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अब जोर पकड़ेगी सिंधिया को सीएम प्रोजेक्ट करने की मांग

नवभारत न्यूज ग्वालियर, कोलारस एवं मुंगावली उपचुनावों में जीत का परचम फहराने के बाद कांग्रेस नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों के प्रति और अधिक विश्वास से भर गई है. इन दोनों सीटों पर कांग्रेस की जीत का सेहरा मप्र के कांग्रेसी छत्रप ज्योतिरादित्य सिंधिया के सिर बंधा है. सिंधिया एवं उनकी टीम ने इन दोनों सीटों पर विजय पताका फहराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी, अंतत: इन जीतोड़ प्रयासों का सुफल मिला है और विधानसभा चुनाव के एैन पहले कांग्रेस के खाते में बड़ी कामयाबी दर्ज हुई है. कोलारस एवं मुंगावली में जीतने के बाद कांग्रेस की अंदरूनी सियासत में ज्योतिरादित्य सिंधिया का दबदवा और अधिक बढ़ गया है. सिंधिया का कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद पर दावा मजबूत हुआ है. सिंधिया समर्थक खेमा अपने नेता को सीएम के रूप में प्रोजेक्ट किए जाने के लिए अब और अधिक पुरजोर ढंग से आवाज उठाएगा. राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि प्रदेश की कांग्रेसी राजनीति में तेजी से बदलाव होना तय हैे, गुटीय समीकरणों को देखते हुए कांग्रेस भले ही ज्योतिरादित्य सिंधिया को सीएम के रूप में ऐलानिया तौर पर प्रोजेक्ट न करे लेकिन उन्हें सशक्त कर प्रदेश के सर्वाधिक लोकप्रिय चेहरे के रूप में जनता के समक्ष पेश कर सकती है. पहले मुंगावली में महेंद्रसिंह कालूखेड़ा के निधन और इसके डेढ़ महीना बाद कोलारस में रामसिंह यादव के स्वर्गवासी होने के उपरांत यह स्पष्टï हो गया था कि मप्र की मौजूदा विधानसभा के अंतिम उपचुनाव इन्हीं दोनों विधानसभा सीटों पर होंगे. इसी के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया इन दोनों सीटों पर चुनावी कवायद में जुट गए थे. उन्होंने ग्वालियर के अपने विश्वस्त समर्थकों की टीम को कोलारस-मुंगावली में जुटा दिया. ग्वालियर से गए इन कांग्रेसजनों को सेक्टर प्रभारी से लेकर जोनल प्रभारी तक के महत्वपूर्ण दायित्व दिए गए. दोनों सीटों पर चुनाव अभियान का नेतृत्व एवं मॉनीटरिंग करने के लिए न सिर्फ सिंधिया डेरा डाले रहे बल्कि प्रदेश भर के अपने समर्थकों को भी यहां बुलवा कर उन्हें जिम्मेदारियां दीं. शुरू में कोलारस-मुंगावली की स्थानीय टीम एवं बाहर से आए कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने में कुछ व्यावहारिक अड़चनें आईं लेकिन जल्द ही स्थानीय एवं बाहरी टीम के बीच समन्वय स्थापित कर लिया गया.

मिशन 2018 तक एकता का जज्बा बनाए रखने की चुनौती

कोलारस एवं मुंगावली के उपचुनाव में कांग्रेस को मिली कामयाबी इसलिए और महत्वपूर्ण मानी जाएगी क्योंकि गुटों और उपगुटों में बंटी कांग्रेस ने यहां पूरी एकजुटता के साथ चुनाव लड़ा. पार्टी के अन्य छत्रपों के समर्थकों ने भी यहां सिंधिया का नेतृत्व स्वीकार करते हुए समवेत भाव के साथ चुनाव लड़ा. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मिशन-2018 में भी पार्टी यदि एैसी ही एकता बनाए रखती है तो पंद्रह वर्ष के बाद सूबे की सत्ता में कांग्रेस की वापसी मुमकिन हो सकती है."/>

