई थी बच्चों को गोली

  • शारीरिक व बौद्धिक विकास के लिए खिलाई गई थी गोली
नवभारत न्यूज रतलाम, राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के उपलक्ष्य में पुरे जिले में 1 से 19 वर्ष तक के बच्चों को कृमि संक्रामण की रोकथाम के लिए एलबेम्डाजोल की गोली खिलाई गई। गोली खिलाने का मुख्य उद्देश्य बच्चों को बिमारी से दूर रखना है। इसी अभियान के तहत बरबड़ रोड़ स्थित संतमीरा स्कूल के बच्चों को भी एलम्बेडाजोल गोली खिलाई गई थी। गोली खाने के कुछ ही समय बाद बच्चों में ठंड लगने के साथ ही घबराहट एवं उल्टी की शिकायते होने लगी थी। इस पर बच्चों को जिला चिकित्सालय लाया गया। यहां 40 बच्चों को लाया गया, जिसमें 20 को प्राथमिक उपचार एवं 20 को भर्ती किया गया। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के उपलक्ष्य में शहर सहित जिले के स्कूल, आंगनवाडी केन्द्र, आशा कार्यकर्ता सहित अन्य विभाग द्वारा बच्चों को एलबेन्डाजोल की गोली खिलाई गई। बच्चों को शारीरिक एवं बोद्धिक विकास के लिए यह गोली खिलाई गई थी। यह गोली खाने से बरबड़ रोड़ स्थित संत मीरा कान्वेंट स्कूल के बच्चों को शिकायते होने लगी। पहले के वहां उपस्थित शिक्षक एवं स्टॉफ ने उन्हे सम्भालने का प्रयास किया लेकिन एक के बाद एक करके अधिकांश बच्चों को घबराहट, उल्टी एवं ठंड की शिकायत होने पर स्कूल प्रबंधन भी घबरा गया था और तुरंत सभी बच्चों को जिला चिकित्सालय लेकर आए। कृमि-संक्रमण से बच्चों का जहां एक ओर शारीरिक एवं बौद्धिक विकास बाधित होता है, वहीं दूसरी ओर उनके पोषण एवं हिमोग्लोबीन स्तर पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। बच्चों में कृमि संक्रमण के कारण शालेय उपस्थिति में कमी, एकाग्रता एवं सीखने की क्षमता में कमी आती है बच्चों में कृमि संक्रमण की रोकथाम एक कृमि नाशक मिठी गोली का सेवन करने से संभव है। उसी के चलते शुक्रवार को गोली खिलाई गई। रतलाम जिलें में इस वर्ष 5 लाख से अधिक बच्चों को गोली खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

खून बढ़ाने गई टीमों ने बिगाड़ी बच्चों की सेहत

खंडवा,खार-खालवा। स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों में खून की कमी न हो इसलिए क्रमीनाशक गोलियां एल्वेंडाझोल खिलाई। जिले के आधा दर्जन स्थानों पर स्कूली बच्चों पर असर बुरा पड़ा। खंडवा के बेडिय़ाव में 9, खालवा के असरफनगर में 35 बच्चों की तबीयत बिगड़ी। पुनासा,किल्लौद व अन्य स्थानों से भी इस तरह की खबरें हैं। बेडिय़ांव गांव में क्रमीनाशक गोली खिलाने से कुछ स्कूली बच्चों की हालत बिगड़ गई। कई बच्चों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। इसमें खुशबू पिता सुशील बेडिय़ाव, रिज़वाना फ रीद, नंदनी रविन्द्र, प्रेरणा दिनेश, वैष्णवी जितेंद्र, ट्विंकल दीपक, नेहा अनिल, राखी गणेश, प्रिया इंदरसिंह साल हैं। इनका पेट दर्द होने लगा था। गोली एल्बेंडा जोन है; जो कृमिनाशक है। सकू जगताब शिक्षिका ने बताया कि करीब 1 बजे दोपहर में गोली खिलाई। 20 मिनट बाद से बच्चों को तकलीफ होने लगी। आशा कार्यकर्ता उषा नागनपुरे ने ट्रेनिंग में बताया था कि बच्चों की मामूली तबीयत खराब हो सकती है।

वार्ड में मची अफरा-तफरी

जर्नल ओपोडी में बच्चों को कतार में बैठाकर चिकित्सक मुकेश डाबर ने देखाना प्रारंभ किया था। लेकिन जब उन्हे लगा की बच्चों की स्थित गंभीर हो रही है और बच्चों की संख्या भी अधिक है तो उन्होंने सभी बच्चों को ईमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया और वहीं ईलाज भी प्रारंभ कर दिया। मामले की जानकारी मिलने पर बाल चिकित्सालय से भी चिकित्सक जिला चिकित्सालय पहुंचे और बच्चों का उपचार प्रारंभ किया।यहां कुछ ही देर में अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। कुछ बच्चे तो इतना घबरा गए थे की वह रोने लगे थे। कुछ बच्चों को इतनी ठंड लग रही थी थी नर्स एवं स्कूल स्टॉफ ने उन्हे कंबल ओडा कर हिम्मत रखने की बात कह रहे थे। गोली खाने से 6,7 एवं 8 कक्षा के बच्चे प्रभावित हुए है। इमरजेंसी वार्ड में जगह कम होने पर एक पलंग पर दो-दो बच्चों को लेटाकर उपचार दिया गया।


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