अब जोर पकड़ेगी सिंधिया को सीएम प्रोजेक्ट करने की मांग

नवभारत न्यूज ग्वालियर, कोलारस एवं मुंगावली उपचुनावों में जीत का परचम फहराने के बाद कांग्रेस नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों के प्रति और अधिक विश्वास से भर गई है. इन दोनों सीटों पर कांग्रेस की जीत का सेहरा मप्र के कांग्रेसी छत्रप ज्योतिरादित्य सिंधिया के सिर बंधा है. सिंधिया एवं उनकी टीम ने इन दोनों सीटों पर विजय पताका फहराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी, अंतत: इन जीतोड़ प्रयासों का सुफल मिला है और विधानसभा चुनाव के एैन पहले कांग्रेस के खाते में बड़ी कामयाबी दर्ज हुई है. कोलारस एवं मुंगावली में जीतने के बाद कांग्रेस की अंदरूनी सियासत में ज्योतिरादित्य सिंधिया का दबदवा और अधिक बढ़ गया है. सिंधिया का कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद पर दावा मजबूत हुआ है. सिंधिया समर्थक खेमा अपने नेता को सीएम के रूप में प्रोजेक्ट किए जाने के लिए अब और अधिक पुरजोर ढंग से आवाज उठाएगा. राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि प्रदेश की कांग्रेसी राजनीति में तेजी से बदलाव होना तय हैे, गुटीय समीकरणों को देखते हुए कांग्रेस भले ही ज्योतिरादित्य सिंधिया को सीएम के रूप में ऐलानिया तौर पर प्रोजेक्ट न करे लेकिन उन्हें सशक्त कर प्रदेश के सर्वाधिक लोकप्रिय चेहरे के रूप में जनता के समक्ष पेश कर सकती है. पहले मुंगावली में महेंद्रसिंह कालूखेड़ा के निधन और इसके डेढ़ महीना बाद कोलारस में रामसिंह यादव के स्वर्गवासी होने के उपरांत यह स्पष्टï हो गया था कि मप्र की मौजूदा विधानसभा के अंतिम उपचुनाव इन्हीं दोनों विधानसभा सीटों पर होंगे. इसी के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया इन दोनों सीटों पर चुनावी कवायद में जुट गए थे. उन्होंने ग्वालियर के अपने विश्वस्त समर्थकों की टीम को कोलारस-मुंगावली में जुटा दिया. ग्वालियर से गए इन कांग्रेसजनों को सेक्टर प्रभारी से लेकर जोनल प्रभारी तक के महत्वपूर्ण दायित्व दिए गए. दोनों सीटों पर चुनाव अभियान का नेतृत्व एवं मॉनीटरिंग करने के लिए न सिर्फ सिंधिया डेरा डाले रहे बल्कि प्रदेश भर के अपने समर्थकों को भी यहां बुलवा कर उन्हें जिम्मेदारियां दीं. शुरू में कोलारस-मुंगावली की स्थानीय टीम एवं बाहर से आए कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने में कुछ व्यावहारिक अड़चनें आईं लेकिन जल्द ही स्थानीय एवं बाहरी टीम के बीच समन्वय स्थापित कर लिया गया.

मिशन 2018 तक एकता का जज्बा बनाए रखने की चुनौती

कोलारस एवं मुंगावली के उपचुनाव में कांग्रेस को मिली कामयाबी इसलिए और महत्वपूर्ण मानी जाएगी क्योंकि गुटों और उपगुटों में बंटी कांग्रेस ने यहां पूरी एकजुटता के साथ चुनाव लड़ा. पार्टी के अन्य छत्रपों के समर्थकों ने भी यहां सिंधिया का नेतृत्व स्वीकार करते हुए समवेत भाव के साथ चुनाव लड़ा. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मिशन-2018 में भी पार्टी यदि एैसी ही एकता बनाए रखती है तो पंद्रह वर्ष के बाद सूबे की सत्ता में कांग्रेस की वापसी मुमकिन हो सकती है."/>

अब जोर पकड़ेगी सिंधिया को सीएम प्रोजेक्ट करने की मांग

नवभारत न्यूज ग्वालियर, कोलारस एवं मुंगावली उपचुनावों में जीत का परचम फहराने के बाद कांग्रेस नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों के प्रति और अधिक विश्वास से भर गई है. इन दोनों सीटों पर कांग्रेस की जीत का सेहरा मप्र के कांग्रेसी छत्रप ज्योतिरादित्य सिंधिया के सिर बंधा है. सिंधिया एवं उनकी टीम ने इन दोनों सीटों पर विजय पताका फहराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी, अंतत: इन जीतोड़ प्रयासों का सुफल मिला है और विधानसभा चुनाव के एैन पहले कांग्रेस के खाते में बड़ी कामयाबी दर्ज हुई है. कोलारस एवं मुंगावली में जीतने के बाद कांग्रेस की अंदरूनी सियासत में ज्योतिरादित्य सिंधिया का दबदवा और अधिक बढ़ गया है. सिंधिया का कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद पर दावा मजबूत हुआ है. सिंधिया समर्थक खेमा अपने नेता को सीएम के रूप में प्रोजेक्ट किए जाने के लिए अब और अधिक पुरजोर ढंग से आवाज उठाएगा. राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि प्रदेश की कांग्रेसी राजनीति में तेजी से बदलाव होना तय हैे, गुटीय समीकरणों को देखते हुए कांग्रेस भले ही ज्योतिरादित्य सिंधिया को सीएम के रूप में ऐलानिया तौर पर प्रोजेक्ट न करे लेकिन उन्हें सशक्त कर प्रदेश के सर्वाधिक लोकप्रिय चेहरे के रूप में जनता के समक्ष पेश कर सकती है. पहले मुंगावली में महेंद्रसिंह कालूखेड़ा के निधन और इसके डेढ़ महीना बाद कोलारस में रामसिंह यादव के स्वर्गवासी होने के उपरांत यह स्पष्टï हो गया था कि मप्र की मौजूदा विधानसभा के अंतिम उपचुनाव इन्हीं दोनों विधानसभा सीटों पर होंगे. इसी के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया इन दोनों सीटों पर चुनावी कवायद में जुट गए थे. उन्होंने ग्वालियर के अपने विश्वस्त समर्थकों की टीम को कोलारस-मुंगावली में जुटा दिया. ग्वालियर से गए इन कांग्रेसजनों को सेक्टर प्रभारी से लेकर जोनल प्रभारी तक के महत्वपूर्ण दायित्व दिए गए. दोनों सीटों पर चुनाव अभियान का नेतृत्व एवं मॉनीटरिंग करने के लिए न सिर्फ सिंधिया डेरा डाले रहे बल्कि प्रदेश भर के अपने समर्थकों को भी यहां बुलवा कर उन्हें जिम्मेदारियां दीं. शुरू में कोलारस-मुंगावली की स्थानीय टीम एवं बाहर से आए कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने में कुछ व्यावहारिक अड़चनें आईं लेकिन जल्द ही स्थानीय एवं बाहरी टीम के बीच समन्वय स्थापित कर लिया गया.

मिशन 2018 तक एकता का जज्बा बनाए रखने की चुनौती

कोलारस एवं मुंगावली के उपचुनाव में कांग्रेस को मिली कामयाबी इसलिए और महत्वपूर्ण मानी जाएगी क्योंकि गुटों और उपगुटों में बंटी कांग्रेस ने यहां पूरी एकजुटता के साथ चुनाव लड़ा. पार्टी के अन्य छत्रपों के समर्थकों ने भी यहां सिंधिया का नेतृत्व स्वीकार करते हुए समवेत भाव के साथ चुनाव लड़ा. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मिशन-2018 में भी पार्टी यदि एैसी ही एकता बनाए रखती है तो पंद्रह वर्ष के बाद सूबे की सत्ता में कांग्रेस की वापसी मुमकिन हो सकती है.">

एकता और समन्वय के दम पर मिली कांग्रेस को जीत

2018/03/01



अब जोर पकड़ेगी सिंधिया को सीएम प्रोजेक्ट करने की मांग

नवभारत न्यूज ग्वालियर, कोलारस एवं मुंगावली उपचुनावों में जीत का परचम फहराने के बाद कांग्रेस नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनावों के प्रति और अधिक विश्वास से भर गई है. इन दोनों सीटों पर कांग्रेस की जीत का सेहरा मप्र के कांग्रेसी छत्रप ज्योतिरादित्य सिंधिया के सिर बंधा है. सिंधिया एवं उनकी टीम ने इन दोनों सीटों पर विजय पताका फहराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी, अंतत: इन जीतोड़ प्रयासों का सुफल मिला है और विधानसभा चुनाव के एैन पहले कांग्रेस के खाते में बड़ी कामयाबी दर्ज हुई है. कोलारस एवं मुंगावली में जीतने के बाद कांग्रेस की अंदरूनी सियासत में ज्योतिरादित्य सिंधिया का दबदवा और अधिक बढ़ गया है. सिंधिया का कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद पर दावा मजबूत हुआ है. सिंधिया समर्थक खेमा अपने नेता को सीएम के रूप में प्रोजेक्ट किए जाने के लिए अब और अधिक पुरजोर ढंग से आवाज उठाएगा. राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि प्रदेश की कांग्रेसी राजनीति में तेजी से बदलाव होना तय हैे, गुटीय समीकरणों को देखते हुए कांग्रेस भले ही ज्योतिरादित्य सिंधिया को सीएम के रूप में ऐलानिया तौर पर प्रोजेक्ट न करे लेकिन उन्हें सशक्त कर प्रदेश के सर्वाधिक लोकप्रिय चेहरे के रूप में जनता के समक्ष पेश कर सकती है. पहले मुंगावली में महेंद्रसिंह कालूखेड़ा के निधन और इसके डेढ़ महीना बाद कोलारस में रामसिंह यादव के स्वर्गवासी होने के उपरांत यह स्पष्टï हो गया था कि मप्र की मौजूदा विधानसभा के अंतिम उपचुनाव इन्हीं दोनों विधानसभा सीटों पर होंगे. इसी के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया इन दोनों सीटों पर चुनावी कवायद में जुट गए थे. उन्होंने ग्वालियर के अपने विश्वस्त समर्थकों की टीम को कोलारस-मुंगावली में जुटा दिया. ग्वालियर से गए इन कांग्रेसजनों को सेक्टर प्रभारी से लेकर जोनल प्रभारी तक के महत्वपूर्ण दायित्व दिए गए. दोनों सीटों पर चुनाव अभियान का नेतृत्व एवं मॉनीटरिंग करने के लिए न सिर्फ सिंधिया डेरा डाले रहे बल्कि प्रदेश भर के अपने समर्थकों को भी यहां बुलवा कर उन्हें जिम्मेदारियां दीं. शुरू में कोलारस-मुंगावली की स्थानीय टीम एवं बाहर से आए कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित करने में कुछ व्यावहारिक अड़चनें आईं लेकिन जल्द ही स्थानीय एवं बाहरी टीम के बीच समन्वय स्थापित कर लिया गया.

मिशन 2018 तक एकता का जज्बा बनाए रखने की चुनौती

कोलारस एवं मुंगावली के उपचुनाव में कांग्रेस को मिली कामयाबी इसलिए और महत्वपूर्ण मानी जाएगी क्योंकि गुटों और उपगुटों में बंटी कांग्रेस ने यहां पूरी एकजुटता के साथ चुनाव लड़ा. पार्टी के अन्य छत्रपों के समर्थकों ने भी यहां सिंधिया का नेतृत्व स्वीकार करते हुए समवेत भाव के साथ चुनाव लड़ा. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मिशन-2018 में भी पार्टी यदि एैसी ही एकता बनाए रखती है तो पंद्रह वर्ष के बाद सूबे की सत्ता में कांग्रेस की वापसी मुमकिन हो सकती है.


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